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नेपाल में छह स्टील फैक्ट्री बंद, सरकार के खिलाफ गरजे कर्मी
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नेपाल में छह स्टील फैक्ट्री बंद, सरकार के खिलाफ गरजे कर्मी
महराजगंज। नेपाल सरकार की नीतियों के कारण भंसार शुल्क बढ़ने के वजह से रूपनदेही जिले के छह इस्पात उद्योग बंद हो गए हैं। लागत बढ़ने के कारण उद्योगपतियों को अर्थिक समस्या हो रही है। शनिवार को उद्योगों में कार्यरत कर्मियों ने रूपनदेही में प्रदर्शन कर भंसार शुल्क में रियायत देने की मांग की। छह इस्पात उद्योग बंद होने से 2,500 से अधिक भारतीय एवं नेपाली श्रमिकों बेरोजगार हो गए हैं।
इस्पात कच्चे माल एमएस ब्लेड और स्पंज आयरन के आयात पर भंसार शुल्क और उत्पाद शुल्क में भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण लागत में वृद्धि होने से इन उद्योगों को बंद कर दिया गया है। भारत से एमएस बिलेट मंगा कर लोहे की छड़ें बनाने वाली रुपनदेही की पंचकन्या स्टील, एवरेस्ट रोलिंग इंडस्ट्रीज, एसआर स्टील, रत्ना आयरन, गोयनका स्टील और फेरो स्टील पूरी तरह से बंद हो गई हैं। नतीजतन, उद्योग का 12 अरब रुपये का निवेश डूबने की कगार पर है। एसआर स्टील एक जुलाई से और पांच अन्य उद्योग एक अक्तूबर से बंद हैं। रूपनदेही उद्योग संघ के महासचिव हरि खन्ना ने बताय कि यह दुखद है की सरकार की पक्षपातपूर्ण और गलत नीतियों के कारण उद्योग बंद हो गए हैं। सरकार को इस दिशा में उद्योपतियों का साथ देना चाहिए।
उत्पाद शुल्क बढ़ गया
नेपाल सरकार ने नेबिलेट आयात पर 4.75 प्रतिशत सीमा शुल्क दर को बनाए रखा है। उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन से 3,500 रुपये कर दिया है। इसी तरह एमएस वायर के पिछले 5 प्रतिशत सीमा शुल्क को बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। उत्पाद शुल्क को बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन कर दिया गया है।
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क्या कहते हैं उद्योगपति
एसआर स्टील के मालिक सूरज उप्रेती ने बताया कि बैंक का अधिक ब्याज, मांग में कमी के साथ-साथ उत्पाद शुल्क पर सरकार के भेदभावपूर्ण फैसले के कारण उद्योग को बंद करना पड़ा। पंचकन्या स्टील के महाप्रबंधक देवेंद्र साहू ने कहा कि सरकार ने बिलेट्स से उत्पादित गुणवत्ता वाले स्टील को प्रतिस्पर्धा में असमर्थ बनाया है। स्पंज आयरन और बिलेट से छड़ बनाने के लिए कच्चे माल की लागत का अंतर सीमा शुल्क के कारण 12 से 13 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा है।
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महराजगंज। नेपाल सरकार की नीतियों के कारण भंसार शुल्क बढ़ने के वजह से रूपनदेही जिले के छह इस्पात उद्योग बंद हो गए हैं। लागत बढ़ने के कारण उद्योगपतियों को अर्थिक समस्या हो रही है। शनिवार को उद्योगों में कार्यरत कर्मियों ने रूपनदेही में प्रदर्शन कर भंसार शुल्क में रियायत देने की मांग की। छह इस्पात उद्योग बंद होने से 2,500 से अधिक भारतीय एवं नेपाली श्रमिकों बेरोजगार हो गए हैं।
इस्पात कच्चे माल एमएस ब्लेड और स्पंज आयरन के आयात पर भंसार शुल्क और उत्पाद शुल्क में भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण लागत में वृद्धि होने से इन उद्योगों को बंद कर दिया गया है। भारत से एमएस बिलेट मंगा कर लोहे की छड़ें बनाने वाली रुपनदेही की पंचकन्या स्टील, एवरेस्ट रोलिंग इंडस्ट्रीज, एसआर स्टील, रत्ना आयरन, गोयनका स्टील और फेरो स्टील पूरी तरह से बंद हो गई हैं। नतीजतन, उद्योग का 12 अरब रुपये का निवेश डूबने की कगार पर है। एसआर स्टील एक जुलाई से और पांच अन्य उद्योग एक अक्तूबर से बंद हैं। रूपनदेही उद्योग संघ के महासचिव हरि खन्ना ने बताय कि यह दुखद है की सरकार की पक्षपातपूर्ण और गलत नीतियों के कारण उद्योग बंद हो गए हैं। सरकार को इस दिशा में उद्योपतियों का साथ देना चाहिए।
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उत्पाद शुल्क बढ़ गया
नेपाल सरकार ने नेबिलेट आयात पर 4.75 प्रतिशत सीमा शुल्क दर को बनाए रखा है। उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन से 3,500 रुपये कर दिया है। इसी तरह एमएस वायर के पिछले 5 प्रतिशत सीमा शुल्क को बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। उत्पाद शुल्क को बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन कर दिया गया है।
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क्या कहते हैं उद्योगपति
एसआर स्टील के मालिक सूरज उप्रेती ने बताया कि बैंक का अधिक ब्याज, मांग में कमी के साथ-साथ उत्पाद शुल्क पर सरकार के भेदभावपूर्ण फैसले के कारण उद्योग को बंद करना पड़ा। पंचकन्या स्टील के महाप्रबंधक देवेंद्र साहू ने कहा कि सरकार ने बिलेट्स से उत्पादित गुणवत्ता वाले स्टील को प्रतिस्पर्धा में असमर्थ बनाया है। स्पंज आयरन और बिलेट से छड़ बनाने के लिए कच्चे माल की लागत का अंतर सीमा शुल्क के कारण 12 से 13 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा है।