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Maharajganj News: दिन में सख्ती...रात के अंधेरे में दलालों का बोलबाला
Thu, 06 Nov 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 06 Nov 2025 12:51 AM IST
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जिला अस्पताल के बाहर लगी भीड़।
बस्ती। जिला अस्पताल के दिन और रात के कामकाज में जमीन-आसमान का अंतर है। मंगलवार की रात करीब 10 बजे दलाल सक्रिय दिखे तो बुधवार की सुबह करीब 11:30 बजे सबकुछ चाक-चौबंद दिखा।
कार्तिक पूर्णिमा पर्व होने के नाते ओपीडी दोपहर 12 बजे तक थी। तीमारदारों ने कहा कि अवकाश होने की वजह से दलाल नहीं दिख रहे हैं, नहीं तो डॉक्टर को दिखने के बाद पीछे-पीछे लग जाते हैं। मनपसंद दुकान से दवा खरीदवाते हैं और जांच के नाम पर बरगलाते हैं।
मंगलवार को ओपीडी 827 रही तो बुधवार को 394 मरीजों ने इलाज कराया। जिला अस्पताल का मंगलवार की रात को जायजा लिया गया तो इमरजेंसी और वार्डों में अजनबियों के आने पर तीमारदार सजग हो जाते थे। पूछने पर बताया कि आजकल शाम छह बजे अंधेरा हो जाता है। डर लगा रहता है कि सामान चोरी न कर ले जाए, इसलिए सतर्कता बरतनी पड़ती है। भानपुर की मरीज हेमलता के साथ आए राजेश ने बताया कि डॉक्टर दो तरह की पर्ची पर दवा लिखते हैं। एक पर अस्पताल में मिलने वाली दवा होती है तो दूसरे पर लिखी बाहर से खरीदनी पड़ती है।
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मरीज या तीमारदार के हाथ में दो तरह की दवा पर्ची देखते ही दलाल पीछा करने लगते हैं। कहते हैं कि आइए आपको अच्छी कंपनी की सस्ती दवा दिला देते हैं। जल्द ही मर्ज भी ठीक हो जाएगा।
कुछ इसी तरह का जांच के नाम पर भी खेल चल रहा है। सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें जिला अस्पताल में उपलब्ध है, मगर यह रोज साथ नहीं देती हैं। अक्सर किसी न किसी कारण से जांच ठप हो जाती है। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता या फिर बाहर से जांच करानी पड़ती है।
तीमारदार सोहन का कहना है कि यदि मरीज मेडिकल कॉलेज जांच कराने के लिए जाने लगते हैं तो दलाल बरगलाने शुरू कर देते हैं। उनका कहना होता है कि मेडिकल कॉलेज में एक दिन में जांच संभव नहीं है। वहां लंबी लाइन लगती है। इस से अच्छा है कि बाहर ही जांच करा लीजिए। ऐसे में मरीज या तीमारदार दलालों के झांसे में आ रुपये खर्च कर बाहर जांच कराने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
मरीजों से भर रहने वाले वार्ड दिखे खाली: जिला अस्पताल के अधिकतर वार्ड बुधवार को खाली दिखे। मेडिकल वार्ड के 22 बेड पर सिर्फ नौ मरीज भर्ती थी, जबकि इस वार्ड के बरामदे में लगे नौ के नौ बेड खाली थे। कुछ ऐसा ही है चिल्ड्रेन वार्ड में देखने को मिला। 25 बेड के इस वार्ड में 13 बच्चे भर्ती थे। 10 बेड के पीआईसीयू में पांच खाली थे।
न्यू सर्जिकल वार्ड के सामने फेंक दिया कूड़ा :वार्डों में सफाई और बेड़ों के चादर भले ही लकदक दिखे, मगर न्यू सर्किल वार्ड के सामने किसी ने कूड़ा फेंक दिया था। यह कूड़ा अस्पताल प्रशासन के साफ-सफाई के दावे पर दाग लगाने के लिए काफी था।
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कार्तिक पूर्णिमा पर्व होने के नाते ओपीडी दोपहर 12 बजे तक थी। तीमारदारों ने कहा कि अवकाश होने की वजह से दलाल नहीं दिख रहे हैं, नहीं तो डॉक्टर को दिखने के बाद पीछे-पीछे लग जाते हैं। मनपसंद दुकान से दवा खरीदवाते हैं और जांच के नाम पर बरगलाते हैं।
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मंगलवार को ओपीडी 827 रही तो बुधवार को 394 मरीजों ने इलाज कराया। जिला अस्पताल का मंगलवार की रात को जायजा लिया गया तो इमरजेंसी और वार्डों में अजनबियों के आने पर तीमारदार सजग हो जाते थे। पूछने पर बताया कि आजकल शाम छह बजे अंधेरा हो जाता है। डर लगा रहता है कि सामान चोरी न कर ले जाए, इसलिए सतर्कता बरतनी पड़ती है। भानपुर की मरीज हेमलता के साथ आए राजेश ने बताया कि डॉक्टर दो तरह की पर्ची पर दवा लिखते हैं। एक पर अस्पताल में मिलने वाली दवा होती है तो दूसरे पर लिखी बाहर से खरीदनी पड़ती है।
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मरीज या तीमारदार के हाथ में दो तरह की दवा पर्ची देखते ही दलाल पीछा करने लगते हैं। कहते हैं कि आइए आपको अच्छी कंपनी की सस्ती दवा दिला देते हैं। जल्द ही मर्ज भी ठीक हो जाएगा।
कुछ इसी तरह का जांच के नाम पर भी खेल चल रहा है। सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें जिला अस्पताल में उपलब्ध है, मगर यह रोज साथ नहीं देती हैं। अक्सर किसी न किसी कारण से जांच ठप हो जाती है। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता या फिर बाहर से जांच करानी पड़ती है।
तीमारदार सोहन का कहना है कि यदि मरीज मेडिकल कॉलेज जांच कराने के लिए जाने लगते हैं तो दलाल बरगलाने शुरू कर देते हैं। उनका कहना होता है कि मेडिकल कॉलेज में एक दिन में जांच संभव नहीं है। वहां लंबी लाइन लगती है। इस से अच्छा है कि बाहर ही जांच करा लीजिए। ऐसे में मरीज या तीमारदार दलालों के झांसे में आ रुपये खर्च कर बाहर जांच कराने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
मरीजों से भर रहने वाले वार्ड दिखे खाली: जिला अस्पताल के अधिकतर वार्ड बुधवार को खाली दिखे। मेडिकल वार्ड के 22 बेड पर सिर्फ नौ मरीज भर्ती थी, जबकि इस वार्ड के बरामदे में लगे नौ के नौ बेड खाली थे। कुछ ऐसा ही है चिल्ड्रेन वार्ड में देखने को मिला। 25 बेड के इस वार्ड में 13 बच्चे भर्ती थे। 10 बेड के पीआईसीयू में पांच खाली थे।
न्यू सर्जिकल वार्ड के सामने फेंक दिया कूड़ा :वार्डों में सफाई और बेड़ों के चादर भले ही लकदक दिखे, मगर न्यू सर्किल वार्ड के सामने किसी ने कूड़ा फेंक दिया था। यह कूड़ा अस्पताल प्रशासन के साफ-सफाई के दावे पर दाग लगाने के लिए काफी था।