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Maharajganj News: ढाई सिगरेट के धुएं जितनी खराब है शहर की हवा
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ढाई सिगरेट के धुएं जितनी खराब है शहर की हवा
एक सिगरेट से निकलता है 64.8 एक्यूआई के बराबर प्रदूषण, 162 पर पहुंचा शहर का एक्यूआई
सुबह नौ बजे तक स्मॉग की सफेद चादर में लिपटा रहा शहर, कहीं-कहीं दृश्यता भी रही कम
जिला अस्पताल की ओपीडी में बढ़ गए हैं सांस के रोगी, 25 तक पहुंची ऐसे मरीजों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। अगर आप सिगरेट नहीं भी पीते हैं, तब भी ढाई सिगरेट के बराबर धुआं आपका फेफड़ा झेल रहा है। ऐसा शहर की हवा प्रदूषित होने की वजह से हो रहा है। सोमवार को हवा की गुणवत्ता का सूचकांक (एक्यूआई) 162 दर्ज किया गया। एक सिगरेट से 64.8 एक्यूआई के बराबर प्रदूषण निकलता है। इस हिसाब से एक आदमी ढाई सिगरेट के बराबर धुआं निगल रहा है। ऐसे ही हालत रहे तो आने वाले दिनों में हवा और ज्यादा खराब हो सकती है।
सोमवार की सुबह करीब नौ बजे तक शहर धुंध की चादर में लिपटा रहा। सबसे ज्यादा असर गोरखपुर रोड पर पेट्रोल पंप से आगे नजर आया। यहां आगे का हिस्सा नजर नहीं आ रहा था। नमी बढ़ने की वजह से धूल और धुएं के कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इस वजह से वातावरण में धुंध की चादर बन रही है। जानकार बताते हैं कि यह धुंध नहीं बल्कि धूल और धुएं से मिलकर बना स्मॉग है, जोकि सेहत के लिए हानिकारक है। इसकी वजह से अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आजकल सांस के 20 से 25 मरीज आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी के शुरूआत में तापमान गिरने से नमी बढ़ जाती है। इस वजह से हवा में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का प्रसार धीमा हो जाता है। इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। इनके वायुमंडल की ऊपरी सतह में नहीं जा पाने के कारण हवा प्रदूषित हो जाती है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल के अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं और पराली आदि जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
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काशीराम आवास पोखरी से देखने पर कुछ दूरी तक दिखी धुंध
सोमवार को शहर में सुबह धुंध की चादर छाई रही। रिहायशी इलाकों में यह कम रहा, लेकिन भाजपा कार्यालय की ओर जाने वाली सड़क पर आगे बढ़ने पर इसका जबरदस्त असर नजर आया। सुबह नौ बजे काशीराम आवास पोखरी से देखने पर कुछ दूरी तक धुंध दिख रही थी। धुंध के कारण तरकुलवा में इमारतें छिप गई थीं। इसका असर शाम को देखने को मिला। ऐसी स्थिति आगे भी रहेगी। विशेषज्ञों ने बताया कि नवंबर और दिसंबर महीने में ऐसी स्थिति रहती है। वातावरण में नमी होने की वजह से प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का आकार बढ़ जा रहा है। इससे परदा बन जा रहा, जिससे दृश्यता कम हो जा रही है।
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सुबह की सैर से हो सकता है नुकसान
जिस तरह से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा है और स्मॉग की चादर सुबह काफी देर तक शहर पर लिपटी रहती है, उसमें सुबह सैर नुकसानदेह हो सकती है। प्रूदषित हवा में सांस लेने पर कई बीमारियां हो सकती हैं। सांस संंबंधी बीमारी परेशान कर सकती है।
लगातार खराब हो रही हवा की गुणवत्ता
शहर की हवा लगातार खराब होती जा रही है। एक नवंबर को हवा की गुणवत्ता संतोषजनक थी। रविवार को एक्यूआई 159 पर पहुंच गया, जो थोड़े खराब स्तर का माना जाता है। हवा के इस स्तर से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। खासकर उनको, जिनको पहले से फेफड़े से संबंधित रोग है।
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वातावरण में नमी के कारण एयर वायु और धुएं के कण बड़े आकार के हो जा रहे हैं। इस वजह से यह ऊपर नहीं उठ पा रहे, जिससे नीचे की तरफ एक परत बन जा रही है। इनका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति है। अन्य जगहों पर सुबह और शाम को इसका असर नजर आ रहा है। नवंबर से लेकर दिसंबर तक ऐसे हालात बने रह सकते हैं।
- डॉ. अजय कुमार मिश्र, प्राचार्य, जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज
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धूल और धुएं के कारण जो धुंध छा रही है, वह अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है। ऐसे मौसम में अस्थमा अटैक आना सामान्य बात है। इसलिए अस्थमा के मरीज धुंध व धूल से बचें और अपनी नियमित दवाएं लेते रहें।
- डॉ. एएम भाष्कर, चेस्ट रोग विशेषज्ञ
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सुबह नौ बजे तक स्मॉग की सफेद चादर में लिपटा रहा शहर, कहीं-कहीं दृश्यता भी रही कम
जिला अस्पताल की ओपीडी में बढ़ गए हैं सांस के रोगी, 25 तक पहुंची ऐसे मरीजों की संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। अगर आप सिगरेट नहीं भी पीते हैं, तब भी ढाई सिगरेट के बराबर धुआं आपका फेफड़ा झेल रहा है। ऐसा शहर की हवा प्रदूषित होने की वजह से हो रहा है। सोमवार को हवा की गुणवत्ता का सूचकांक (एक्यूआई) 162 दर्ज किया गया। एक सिगरेट से 64.8 एक्यूआई के बराबर प्रदूषण निकलता है। इस हिसाब से एक आदमी ढाई सिगरेट के बराबर धुआं निगल रहा है। ऐसे ही हालत रहे तो आने वाले दिनों में हवा और ज्यादा खराब हो सकती है।
सोमवार की सुबह करीब नौ बजे तक शहर धुंध की चादर में लिपटा रहा। सबसे ज्यादा असर गोरखपुर रोड पर पेट्रोल पंप से आगे नजर आया। यहां आगे का हिस्सा नजर नहीं आ रहा था। नमी बढ़ने की वजह से धूल और धुएं के कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इस वजह से वातावरण में धुंध की चादर बन रही है। जानकार बताते हैं कि यह धुंध नहीं बल्कि धूल और धुएं से मिलकर बना स्मॉग है, जोकि सेहत के लिए हानिकारक है। इसकी वजह से अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आजकल सांस के 20 से 25 मरीज आ रहे हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी के शुरूआत में तापमान गिरने से नमी बढ़ जाती है। इस वजह से हवा में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का प्रसार धीमा हो जाता है। इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। इनके वायुमंडल की ऊपरी सतह में नहीं जा पाने के कारण हवा प्रदूषित हो जाती है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल के अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं और पराली आदि जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
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काशीराम आवास पोखरी से देखने पर कुछ दूरी तक दिखी धुंध
सोमवार को शहर में सुबह धुंध की चादर छाई रही। रिहायशी इलाकों में यह कम रहा, लेकिन भाजपा कार्यालय की ओर जाने वाली सड़क पर आगे बढ़ने पर इसका जबरदस्त असर नजर आया। सुबह नौ बजे काशीराम आवास पोखरी से देखने पर कुछ दूरी तक धुंध दिख रही थी। धुंध के कारण तरकुलवा में इमारतें छिप गई थीं। इसका असर शाम को देखने को मिला। ऐसी स्थिति आगे भी रहेगी। विशेषज्ञों ने बताया कि नवंबर और दिसंबर महीने में ऐसी स्थिति रहती है। वातावरण में नमी होने की वजह से प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का आकार बढ़ जा रहा है। इससे परदा बन जा रहा, जिससे दृश्यता कम हो जा रही है।
सुबह की सैर से हो सकता है नुकसान
जिस तरह से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा है और स्मॉग की चादर सुबह काफी देर तक शहर पर लिपटी रहती है, उसमें सुबह सैर नुकसानदेह हो सकती है। प्रूदषित हवा में सांस लेने पर कई बीमारियां हो सकती हैं। सांस संंबंधी बीमारी परेशान कर सकती है।
लगातार खराब हो रही हवा की गुणवत्ता
शहर की हवा लगातार खराब होती जा रही है। एक नवंबर को हवा की गुणवत्ता संतोषजनक थी। रविवार को एक्यूआई 159 पर पहुंच गया, जो थोड़े खराब स्तर का माना जाता है। हवा के इस स्तर से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। खासकर उनको, जिनको पहले से फेफड़े से संबंधित रोग है।
वातावरण में नमी के कारण एयर वायु और धुएं के कण बड़े आकार के हो जा रहे हैं। इस वजह से यह ऊपर नहीं उठ पा रहे, जिससे नीचे की तरफ एक परत बन जा रही है। इनका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति है। अन्य जगहों पर सुबह और शाम को इसका असर नजर आ रहा है। नवंबर से लेकर दिसंबर तक ऐसे हालात बने रह सकते हैं।
- डॉ. अजय कुमार मिश्र, प्राचार्य, जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज
धूल और धुएं के कारण जो धुंध छा रही है, वह अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है। ऐसे मौसम में अस्थमा अटैक आना सामान्य बात है। इसलिए अस्थमा के मरीज धुंध व धूल से बचें और अपनी नियमित दवाएं लेते रहें।
- डॉ. एएम भाष्कर, चेस्ट रोग विशेषज्ञ