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परपंरागत खेती छोड़ अमरूद की खेती कर रहे शैलेष

Mon, 24 Jan 2022 11:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 11:42 PM IST
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Shailesh is cultivating guava leaving traditional farming
सेमरहनी में अमरूद की खेती की देखभाल करते किसान शैलेष चौधरी। - फोटो : MAHARAJGANJ
परपंरागत खेती छोड़ अमरूद की खेती कर रहे शैलेष
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पूर्वांचल के लिए वरदान साबित होगा ताइवान व वीएनआर अमरूद
फरेंदा(महराजगंज)। जिले में अमरूद की खेती किसानों के लिए नजीर साबित हो रही है। किसानो का रूझान परंपरागत खेती से हटकर अब बागवानी की ओर हो रहा है। कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने वाली फसल अमरूद किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।
फरेंदा विकास खंड के सेमरहनी निवासी शैलेष चौधरी करीब एक एकड़ में वीएनआर व ताइवान किंग प्रजाति के अमरूद की खेती दूसरी बार कर रहे हैं। बार बार पूंजी लगाने के झंझट से छुटकारा और अच्छा मुनाफा अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत साबित हो रहा है। किसान शैलेष चौधरी ने बताया कि बनारस के पास एक नर्सरी से वीएनआर व ताइवान किंग प्रजाति का पौधा मिला। ये पौधे करीब सौ रुपये प्रति पौधे के रेट पर मिलने के बाद पांच सौ पौधे अपने खेत में रोपा। इस पर 80 हजार से एक लाख रुपये की लागत आई। पहले साल तो करीब एक लाख का ही मुनाफा हुआ था। पैदावार व मुनाफा को देखते हुए खेती का रकबा बढ़ाते हुए अधिक पौधे लगाए गए। जो इस साल बेहतर होने की उम्मीद हैं। खेतो में पूरे फल के तैयारी को देखते हुए इस साल करीब पांच लाख का मुनाफा हो सकता है। एक साल में करीब तीन बार अमरूद तोड़े जाते हैं। फल तैयार होने के बाद गोरखपुर के मंडी सहित स्थानीय मंडी में ग्राहक काफी अच्छी संख्या में हैं।
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हरियाणा में देखने के बाद अमरूद की खेती में मन लगा
शैलेष ने बताया कि दिल्ली में अमरूद खाने के बाद अमरूद की खेती करने का मन आया तो इंटरनेट पर सर्च करने के बाद वीएनआर व ताइवान अमरूद की खेती करने की मन में ठान ली। एक एकड़ खेत का तैयार कर उसमें अमरूद की खेती शुरू की। अमरूद के पौधे करीब आठ फीट की दूरी पर लगाए गए हैं। बीच में करीब पांच मीटर की दूरी है। जिसमें लहसुन, प्याज व अन्य सब्जी की खेती कर अतिरिक्त लाभ मिल जाता है। साथ ही पौधों से करीब 15 वर्ष तक फल लिए जा सकते हैं। एक पौधे से करीब 40 किलो अमरूद तैयार होता है।
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ताइवान व वीएनआर किस्म के अमरूद फायदेमंद
जिला कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि ताइवान व वीएनआर किस्म के अमरूद आकार में बड़े व चमकदार होते हैं। जिसमें पोषण की गुणवत्ता अधिक होती है। मीठा स्वाद होने के कारण लोगों को खूब भाता है। विभाग द्वारा इसमें अनुदान की भी व्यवस्था है। कोई भी किसान अमरूद की खेती कर सकता है।
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