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Maharajganj News: कहीं पट्टे की जमीन को बेच डाला तो कहीं खेल मैदान पर कब्जा
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जालसाजों का नेटवर्क तहसील से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस तक फैला, लोगों को झांसा देकर दलाल जमीन बेचकर उलझा देते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जालसाजों का नेटवर्क तहसील से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस तक फैला है। कहीं पट्टे की जमीन को बैनामा करा दिया गया, तो कहीं खेल मैदान की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। इन मामलों के शिकायती पत्र अधिकारियों की टेबल पर धूल फांक रहे हैं। दलालों के झांसे में अगर कोई फंसा तो रकम भी हाथ से जाएगी, जमीन भी नहीं मिलेगी। शिकायती पत्र लेकर इधर-उधर भटकना पडे़गा। महराजगंज में भी एक साल पहले फर्जी रजिस्ट्री कराने के मामले में कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन दलालों को नेटवर्क कमजोर होने के बजाए मजबूत होता चला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, गुलरभार गांव की खतौनी के खाता संख्या 399 आराजी नंबर 314 रकवा 0.113 हेक्टयर भूमि को कृषि कार्य के लिए चन्नर निवासी मिश्रवलिया को पट्टा किया गया था। उक्त भूमि के संपूर्ण हिस्से को 25 अक्तूबर 2021 को पट्टेधारक ने गांव के रहने वाली एक महिला के नाम बैनामा कर दिया। इतना ही नहीं जिम्मेदारों ने पट्टेधारक की ओर से बेचने वाली भूमि को 4 जनवरी 2022 को बैनामा के आधार पर जमीन खरीदने वाली महिला को भूमिधर दर्ज कर दिया।
निचलौल कस्बे के घोडहवा मुहल्ले के रहने वाले जनार्दन गुप्ता ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजा है। पत्र के अनुसार कस्बे में सरकारी भूमि पर फर्जी इंद्राज के जरिए संस्था के नाम जमीन कर भवन बनवा दिया गया है। चकबंदी के दौरान भूमि को बागवानी व खेल मैदान के लिए सुरक्षित छोड़ा गया था। दलालों की नजर इस कीमती जमीन पर पड़ी तो सरकारी भूमि पर कब्जा कर दिया गया। दलालों ने जमीनों के मामले धाेखाधड़ी का खेल जमकर खेला है। इसकी तस्दीक पुराने मामले करने के लिए काफी है। जानकारों के अनुसार जमीन खरीदने से पहले पूरी तरह से पड़ताल की जरूरत होती है, नहीं तो दलाल फंसा देंगे।
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नेपाली नागरिक भूमि का बैनामा कराकर दूसरे को बेचा
निचलौल क्षेत्र में भारत नेपाल बॉर्डर से सटे ठूठीबारी में वर्ष 2013 में दलालों की साठगांठ से एक नेपाली व्यक्ति बैजनाथ जायसवाल ने भूमि की खरीदारी की। जिसमें ठूठीबारी निवासी ओमप्रकाश, राधेश्याम और मनोज कुमार की हिस्सेदारी थी। राधेश्याम ने बताया कि नेपाली व्यक्ति बैजनाथ जायसवाल उक्त भूमि पर दलालों की मदद से अकेले काबिज हो गया। कोर्ट में शिकायत करने के बाद उक्त भूमि को नेपाली व्यक्ति ने नेपाल के ही रहने वाले अपने दोस्त सुबास अग्रवाल के बेटी शिखा केजरीवाल के नाम से बैनामा कर दिया। जिसकी शादी देवरिया में हुई है।
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जालसाजों ने बेची सेवानिवृत्त सीनियर ऑडिटर की जमीन
सेवानिवृत्त सीनियर ऑडिटर राजेश द्विवेदी निवासी अलीनगर गोरखपुर की जिले के निचलौल शहर के कटरा चौराहे पर स्थित अराजी संख्या 2188 क्षेत्रफल में 0.4740 हेक्टेयर भूमि है। जिसमें से जालसाजों में 19 जुलाई को एक एकड़ 18 डिस्मिल भूमि को फर्जी तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम से बैनामा कर दिया। जबकि शेष बचे भूमि को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करा लिया। मामले की जानकारी होने पर काफी भागदौड़ करने के बाद पुलिस ने जुलाई 2022 के अंत में जालसाजों पर संबंधित धाराओं में किसी तरह से केस दर्ज किया, लेकिन इस प्रकरण की विवेचना जारी है।
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फोटो
जिसके नाम से भूमि का पट्टा हुआ होता है। तो वह 10 वर्ष बाद भूमिधर (श्रेणी 1 क) घोषित हो जाता है। जिसके बाद ही वह बैनामा करने के हकदार होता है। अगर ऐसा नहीं हुआ है तो वह उक्त भूमि को किसी दूसरे के नाम से बैनामा करने का हकदार नहीं है। उक्त प्रकरण की जानकारी मिली है। उक्त पट्टे की भूमि को अभी भूमिधर घोषित नहीं किया गया है, लेकिन पट्टेधारक ने उक्त भूमि को बैनामा कर दिया है। वहीं जिम्मेदारों की ओर से खारिज दाखिल भी कर दिया गया है, जो अपराध के श्रेणी में आता है।
अरविंद मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता
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एक साल पहले फर्जी बैनामा मामले में उप निबंधक सहित 11 पर केस हुआ था दर्ज
निचलौल तहसील के उप निबंधक कार्यालय में फर्जी तरीके से बैनामा कराने के मामले में 10 सितंबर 2022 को उपनिबंधक सहित 11 पर केस दर्ज हुआ था। पीड़ित अखिलेश द्विवेदी निवासी अलीनगर कोतवाली गोरखपुर ने तहरीर में बताया था कि पिता भालेन्दू देव एवं चाचा आनंद देव और शशि देव के नाम से निचलौल शहर स्थित अराजी संख्या 2188 क्षेत्रफल में 0.4740 हेक्टेयर भूमि है। पिता भालेन्दू देव की सात सितंबर वर्ष 2014 को मौत हो चुकी है। जबकि चाचा आनंद देव काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। जो बिस्तर छोड़ने में असमर्थ थे। इसी बीच जानकारी मिली कि मृत पिता भालेन्दू देव और चाचा आनंद देव व शशि देव के स्थान पर कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से फोटो लगाकर उक्त भूमि को रजिस्ट्री कार्यालय में गत 19 जुलाई बैनामा करा लिया है। इस प्रकरण केस दर्ज हुआ था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जालसाजों का नेटवर्क तहसील से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस तक फैला है। कहीं पट्टे की जमीन को बैनामा करा दिया गया, तो कहीं खेल मैदान की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। इन मामलों के शिकायती पत्र अधिकारियों की टेबल पर धूल फांक रहे हैं। दलालों के झांसे में अगर कोई फंसा तो रकम भी हाथ से जाएगी, जमीन भी नहीं मिलेगी। शिकायती पत्र लेकर इधर-उधर भटकना पडे़गा। महराजगंज में भी एक साल पहले फर्जी रजिस्ट्री कराने के मामले में कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन दलालों को नेटवर्क कमजोर होने के बजाए मजबूत होता चला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, गुलरभार गांव की खतौनी के खाता संख्या 399 आराजी नंबर 314 रकवा 0.113 हेक्टयर भूमि को कृषि कार्य के लिए चन्नर निवासी मिश्रवलिया को पट्टा किया गया था। उक्त भूमि के संपूर्ण हिस्से को 25 अक्तूबर 2021 को पट्टेधारक ने गांव के रहने वाली एक महिला के नाम बैनामा कर दिया। इतना ही नहीं जिम्मेदारों ने पट्टेधारक की ओर से बेचने वाली भूमि को 4 जनवरी 2022 को बैनामा के आधार पर जमीन खरीदने वाली महिला को भूमिधर दर्ज कर दिया।
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निचलौल कस्बे के घोडहवा मुहल्ले के रहने वाले जनार्दन गुप्ता ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजा है। पत्र के अनुसार कस्बे में सरकारी भूमि पर फर्जी इंद्राज के जरिए संस्था के नाम जमीन कर भवन बनवा दिया गया है। चकबंदी के दौरान भूमि को बागवानी व खेल मैदान के लिए सुरक्षित छोड़ा गया था। दलालों की नजर इस कीमती जमीन पर पड़ी तो सरकारी भूमि पर कब्जा कर दिया गया। दलालों ने जमीनों के मामले धाेखाधड़ी का खेल जमकर खेला है। इसकी तस्दीक पुराने मामले करने के लिए काफी है। जानकारों के अनुसार जमीन खरीदने से पहले पूरी तरह से पड़ताल की जरूरत होती है, नहीं तो दलाल फंसा देंगे।
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नेपाली नागरिक भूमि का बैनामा कराकर दूसरे को बेचा
निचलौल क्षेत्र में भारत नेपाल बॉर्डर से सटे ठूठीबारी में वर्ष 2013 में दलालों की साठगांठ से एक नेपाली व्यक्ति बैजनाथ जायसवाल ने भूमि की खरीदारी की। जिसमें ठूठीबारी निवासी ओमप्रकाश, राधेश्याम और मनोज कुमार की हिस्सेदारी थी। राधेश्याम ने बताया कि नेपाली व्यक्ति बैजनाथ जायसवाल उक्त भूमि पर दलालों की मदद से अकेले काबिज हो गया। कोर्ट में शिकायत करने के बाद उक्त भूमि को नेपाली व्यक्ति ने नेपाल के ही रहने वाले अपने दोस्त सुबास अग्रवाल के बेटी शिखा केजरीवाल के नाम से बैनामा कर दिया। जिसकी शादी देवरिया में हुई है।
जालसाजों ने बेची सेवानिवृत्त सीनियर ऑडिटर की जमीन
सेवानिवृत्त सीनियर ऑडिटर राजेश द्विवेदी निवासी अलीनगर गोरखपुर की जिले के निचलौल शहर के कटरा चौराहे पर स्थित अराजी संख्या 2188 क्षेत्रफल में 0.4740 हेक्टेयर भूमि है। जिसमें से जालसाजों में 19 जुलाई को एक एकड़ 18 डिस्मिल भूमि को फर्जी तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम से बैनामा कर दिया। जबकि शेष बचे भूमि को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करा लिया। मामले की जानकारी होने पर काफी भागदौड़ करने के बाद पुलिस ने जुलाई 2022 के अंत में जालसाजों पर संबंधित धाराओं में किसी तरह से केस दर्ज किया, लेकिन इस प्रकरण की विवेचना जारी है।
फोटो
जिसके नाम से भूमि का पट्टा हुआ होता है। तो वह 10 वर्ष बाद भूमिधर (श्रेणी 1 क) घोषित हो जाता है। जिसके बाद ही वह बैनामा करने के हकदार होता है। अगर ऐसा नहीं हुआ है तो वह उक्त भूमि को किसी दूसरे के नाम से बैनामा करने का हकदार नहीं है। उक्त प्रकरण की जानकारी मिली है। उक्त पट्टे की भूमि को अभी भूमिधर घोषित नहीं किया गया है, लेकिन पट्टेधारक ने उक्त भूमि को बैनामा कर दिया है। वहीं जिम्मेदारों की ओर से खारिज दाखिल भी कर दिया गया है, जो अपराध के श्रेणी में आता है।
अरविंद मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता
एक साल पहले फर्जी बैनामा मामले में उप निबंधक सहित 11 पर केस हुआ था दर्ज
निचलौल तहसील के उप निबंधक कार्यालय में फर्जी तरीके से बैनामा कराने के मामले में 10 सितंबर 2022 को उपनिबंधक सहित 11 पर केस दर्ज हुआ था। पीड़ित अखिलेश द्विवेदी निवासी अलीनगर कोतवाली गोरखपुर ने तहरीर में बताया था कि पिता भालेन्दू देव एवं चाचा आनंद देव और शशि देव के नाम से निचलौल शहर स्थित अराजी संख्या 2188 क्षेत्रफल में 0.4740 हेक्टेयर भूमि है। पिता भालेन्दू देव की सात सितंबर वर्ष 2014 को मौत हो चुकी है। जबकि चाचा आनंद देव काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। जो बिस्तर छोड़ने में असमर्थ थे। इसी बीच जानकारी मिली कि मृत पिता भालेन्दू देव और चाचा आनंद देव व शशि देव के स्थान पर कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से फोटो लगाकर उक्त भूमि को रजिस्ट्री कार्यालय में गत 19 जुलाई बैनामा करा लिया है। इस प्रकरण केस दर्ज हुआ था।