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Maharajganj News: रोहू मछली के आएंगे तीन लाख मिक्स ब्रीड
Mon, 06 May 2024 03:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 06 May 2024 03:39 AM IST
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महराजगंज। जिले में इस बार रोहू मछली की तीन लाख रुपये की मिक्स ब्रीड मत्स्य विकास निगम गोरखपुर की हेचरी से आएगी। पिछली बार दो लाख रुपये की ब्रीड आई थी। इस बार डिमांड बढ़ने के पीछे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिलने वाली सब्सिडी को कारण बताया जा रहा है। 10 नए किसानों ने तालाब खुदाई कराई है, जिसमें से दो को आवेदन के बाद पैसा मिल चुका है। शेष को भी शीघ्र यह प्राप्त हो जाएगा।
जिले में मछली उत्पादन का व्यापार तेजी से फल फूल रहा है। नेपाल की तराई में बसा महराजगंज मिनी बंगाल के रूप में प्रदेश में जाना पहचाना जाने लगा है। जिले में 97 हेचरियां रजिस्टर्ड हैं जो कामन, पापलेट, बैखी, सिल्वर आदि के बच्चे बिक्री करते हैं। इसके लिए 3400 तालाब पंजीकृत हैं। 1700 निजी जमीन तो बाकी पट्टे पर हैं।
नया तालाब बनवाने वालों को मत्स्य योजना से अनुदान मिलता है। पिछले साल 15 को तो इस साल भी आठ की संख्या में खुदाई कराने वाले लाभ के लिए आवेदन कर चुके हैं। इन लोगों को हेक्टेयर के हिसाब से खुदाई का पैसा तो मिलता ही है साथ ही विभाग से बीज खरीद में भी अनुदान मिलता है। अनुदान और बेहतर ब्रीड के लिए मत्स्य विभाग से ही ब्रीड की खरीदारी मत्स्य पालक करते हैं। हेचरियों की संख्या यहां अधिक होने के कारण अधिक खरीदारी बाहरी व्यापारी इन्हीं से करते हैं, लेकिन नए और स्थानीय मत्स्य पालक विभाग से खरीद करने के पक्षधर हैं।
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जिले में मछली उत्पादन का व्यापार तेजी से फल फूल रहा है। नेपाल की तराई में बसा महराजगंज मिनी बंगाल के रूप में प्रदेश में जाना पहचाना जाने लगा है। जिले में 97 हेचरियां रजिस्टर्ड हैं जो कामन, पापलेट, बैखी, सिल्वर आदि के बच्चे बिक्री करते हैं। इसके लिए 3400 तालाब पंजीकृत हैं। 1700 निजी जमीन तो बाकी पट्टे पर हैं।
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नया तालाब बनवाने वालों को मत्स्य योजना से अनुदान मिलता है। पिछले साल 15 को तो इस साल भी आठ की संख्या में खुदाई कराने वाले लाभ के लिए आवेदन कर चुके हैं। इन लोगों को हेक्टेयर के हिसाब से खुदाई का पैसा तो मिलता ही है साथ ही विभाग से बीज खरीद में भी अनुदान मिलता है। अनुदान और बेहतर ब्रीड के लिए मत्स्य विभाग से ही ब्रीड की खरीदारी मत्स्य पालक करते हैं। हेचरियों की संख्या यहां अधिक होने के कारण अधिक खरीदारी बाहरी व्यापारी इन्हीं से करते हैं, लेकिन नए और स्थानीय मत्स्य पालक विभाग से खरीद करने के पक्षधर हैं।
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