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Maharajganj News: कस्टम ड्यूटी पर सर्वोच्च न्यायालय ने नेपाल सरकार से मांगा जवाब
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सोनौली। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने नेपाल-भारत सीमा पर 100 रुपये से अधिक कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने के सरकारी फैसले के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर सरकार को कारण बताओ आदेश जारी किया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि इस फैसले को क्यों न अवैध ठहराया जाए।
मंगलवार की दोपहर एक प्रेसवार्ता कर रुपनदेही जिले के पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश न्यायाधीश नृपध्वज निरौला की एकल पीठ ने अधिवक्ताओं अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोगी सिंह और प्रशांत बिक्रम शाह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि अदालत ने मामले को अंतरिम आदेश पर विचार के लिए भी आगे भेजने का निर्देश दिया है। बताया कि नेपाल-चीन सीमा चौकियों और त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से आने वाले यात्रियों को लाखों रुपये के कस्टम छूट मिलती है जबकि भारत के साथ खुली सीमा पर मात्र सौ रुपए की सीमा तय करना भेदभावपूर्ण है। इससे विशेष रूप से मधेस और सीमावर्ती तराई क्षेत्र के लोगों के साथ भौगोलिक और वर्गीय असमानता की जा रही है। पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने कहा कि हम लोगों की तरफ से याचिकाकर्ताओं ने सौ रुपए की सीमा को “अव्यावहारिक और तर्कहीन” बताते हुए कहा कि महंगाई के वर्तमान दौर में दैनिक उपयोग की सब्जियां, दवाइयां और कपड़े इस राशि में खरीदना संभव नहीं है।
इसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को रोजमर्रा का सामान लाने में कस्टम भंसार अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि अंतिम निर्णय आने तक सीमावर्ती नागरिकों को दैनिक उपयोग और सामाजिक ,वैवाहिक कार्यों के लिए सामान लाने पर किसी प्रकार की रोक न हो और कस्टम ड्यूटी की वसूली पर रोक लगाई जाए।
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मंगलवार की दोपहर एक प्रेसवार्ता कर रुपनदेही जिले के पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश न्यायाधीश नृपध्वज निरौला की एकल पीठ ने अधिवक्ताओं अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोगी सिंह और प्रशांत बिक्रम शाह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि अदालत ने मामले को अंतरिम आदेश पर विचार के लिए भी आगे भेजने का निर्देश दिया है। बताया कि नेपाल-चीन सीमा चौकियों और त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से आने वाले यात्रियों को लाखों रुपये के कस्टम छूट मिलती है जबकि भारत के साथ खुली सीमा पर मात्र सौ रुपए की सीमा तय करना भेदभावपूर्ण है। इससे विशेष रूप से मधेस और सीमावर्ती तराई क्षेत्र के लोगों के साथ भौगोलिक और वर्गीय असमानता की जा रही है। पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने कहा कि हम लोगों की तरफ से याचिकाकर्ताओं ने सौ रुपए की सीमा को “अव्यावहारिक और तर्कहीन” बताते हुए कहा कि महंगाई के वर्तमान दौर में दैनिक उपयोग की सब्जियां, दवाइयां और कपड़े इस राशि में खरीदना संभव नहीं है।
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इसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को रोजमर्रा का सामान लाने में कस्टम भंसार अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि अंतिम निर्णय आने तक सीमावर्ती नागरिकों को दैनिक उपयोग और सामाजिक ,वैवाहिक कार्यों के लिए सामान लाने पर किसी प्रकार की रोक न हो और कस्टम ड्यूटी की वसूली पर रोक लगाई जाए।
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