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Maharajganj News: अवैध अस्पतालों पर कसा शिकंजा, रोज करना होगा हस्ताक्षर
Thu, 25 Apr 2024 06:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 25 Apr 2024 06:28 AM IST
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महराजगंज। अवैध अस्पताल और पैथोलॉजी पर शिकंजा कसा जा रहा है। पंजीकरण के लिए डॉक्टर का शपथ पत्र देने के साथ ही मौके पर आकर डॉक्टर को हस्ताक्षर भी करना पड़ेगा, इसके लिए एक प्रोफार्मा बनाया गया है। आवेदन करने वालों को जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी। बीते दिनों में जिले में अवैध अस्पतालों पर छापा डाला कर बंद कराया गया था। इसके बाद से आवेदन करने की होड़ लगी है। वहीं मानक पूरा करने में पसीना आ रहा है।
एक डॉक्टर के नाम पर कई अस्पताल चलाने के मामले में शासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब सभी निजी अस्पतालों को बोर्ड पर डॉक्टरों से लेकर स्टाफ नर्स तक के नाम लिखने होंगे। जिन्होंने नहीं लिखा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, विभिन्न क्षेत्रों में एक ही डॉक्टर द्वारा चार से पांच अस्पतालों में कार्य करने की शिकायतें मिल रही हैं। कई ऐसी भी शिकायतें आई हैं, जिसमें डॉक्टर का सिर्फ नाम होता है, जबकि निजी अस्पताल में सर्जरी कोई और करता है। ऐसी शिकायतों के मद्देनजर सभी अस्पतालों को डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट के नाम, पंजीयन और वहां होने वाली जांच सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद भी ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
इस पर स्वास्थ्य महानिदेशालय ने नए सिरे से निर्देश दिए हैं कि पंजीकृत हर अस्पताल की जांच की जाए। जो भी अस्पताल पंजीकृत हैं 45 दिन के अंदर उसका नाम, पता, स्वामित्व प्रभारी का नाम, उपचार की पद्धति, डॉक्टर, नर्स और फार्मासिस्ट का नाम, उसकी पंजीयन संख्या आदि अस्पताल परिसर में 15 वर्गफुट के बोर्ड पर लगाया जाए। इसे एनआईसी पोर्टल पर भी अपडेट किया जाए। यह भी निर्देश दिया गया है कि संबंधित जिले में अस्पतालों की सूची तैयार कराकर मुख्यालय भेजी जाए। यह सुनिश्चित करें कि उनके जिले में शत प्रतिशत अस्पतालों में डिस्प्ले बोर्ड लग गया है। भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर संबंधित जिलों में मुख्यालय की टीम रैंडम जांच करेगी। जिन अस्पताल का नाम सूची में होगा और वहां जांच के दौरान बोर्ड नहीं मिला तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नीम-हकीम कर रहे ऑपरेशन
फर्जी अस्पतालों में इलाज के नाम पर ऑपरेशन धड़ल्ले से किया जा रहा है। वहां न तो कोई डिग्रीधारक डाॅक्टर हैं और न ही प्रशिक्षित सहयोगी कर्मी। देहात क्षेत्र तो छोड़िए शहर में ही ऐसे कई निजी नर्सिंग होम हैं जिनका पंजीकरण तक नहीं हुआ है। यहां पर सीजेरियन प्रसव से लेकर अन्य ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं।
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पंजीकृत अस्पतालों में डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया है। समय-समय पर इसकी जांच की जाती है। नए नियम के अनुसार मानक को पूरा कराया जा रहा है। अस्पताल, पैथोलाॅजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण करने में सभी मानक पूरे कराए जा रहे हैं। मानक पूरा नहीं करने में पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
-डॉ. राजेश द्विवेदी, डिप्टी सीएमओ
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एक डॉक्टर के नाम पर कई अस्पताल चलाने के मामले में शासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब सभी निजी अस्पतालों को बोर्ड पर डॉक्टरों से लेकर स्टाफ नर्स तक के नाम लिखने होंगे। जिन्होंने नहीं लिखा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, विभिन्न क्षेत्रों में एक ही डॉक्टर द्वारा चार से पांच अस्पतालों में कार्य करने की शिकायतें मिल रही हैं। कई ऐसी भी शिकायतें आई हैं, जिसमें डॉक्टर का सिर्फ नाम होता है, जबकि निजी अस्पताल में सर्जरी कोई और करता है। ऐसी शिकायतों के मद्देनजर सभी अस्पतालों को डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट के नाम, पंजीयन और वहां होने वाली जांच सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद भी ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
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इस पर स्वास्थ्य महानिदेशालय ने नए सिरे से निर्देश दिए हैं कि पंजीकृत हर अस्पताल की जांच की जाए। जो भी अस्पताल पंजीकृत हैं 45 दिन के अंदर उसका नाम, पता, स्वामित्व प्रभारी का नाम, उपचार की पद्धति, डॉक्टर, नर्स और फार्मासिस्ट का नाम, उसकी पंजीयन संख्या आदि अस्पताल परिसर में 15 वर्गफुट के बोर्ड पर लगाया जाए। इसे एनआईसी पोर्टल पर भी अपडेट किया जाए। यह भी निर्देश दिया गया है कि संबंधित जिले में अस्पतालों की सूची तैयार कराकर मुख्यालय भेजी जाए। यह सुनिश्चित करें कि उनके जिले में शत प्रतिशत अस्पतालों में डिस्प्ले बोर्ड लग गया है। भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर संबंधित जिलों में मुख्यालय की टीम रैंडम जांच करेगी। जिन अस्पताल का नाम सूची में होगा और वहां जांच के दौरान बोर्ड नहीं मिला तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नीम-हकीम कर रहे ऑपरेशन
फर्जी अस्पतालों में इलाज के नाम पर ऑपरेशन धड़ल्ले से किया जा रहा है। वहां न तो कोई डिग्रीधारक डाॅक्टर हैं और न ही प्रशिक्षित सहयोगी कर्मी। देहात क्षेत्र तो छोड़िए शहर में ही ऐसे कई निजी नर्सिंग होम हैं जिनका पंजीकरण तक नहीं हुआ है। यहां पर सीजेरियन प्रसव से लेकर अन्य ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं।
पंजीकृत अस्पतालों में डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया है। समय-समय पर इसकी जांच की जाती है। नए नियम के अनुसार मानक को पूरा कराया जा रहा है। अस्पताल, पैथोलाॅजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण करने में सभी मानक पूरे कराए जा रहे हैं। मानक पूरा नहीं करने में पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
-डॉ. राजेश द्विवेदी, डिप्टी सीएमओ