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Maharajganj News: मदरिया पहाड़ पर गूंजा दम मदार-बेड़ा पार

Tue, 10 Feb 2026 02:04 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 02:04 AM IST
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The sound of thunder echoed on the Madaria mountain, across the Madar-fleet.
मदार बाबा की मजार पर उमड़ा नेपाल समेत यूपी
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बिहार के श्रद्धालुओं का हुजूम
ठूठीबारी। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक मदार बाबा की मजार का दीदार करने के लिए सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। मदरिया पहाड़ की कठिन चढ़ाई के दौरान दम मदार-बेड़ा पार के जयघोष से पहाड़ों की वादियां गुंजायमान हो उठीं।
नेपाल के नवलपरासी जिले में महलबारी के निकट हजारों फुट ऊंचे पहाड़ पर बदीउद्दीन मदार साहब की सदियों पुरानी मजार है। मान्यता है कि इसी ऊंची पहाड़ी के घने जंगल में मदार के पेड़ के नीचे बैठकर बदीउद्दीन मदार साहब ने 40 दिन का चिल्ला (कठोर तपस्या) की थी। साथ ही यह भी मान्यता है कि भगवान शंकर ने अपने विवाह में साथ गए भूत-प्रेत बरातियों को इसी पहाड़ी पर रूकने को कहा था। तभी से भूत-प्रेत इसी पहाड़ी पर रहकर भगवान भोलेनाथ के आदेश का इंतजार कर रहे हैं और वही प्रेत बाधाओं से ग्रस्त लोगों को मुक्ति दिलाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो श्रद्धालु दुर्गम पहाड़ी रास्ते से मदार स्थान जाकर मन्नतें मांगता है, उसकी मुराद मदार बाबा पूरी करते हैं। इस स्थान को मदार स्थान के नाम से जाने जाना जाता है।
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जानकारी के मुताबिक, यहां 13 दिन तक मेला लगता है। मेले का समापन महाशिवरात्रि के दिन होता है। मदार स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के साथ आपसी सौहार्द के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां हर साल भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के भारी संख्या में श्रद्धालु आकर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रमुख जगहों पर सीसीटीवी कैमरे के साथ ही चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। संवाद
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दुर्गम पहाड़ी रास्तों से मदार बाबा के दर्शन को पहुंचते हैं श्रद्धालु
महलबारी से सीधे हजारों फीट ऊंचे पहाड़ पर बदीउद्दीन मदार साहब की मजार है। यहां के दुर्गम रास्ते को देखकर लोगों की हिम्मत जवाब दे जाती है, मगर श्रद्धालु जब आस्था के साथ पहाड़ों पर चढ़ना शुरू करते हैं तो 7 घंटे की कठिन चढ़ाई आसान हो जाती है।


मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस मुस्तैद

मदार स्थान मेले की सुरक्षा में 60 प्रहरी पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल के 25 जवान तथा मेला समिति के 20 कार्यकर्ता श्रद्धालुओं की सेवा में लगाए गए हैं। कुतबुल मदार शाह कमेटी के सचिव अजमुद्दीन अंंसारी ने बताया कि दुर्गम पहाड़ी रास्तों से आ-जा रहे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए कमेटी के कार्यकर्ता और पुलिस के जवान मुस्तैद हैं।
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