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Maharajganj News: सस्ती बाइक का ऑफर देकर जाल में फंसाया, रकम हड़प कर्जदार बनाया

Mon, 08 Sep 2025 01:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 08 Sep 2025 01:40 AM IST
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Trapped in the trap by offering a cheap bike, swindled the money and made him a debtor
महराजगंज। पुरंदरपुर थाना क्षेत्र के खुर्रमपुर लेहडा बाजार के कई लोगों को फरेंदा कस्बे की बाइक एजेंसी की ओर से चूना लगाया गया है। मेहनत मजदूरी करके, पाई पाई जोड़कर रकम एजेंसी में जमा की, लेकिन सभी को कर्जदार बना दिया गया। फोन आने के बाद लोगों को जानकारी हुई। एजेंट गरीबों को सस्ते ऑफर देकर जाल में फंसाया है। इसके बाद लाखों हड़प कर कर्जदार बना दिया।
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खुर्रपुर लेहड़ा बाजार के दयाशंकर ने बताया कि जनवरी में बाइक लेने का मन किया। गोरखपुर में मजूदरी करके थोड़ी-थोड़ी रकम एकत्र किया था। सोचा की बाइक हो जाएगी तो गोरखपुर जाकर काम करके वापस आना आसान हो जाएगा। एक एजेंट मिला, उसे कहा कि एक आफर आया है, दो से तीन हजार सस्ते में बाइक मिल जाएगी। सोचा की कुछ भी बच जाएगा तो ठीक रहेगा। उसकी बातों पर भरोसा कर 10 हजार रुपये रिश्तेदार से उधार लेकर कुल 95 हजार एकत्र किया। इसके बाद बाइक के शो रूम पर पहुंचा।
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वहां तो सब कुछ ठीक रहा। पेपर हस्ताक्षर कराया गया और आधार ले लिया गया। रकम देकर घर आने के बाद मार्च में फोन आया की बाइक की किश्त जमा करनी है। यह सुनकर सन्न रह गया। गांव में लगभग ज्यादातर लोग मेहनत मजदूरी करते हैं। उनकी गाढ़ी कमाई को जालसाजों ने एक झटके में हड़प लिया। काफी जद्दोजहद के बाद केस दर्ज हुआ। केस दर्ज करने में भी एजेंसी के मालिक का नाम पता नहीं दर्ज किया गया है। सिर्फ एजेंसी का नाम लिखकर उनको बचाया जा रहा है। इसी गांव के खरबान कहते हैं कि बाइक लेने में 95 हजार खर्च हो गए और आज भी कर्जदार बना दिया गया। पत्नी ने रकम बचाकर रखा था। बाइक एजेंसी के मालिक पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एक साल में थोड़ा-थोड़ा कर रकम एकत्र किया गया था। इसी गांव के हृदेश कहते हैं कि बाइक तो खरीदी लेकिन पता नहीं कैसे कर्जदार बन गया। कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
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धोखा देने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 20 हजार रुपये रिश्तेदार से उधार लिया था। सस्ते में बाइक दिलाने का झांसा देकर फंसाया गया था। इसी गांव में पंकज भी गुस्से का इजहार करते हुए आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि तहरीर देने के बाद भी नाम पता अज्ञात कर दिया गया। इससे यह लग रहा है कि आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। ठगी का शिकार होने वाले सभी लोग मेहनत मजदूरी करते हैं।
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