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असमन गांव में दम तोड़ रहा स्वच्छता अभियान

Sat, 08 Jan 2022 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jan 2022 11:27 PM IST
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toilet was bad conditions
असमन गांव में दम तोड़ रहा स्वच्छता अभियान
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निर्मित शौचालय में कहीं फाटक तो कहीं सीट नहीं, खुले में शौच जाने के विवश हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सिसवा क्षेत्र के असमन छपरा गांव के लोनिया टोला में स्वच्छता अभियान दम तोड़ रहा है। गांव के लोग आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं। निर्मित शौचालय में कहीं सीट नहीं है तो कहीं फाटक नहीं लगा है। रकम खर्च होने के बाद भी इसका उपयोग नहीं हो रहा है। गांव के लोगों के अनुसार शौचालय मद में मिली रकम को जैसे-तैसे खर्च कर दायित्व की इतिश्री कर दी गई है। जबकि गांव नगर पालिका सिसवां में शामिल हो गया है।
करीब दो साल पहले असमन छपरा गांव को नगर पालिका सिसवा का हिस्सा बना। गांव में करीब 1000 शौचालय बने हैं। लेकिन इनमें से करीब 70 प्रतिशत शौचालय बेकार हो गए हैं। निर्माण के दौरान किसी की सीट नहीं है तो किसी में फाटक नहीं है। ऐसे में इसका उपयोग गांव के लोगों द्वारा नहीं किया जा रहा है। कुछ तो ढांचा तैयार कर छोड़ दिया गया है। गांव के रमाकांत का कहना है कि ग्राम प्रधान एवं ठेकेदार ने मिलकर शौचालय तो बनवा दिया, लेकिन आधा-अधूरा बनने से बेकार साबित हो रहे हैं। राजेंद्र ने बताया कि शौचालय की रकम लाभार्थी को नहीं दी गई। ठेकेदार द्वारा बनाया गया, जिससे गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। गांव के लोग आज भी खुले में शौच जाने को विवश हैं। रूदल ने बताया कि फाइलों में ही स्वच्छता दिख रही है। हकीकत में तस्वीर खराब है। अगर रकम लाभार्थी को मिली होती तो शौचालय ठीक से बना होता। जिम्मेदारों ने मनमानी की। कन्हैया ने कहा कि स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन गांव में इसका असर नहीं दिख रहा है। शौचालय की रकम मिली तो बेहतर ढंग से बनवाया गया होता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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गांव की पूर्व प्रधान अनिता सिंह ने बताया कि गांव में सभी शौचालय बेहतर ढंग से बनवाए गए थे। लेकिन लाभार्थियों द्वारा बेहतर ढंग से रखरखाव नहीं किया गया, जिससे शौचालय बदहाल हो गए। शौचालय बनवाने में ग्राम पंचायत की ओर से पूरी पारदर्शिता बरती गई। साथ ही गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा गया था।
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स्वच्छता पर विशेष जोर है। अगर कहीं ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
केबी वर्मा, डीपीआरओ
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