{"_id":"648f058ea883789de100a614","slug":"talent-gets-scattered-before-it-shines-in-sports-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1022-352-2023-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: खेल में निखरने से पहले बिखर जाती हैं प्रतिभाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: खेल में निखरने से पहले बिखर जाती हैं प्रतिभाएं
विज्ञापन
1695 परिषदीय स्कूलों में से महज 10 प्रतिशत में ही खेल शिक्षक
200 शिक्षकों व अनुदेशकों के भरोसे संचालित होता है परिषदीय खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में संचालित होने वाले 1695 परिषदीय स्कूलों में से महज 10 प्रतिशत स्कूल में ही खेल शिक्षक की तैनाती हैं। ऐसे में 90 प्रतिशत स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को दूसरे विषय के शिक्षकों पर आश्रित रहना पड़ता है। अधूरी व्यवस्था से विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही खेल से जोड़ने में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे भविष्य में उनकी प्रतिभा निखरने से पहले ही बिखर जाती है।
जिले के सभी 1695 परिषदीय विद्यालयों में वर्तमान में कुल दो लाख 70 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन्हें खेल संबंधी गतिविधि से जोड़ने के लिए उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय में 100 से अधिक अनुदेशक व प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में लगभग 100 शिक्षक भी हैं जो खेल संबंधी गतिविधियों को बेहतर ढंग से कराते हैं। जिन विद्यालयों पर ये शिक्षक मौजूद हैं वहां पर तो खेल में बच्चों की स्थिति बेहतर है, मगर जहां पर नहीं हैं वहां पर विद्यार्थियों को खेल क्षेत्र में प्रोत्साहित करने में समस्या आ रही है। बच्चों की खेल संबंधी प्रतिभा को बिखरने से बचाने के लिए विभाग को कदम उठाने होंगे।
-- -- -- --
नियमित गतिविधियों के न होने से भी समस्या
विद्यालयों में खेल शिक्षक तैयार न किए जाने से नियमित रूप से बच्चों को खेल संबंधी गतिविधियां भी नहीं कराई जाती हैं। जिससे उनके अभ्यास में समस्या आती है। प्रतियोगिता में सीधे तौर पर हिस्सा लेने से वे बहुत कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं होते तथा हार कर कुंठित होते हुए लौट जाते हैं।
विज्ञापन
-- -
परिषदीय स्कूलों में खेल शिक्षकों की कमी है। फिर भी अनुदेशकों व खेलों में रुचि रखने वाले शिक्षकों की बदौलत ही खेल संबंधी गतिविधियों पर व्यापक जोर दिया जाता है।
- अमरनाथ राय, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
200 शिक्षकों व अनुदेशकों के भरोसे संचालित होता है परिषदीय खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में संचालित होने वाले 1695 परिषदीय स्कूलों में से महज 10 प्रतिशत स्कूल में ही खेल शिक्षक की तैनाती हैं। ऐसे में 90 प्रतिशत स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को दूसरे विषय के शिक्षकों पर आश्रित रहना पड़ता है। अधूरी व्यवस्था से विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही खेल से जोड़ने में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे भविष्य में उनकी प्रतिभा निखरने से पहले ही बिखर जाती है।
जिले के सभी 1695 परिषदीय विद्यालयों में वर्तमान में कुल दो लाख 70 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन्हें खेल संबंधी गतिविधि से जोड़ने के लिए उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय में 100 से अधिक अनुदेशक व प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में लगभग 100 शिक्षक भी हैं जो खेल संबंधी गतिविधियों को बेहतर ढंग से कराते हैं। जिन विद्यालयों पर ये शिक्षक मौजूद हैं वहां पर तो खेल में बच्चों की स्थिति बेहतर है, मगर जहां पर नहीं हैं वहां पर विद्यार्थियों को खेल क्षेत्र में प्रोत्साहित करने में समस्या आ रही है। बच्चों की खेल संबंधी प्रतिभा को बिखरने से बचाने के लिए विभाग को कदम उठाने होंगे।
विज्ञापन
नियमित गतिविधियों के न होने से भी समस्या
विद्यालयों में खेल शिक्षक तैयार न किए जाने से नियमित रूप से बच्चों को खेल संबंधी गतिविधियां भी नहीं कराई जाती हैं। जिससे उनके अभ्यास में समस्या आती है। प्रतियोगिता में सीधे तौर पर हिस्सा लेने से वे बहुत कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं होते तथा हार कर कुंठित होते हुए लौट जाते हैं।
विज्ञापन
परिषदीय स्कूलों में खेल शिक्षकों की कमी है। फिर भी अनुदेशकों व खेलों में रुचि रखने वाले शिक्षकों की बदौलत ही खेल संबंधी गतिविधियों पर व्यापक जोर दिया जाता है।
- अमरनाथ राय, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी