{"_id":"6a272ae3acc5fb04b6013955","slug":"the-reconstruction-work-of-the-old-pond-was-stalled-due-to-the-cutting-of-the-canal-track-maharajganj-news-c-206-1-mhg1007-178840-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: नहर की पटरी कटने से पुराने पोखरे के पुनर्निर्माण कार्य पर फिरा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: नहर की पटरी कटने से पुराने पोखरे के पुनर्निर्माण कार्य पर फिरा पानी
विज्ञापन
मनरेगा के तहत 6 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा था पुनर्निर्माण
अभी 30 फीसद कार्य हो पाया था पूरा, उच्चस्तरीय जांच की मांग
मिठौरा। स्थानीय ब्लॉक के कसमरिया गांव में मनरेगा के तहत करीब 6 लाख रुपये खर्च कर कराए जा रहे पोखरे के पुनर्निर्माण और सुंदरीकरण कार्य पर पानी फिर गया। रविवार की रात नहर की पटरी अचानक कट गई, जिससे काफी मात्रा में पानी पोखरे में भर गया। इसके चलते अब तक हुए निर्माण कार्य को गंभीर क्षति पहुंची है।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में सिंचाई विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए जांच कराने और मनरेगा मजदूरों को मजदूरी भुगतान की मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कसमरिया में मनरेगा योजना के तहत करीब 6 लाख रुपये खर्च करके पुराने पोखरे का पुनर्निर्माण एवं सुंदरीकरण कार्य कराया जा रहा था।
योजना के तहत अभी करीब 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया था। इसमें बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर कार्यरत थे। इसी बीच रविवार की रात मधुबनी नहर की लगभग 10 मीटर चौड़ी पटरी कट गई और नहर का पानी पोखरे में भर गया, जिससे पूरा निर्माण स्थल जलमग्न हो गया।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि नहर की पटरी पहले से ही जर्जर अवस्था में थी। मनरेगा मजदूरों ने सुरक्षा की दृष्टि से पोखरे के साथ ही नहर की क्षतिग्रस्त पटरी की भी मरम्मत की थी, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। बावजूद इसके रात में अचानक पटरी कट जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पटरी कटने की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक कारणों का पता चल सके। उनका कहना है कि यदि विभाग ने समय रहते जर्जर पटरी की मरम्मत करा दी होती तो इतनी बड़ी क्षति नहीं होती।
ग्राम प्रधान संदेश पटेल ने बताया कि नहर की कमजोर पटरी की मरम्मत पहले ही करा दी गई थी। बावजूद इसके रात में पटरी कैसे कट गई, यह जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि इस घटना से मनरेगा योजना का कार्य प्रभावित हुआ है तथा मजदूरों के रोजगार और मजदूरी पर भी संकट उत्पन्न हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घटना की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा मनरेगा मजदूरों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निर्माण कार्य को हुए नुकसान का आकलन कराकर भुगतान कराया जाए।
विज्ञापन
अभी 30 फीसद कार्य हो पाया था पूरा, उच्चस्तरीय जांच की मांग
मिठौरा। स्थानीय ब्लॉक के कसमरिया गांव में मनरेगा के तहत करीब 6 लाख रुपये खर्च कर कराए जा रहे पोखरे के पुनर्निर्माण और सुंदरीकरण कार्य पर पानी फिर गया। रविवार की रात नहर की पटरी अचानक कट गई, जिससे काफी मात्रा में पानी पोखरे में भर गया। इसके चलते अब तक हुए निर्माण कार्य को गंभीर क्षति पहुंची है।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में सिंचाई विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए जांच कराने और मनरेगा मजदूरों को मजदूरी भुगतान की मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कसमरिया में मनरेगा योजना के तहत करीब 6 लाख रुपये खर्च करके पुराने पोखरे का पुनर्निर्माण एवं सुंदरीकरण कार्य कराया जा रहा था।
विज्ञापन
योजना के तहत अभी करीब 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया था। इसमें बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर कार्यरत थे। इसी बीच रविवार की रात मधुबनी नहर की लगभग 10 मीटर चौड़ी पटरी कट गई और नहर का पानी पोखरे में भर गया, जिससे पूरा निर्माण स्थल जलमग्न हो गया।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि नहर की पटरी पहले से ही जर्जर अवस्था में थी। मनरेगा मजदूरों ने सुरक्षा की दृष्टि से पोखरे के साथ ही नहर की क्षतिग्रस्त पटरी की भी मरम्मत की थी, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। बावजूद इसके रात में अचानक पटरी कट जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पटरी कटने की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक कारणों का पता चल सके। उनका कहना है कि यदि विभाग ने समय रहते जर्जर पटरी की मरम्मत करा दी होती तो इतनी बड़ी क्षति नहीं होती।
ग्राम प्रधान संदेश पटेल ने बताया कि नहर की कमजोर पटरी की मरम्मत पहले ही करा दी गई थी। बावजूद इसके रात में पटरी कैसे कट गई, यह जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि इस घटना से मनरेगा योजना का कार्य प्रभावित हुआ है तथा मजदूरों के रोजगार और मजदूरी पर भी संकट उत्पन्न हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घटना की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा मनरेगा मजदूरों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निर्माण कार्य को हुए नुकसान का आकलन कराकर भुगतान कराया जाए।