{"_id":"69d02688996a2334d705c22e","slug":"the-production-of-eco-friendly-plates-and-bowls-opened-the-way-for-the-groups-progress-maharajganj-news-c-206-1-go11002-174670-2026-04-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: ईको फ्रेंडली दोना-पत्तल के उत्पादन से खुला समूह की तरक्की का रास्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: ईको फ्रेंडली दोना-पत्तल के उत्पादन से खुला समूह की तरक्की का रास्ता
विज्ञापन
बागापार में ईको फ्रेंडली दोना पत्तल बनाती समूह की महिलाएं।
साखू-सागौन पत्ते व गन्ना खोई से किया जा रहा पत्तल का उत्पादन
एक वर्ष में ही हो रही 25 हजार रुपये प्रति माह की कमाई
महराजगंज। सदर ब्लॉक एनआरएलएम समूह की महिलाएं अपने अनूठे व्यवसाय चयन प्रतिभा व मार्गदर्शन से बेहतर आय प्राप्त कर रहीं हैं। एसएचजी बागापार में ओम नाम से संचालित समूह से जुड़कर 10 महिलाएं ईको फ्रेंडली दोना-पत्तल का निर्माण कर कमाई कर रही हैं।
बागापार ओम आजीविका समूह वंदना की अगुवाई में तरक्की कर रहा है। समूह से जुड़कर कुल 10 महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। इसे बनाने के लिए दो लाख रुपये की लागत से बैंगलुरू से मशीन मंगाई गई। निर्माण कार्य का प्रशिक्षण एनआरएलएम से मिला। महज एक वर्ष के भीतर इस समूह के ईको फ्रेंडली उत्पादों को बाजार ने हाथों हाथ लिया। इससे समूह की प्रति माह की कमाई 25 हजार रुपये से अधिक हो रही है। समूह की प्रत्येक महिला का काम तय है। साथ ही उनका हिस्सा भी उसी के हिसाब से निर्धारित किया गया है।
ऐसे होता है उत्पादन
ईको फ्रेंडली द़ोना व पत्तल बनाने के लिए सर्वप्रथम साखू सागौन के पत्ते एवं गन्ने की खोई को कूटकर लुगदी तैयार की जाती है। इस लुगदी के जरिये विभिन्न तरह के दोना और पत्तल तैयार किए जाते हैं। लुगदी बनाने, मशीन में डालने, आकार देने व सूखकर निकलने के बाद सौ-सौ नग की गड्डी में लगाने के लिए अलग-अलग महिलाओं के दायित्व तय कर दिए गए हैं। समूह की अध्यक्ष वंदना, उपाध्यक्ष संतोला, कोषाध्यक्ष कौशल्या है। जबकि सरस्वती, आशा, शीला, भगवानी, सुनीता, सुशीला व नगीना सदस्य हैं। समूह की अध्यक्ष ने बताया कि सभी की मेहनत से ईको फ्रेंडली उत्पाद तैयार होते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
सदर ब्लॉक में बागापार की समूह महिलाएं काफी बेहतर ईको फ्रेंडली दोना पत्तल बना रही हैं। प्लास्टिक व थर्माकोल पर प्रतिबंध के बाद इनकी कमाई बढ़ी है। एक वर्ष के भीतर ही समूह ने अपनी मेहनत को साबित कर दिखाया। विभाग से प्रशिक्षण व ऋण इत्यादि जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराया जाता है।
- मो. जाकिर, उपायुक्त एनआरएलएम महराजगंज
विज्ञापन
एक वर्ष में ही हो रही 25 हजार रुपये प्रति माह की कमाई
महराजगंज। सदर ब्लॉक एनआरएलएम समूह की महिलाएं अपने अनूठे व्यवसाय चयन प्रतिभा व मार्गदर्शन से बेहतर आय प्राप्त कर रहीं हैं। एसएचजी बागापार में ओम नाम से संचालित समूह से जुड़कर 10 महिलाएं ईको फ्रेंडली दोना-पत्तल का निर्माण कर कमाई कर रही हैं।
बागापार ओम आजीविका समूह वंदना की अगुवाई में तरक्की कर रहा है। समूह से जुड़कर कुल 10 महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। इसे बनाने के लिए दो लाख रुपये की लागत से बैंगलुरू से मशीन मंगाई गई। निर्माण कार्य का प्रशिक्षण एनआरएलएम से मिला। महज एक वर्ष के भीतर इस समूह के ईको फ्रेंडली उत्पादों को बाजार ने हाथों हाथ लिया। इससे समूह की प्रति माह की कमाई 25 हजार रुपये से अधिक हो रही है। समूह की प्रत्येक महिला का काम तय है। साथ ही उनका हिस्सा भी उसी के हिसाब से निर्धारित किया गया है।
विज्ञापन
ऐसे होता है उत्पादन
ईको फ्रेंडली द़ोना व पत्तल बनाने के लिए सर्वप्रथम साखू सागौन के पत्ते एवं गन्ने की खोई को कूटकर लुगदी तैयार की जाती है। इस लुगदी के जरिये विभिन्न तरह के दोना और पत्तल तैयार किए जाते हैं। लुगदी बनाने, मशीन में डालने, आकार देने व सूखकर निकलने के बाद सौ-सौ नग की गड्डी में लगाने के लिए अलग-अलग महिलाओं के दायित्व तय कर दिए गए हैं। समूह की अध्यक्ष वंदना, उपाध्यक्ष संतोला, कोषाध्यक्ष कौशल्या है। जबकि सरस्वती, आशा, शीला, भगवानी, सुनीता, सुशीला व नगीना सदस्य हैं। समूह की अध्यक्ष ने बताया कि सभी की मेहनत से ईको फ्रेंडली उत्पाद तैयार होते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
सदर ब्लॉक में बागापार की समूह महिलाएं काफी बेहतर ईको फ्रेंडली दोना पत्तल बना रही हैं। प्लास्टिक व थर्माकोल पर प्रतिबंध के बाद इनकी कमाई बढ़ी है। एक वर्ष के भीतर ही समूह ने अपनी मेहनत को साबित कर दिखाया। विभाग से प्रशिक्षण व ऋण इत्यादि जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराया जाता है।
- मो. जाकिर, उपायुक्त एनआरएलएम महराजगंज