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हेमंत ऋतु में मधुर, खट्टा एवं नमकीन आहार लाभदायक : प्रो. एसएन सिंह
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हेमंत ऋतु में मधुर, खट्टा एवं नमकीन आहार लाभदायक : प्रो. एसएन सिंह
महराजगंज। आईटीएम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज चेहरी की ओर से हर घर, हर दिन आयुर्वेद मुहिम के तहत बुधवार को ग्राम सभा सवरेजी में स्वास्थ्य शिविर एवं स्वास्थ्य चौपाल का आयोजन किया गया। प्रो. डॉ. एसएन सिंह ने आयुर्वेद में हर एक ऋतु के अनुसार आहार एवं विहार के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि हेमंत ऋतु मध्य अक्तूबर से मध्य दिसंबर तक होता है। यह समय दक्षिणायन विसर्ग काल के अंतर्गत आता है। इस अवधि में शारीरिक बल बढ़ा हुआ रहता है। अत: इस काल में अत्यधिक पोषण के कारण होने वाली व्याधियों को आहार एवं विहार नियंत्रित करना चाहिए। हेमंत ऋतु में मधुर ,खट्टा एवं नमकीन पदार्थ लेना, दूध, दही, घी लेना, शहद एव गुनगुने पानी का सेवन हितकर है।
उन्होंने कहा कि कुछ आहार ऐसे हैं, जिसे विपरीत ऋतु में लेने से शरीर के अंदर बीमारियां पैदा होती हैं, इसलिए इस ऋतु में तीखा, कड़वा, कषाय रस युक्त भोजन, उपवास, शीतल जल व शीतल वातावरण का प्रयोग बिल्कुल भी न करें। इसके प्रयोग मात्र से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।
डॉ. किरण ने वात पित्त कफ का सिद्धांत ग्रामीणजन को विस्तार से बताया। पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. कृति ने कहा कि पंचकर्म के लिए यह मौसम लाभदायक है। पंचकर्म द्वारा अपने जीवनी शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। जब जीवनी शक्ति बढ़ेगी तो असीम ऊर्जा की अनुभूति भी होगी।
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शल्य कर्म विशेषज्ञ डॉ. नीथू ने कहा कि ज्यादा मसालेदार, तीखा और फास्ट फूड से बवासीर होने का ख़तरा रहता है, इसलिए बचाव जरूरी है। प्राचार्य डॉ. गौथमन ने कहा कि जब सभी जन सामान्य आयुर्वेद के प्रति जागरूक होंगे, तो चिकित्सा के दुष्प्रभाव एवं अनावश्यक खर्च से भी बच सकेंगे। इस दौरान डॉ. आशुतोष, प्रज्जु, राहुल, ग्राम प्रधान अवधेश पांडेय आदि मौजूद थे।
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महराजगंज। आईटीएम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज चेहरी की ओर से हर घर, हर दिन आयुर्वेद मुहिम के तहत बुधवार को ग्राम सभा सवरेजी में स्वास्थ्य शिविर एवं स्वास्थ्य चौपाल का आयोजन किया गया। प्रो. डॉ. एसएन सिंह ने आयुर्वेद में हर एक ऋतु के अनुसार आहार एवं विहार के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि हेमंत ऋतु मध्य अक्तूबर से मध्य दिसंबर तक होता है। यह समय दक्षिणायन विसर्ग काल के अंतर्गत आता है। इस अवधि में शारीरिक बल बढ़ा हुआ रहता है। अत: इस काल में अत्यधिक पोषण के कारण होने वाली व्याधियों को आहार एवं विहार नियंत्रित करना चाहिए। हेमंत ऋतु में मधुर ,खट्टा एवं नमकीन पदार्थ लेना, दूध, दही, घी लेना, शहद एव गुनगुने पानी का सेवन हितकर है।
उन्होंने कहा कि कुछ आहार ऐसे हैं, जिसे विपरीत ऋतु में लेने से शरीर के अंदर बीमारियां पैदा होती हैं, इसलिए इस ऋतु में तीखा, कड़वा, कषाय रस युक्त भोजन, उपवास, शीतल जल व शीतल वातावरण का प्रयोग बिल्कुल भी न करें। इसके प्रयोग मात्र से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।
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डॉ. किरण ने वात पित्त कफ का सिद्धांत ग्रामीणजन को विस्तार से बताया। पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. कृति ने कहा कि पंचकर्म के लिए यह मौसम लाभदायक है। पंचकर्म द्वारा अपने जीवनी शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। जब जीवनी शक्ति बढ़ेगी तो असीम ऊर्जा की अनुभूति भी होगी।
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शल्य कर्म विशेषज्ञ डॉ. नीथू ने कहा कि ज्यादा मसालेदार, तीखा और फास्ट फूड से बवासीर होने का ख़तरा रहता है, इसलिए बचाव जरूरी है। प्राचार्य डॉ. गौथमन ने कहा कि जब सभी जन सामान्य आयुर्वेद के प्रति जागरूक होंगे, तो चिकित्सा के दुष्प्रभाव एवं अनावश्यक खर्च से भी बच सकेंगे। इस दौरान डॉ. आशुतोष, प्रज्जु, राहुल, ग्राम प्रधान अवधेश पांडेय आदि मौजूद थे।