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Maharajganj News: ढोल-ताशे के साथ निकले ताजिए, युवाओं ने दिखाए साहसी करतब

Sat, 27 Jun 2026 01:56 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2026 01:56 AM IST
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Tazia processions taken out amidst the beating of drums and cymbals; youths displayed daring feats.
नौतनवा में निकाला गया ताजिया जुलूस एवं जुलूस में शामिल लोग। ढोल-ताशा बजाते लोग व करतब दिखाते यु
शांति और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया मुहर्रम
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हजरत इमाम हुसैन, उनके परिजन व अन्य की कर्बला के मैदान में दी गई शहादत की याद में मनाया जाता है मुहर्रम

महराजगंज। पूरे जिले में शुक्रवार को मुहर्रम शांति और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। मुहर्रम पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन, उनके परिजन और वफादार साथियों की कर्बला के मैदान में दी गई शहादत की याद में मनाया जाता है। 1400 वर्षों के बाद भी कर्बला का संदेश समूची मानवता के लिए आज भी उतना ही जीवंत, प्रासंगिक और प्रेरणादायक है, जितना उस समय था।
जानकारी के अनुसार, महराजगंज शहर समेत फरेंदा, नौतनवा, ठूठीबारी, मिठौरा, निचलौल, अड्डा बाजार, सिसवा बाजार, घुघली, भिटौली और परतावल, पनियरा में मुहर्रम पर ताजिए का जुलूस पुलिस के कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच ''या हुसैन'' के नारे के साथ निकाला गया। ढोल-ताशे के साथ जुलूस में निकले छोटे-बड़े रंग-बिरंगे ताजिए और मुस्लिम समुदाय के युवकों का करतब देखने के लिए सड़क पर भीड़ उमड़ पड़ी। शाम को ताजियादारों ने ताजिए को सिपुर्द-ए-खाक कर दिया। इस दौरान जगह-जगह परंपरागत रूप से बनाए गए कर्बला के मैदान में मेले का आयोजन किया गया। े
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सिसवा बाजार प्रतिनिधि के अनुसार,
सिसवा कस्बे के नौका टोला, मिस्कारी टोला, बीजापार पोखरा टोला, गजरू टोला सहित कई मुहल्लों से ताजिया जुलूस के साथ अखाड़ा निकाला गया। इसमें युवाओं ने लाठी-भाला, तलवार से करतब दिखाते हुए पूरे नगर का भ्रमण किया। इस दौरान या हुसैन या हुसैन के नारे से वातावरण गूंजने लगा। जुलूस में ताजियादार अपने सिर पर ताजिया रखे चल रहे थे। शाम को सभी अखाड़े बीजापार स्थित क़र्बला पर पहुंचे, जहां ताजियों को दफनाने के बाद वापस अपने घर चले गए।
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ठूठीबारी प्रतिनिधि के अनुसार
मुहर्रम पर ठूठीबारी में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। इसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में इसमें भाग लेकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम मनाया।
तिरंगा झंडा के साथ निकाला जूलूस, दिखाए करतब
फरेंदा। बृजमनगंज में शुक्रवार को मुहर्रम के अवसर पर 786 अखाड़ा के कलाकारों ने जुलूस निकाला। जुलूस में अखाड़ा कलाकारों ने हैरतअंगेज कारनामे दिखाए। साथ ही जुलूस में देशभक्ति की झलक देखने को मिली। अखाड़ा के दौरान तिरंगा लहराते हुए अखाड़ा कलाकारों ने राष्ट्रगान गया। जुलूस में बड़ी संख्या ताजिया शामिल रहा। अखाड़ा जुलूस शाहाबाद स्थित मदरसा से निकल कर कोल्हुई तिराहा, रेलवे स्टेशन चौराहा, कालेज रोड, लेदवां चौराहा होते हुए कर्बला पहुंचा। अखाड़ा अध्यक्ष अब्दुल सलाम, सभासद जेपी गौंड, अनूप चौरसिया, मनोज जायसवाल, जितेंद्र कुमार, सुहेब अहमद, साजिद अली, मोहम्मद आरिफ उर्फ राजू, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद कुरैसी, मोहम्मद आसिफ, सन्नी इसराइल, कल्लू सहित अन्य मौजूद रहे। संवाद
इमाम हुसैन की शहादत की याद में रोजा रखकर की जाती है इबादत
महराजगंज। मदरसा अरबिया अताउर्र रसूल के मौलाना अब्दुल कय्यूम मिस्बाही ने बताया कि इस्लामी इतिहास के मुताबिक 61 हिजरी (680 ईस्वी) में हजरत मुआविया की मृत्यु के बाद उनके पुत्र यजीद को मुस्लिम साम्राज्य का शासक घोषित किया गया। इस्लामी इतिहासकारों के अनुसार, यजीद चाहता था कि मुस्लिम समाज के प्रमुख व्यक्तित्व उसके शासन को वैधता प्रदान करें। उस समय मदीना में मौजूद इमाम हुसैन ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इमाम हुसैन का विरोध किसी व्यक्तिगत शत्रुता, राजनीतिक महत्वाकांक्षा या सत्ता प्राप्ति की इच्छा से प्रेरित नहीं था। उनका मानना था कि शासन व्यवस्था का आधार न्याय, परामर्श, उत्तरदायित्व और नैतिकता होनी चाहिए। यदि सत्ता इन मूल्यों से विमुख हो जाए तो उसके प्रति मौन समर्थन भी अन्याय को बढ़ावा देता है। इसी दौरान इराक के कूफा नगर से हजारों पत्र इमाम हुसैन को प्राप्त हुए, जिनमें उनसे नेतृत्व स्वीकार करने और वहां आने का अनुरोध किया गया था, जिस पर इमाम हुसैन अपने परिवार और चुनिंदा साथियों को लेकर मक्का से कूफा के लिए रवाना हुए किंतु कर्बला के मैदान में उन्हें यजीद की सेना ने घेर लिया। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि इमाम हुसैन और उनके साथियों को कई दिनों तक पानी से वंचित रखा गया। छोटे बच्चों, महिलाओं और वृद्धों सहित पूरा काफिला अत्यंत कठिन परिस्थितियों से गुजरा। अंततः 10 वीं तारीख 61 हिजरी को इमाम हुसैन, उनके परिवार के अनेक सदस्य और उनके 72 वफादार साथी यजीद के सैनिकों के साथ संघर्ष करते हुए शहीद हो गए। इसी शहादत की याद में मुहर्रम का त्योहार मनाया जाता है, जिसमें शहीदों की यादगारी में मुस्लिम समुदाय रोजा रखकर इबादत करता है।

राहगीरों को पिलाया नींबू पानी
परसामलिक। नौतनवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चकदह टोला आजाद नगर चौराहे पर मुस्लिम समुदाय के समाजसेवियों ने मुहर्रम पर शुक्रवार को चिलचिलाती धूप को देखते हुए राहगीरों को नींबू पानी व शरबत पिलाकर प्यास बुझाई। चिलचिलाती धूप व भीषण गर्मी में नींबू-पानी और शरबत पाकर राहगीरों के चेहरे खिल उठे। अख्तर हुसैन, कादिर अली, मोहम्मद शरफराज, अब्दुल कयूम,पीर मोहम्मद,रियाज आदि ने बताया कि हर साल मुहर्रम पर हुसैन की शहादत की याद में राहगीरों में नींबू-पानी और शरबत पिलाया जाता है।
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