{"_id":"62dbc9bda8c1185db63d92f6","slug":"sawan-2022-special-story-of-jharkhandi-temple-in-maharajganj","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Sawan 2022: यहां शिवलिंग को लाने में टूट गई थी सात बैलगाड़ियां, गड्ढा खोदते ही निकलने लगे थे बिच्छू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sawan 2022: यहां शिवलिंग को लाने में टूट गई थी सात बैलगाड़ियां, गड्ढा खोदते ही निकलने लगे थे बिच्छू
Sun, 24 Jul 2022 06:30 AM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 24 Jul 2022 06:30 AM IST
सार
महराजगंज के नौतनवां तहसील क्षेत्र के महरी गांव का शिव मंदिर काफी पुराना है, जिसे झारखंडी के नाम से जाना जाता है। यहां आसपास के क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल के भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। शिव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है।
विज्ञापन
झारखंडी मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के महराजगंज के नौतनवां तहसील क्षेत्र के महरी गांव का शिव मंदिर काफी पुराना है, जिसे झारखंडी के नाम से जाना जाता है। यहां आसपास के क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल के भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। शिव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है।
विज्ञापन
गांव के बुर्जुग राम समुझ पासवान और घुरहू राम यादव का कहना है कि मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराना है। यहां काफी समय तक शिवलिंग था, बाद में मंदिर बना। जब देश में अंग्रेजों का हुकूमत था, उस समय महरी गांव के जमींदार नथुनी सिंह हुआ करते थे।
विज्ञापन
एक दिन नथुनी सिंह रात को सोए हुए थे। उनको स्वप्न में दिखा कि भोले शंकर आए और कहा कि हम जंगल में हैं। आओ हमको अपने गांव ले चलो। जब नींद खुली तो वहां कोई नहीं था। सुबह हुआ तो जमींदार नथुनी ने सभी गांववालों को एकत्रित किया और रात देखे स्वप्न की बात सबको बताया।
विज्ञापन
डर गए थे ग्रामीण
जमींदार की बात सुनकर गांव वाले बहुत खुश हुए। सभी लोग जंगल की तरफ प्रस्थान कर स्वप्न में भगवान शंकर द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर ग्रामीण हैरान रह गए, उन्होंने देखा कि झाड़ियों में एक शिवलिंग पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों ने जमीन से खोदकर शिवलिंग को बाहर निकाला और उसे बैलगाड़ी पर लादकर गांव की तरफ बढ़ने लगे। जंगल से ज्यों आगे बढ़े तो बैलगाड़ी टूट गई, उसके बाद दूसरी बैलगाड़ी पर शिवलिंग को रखा, इसी प्रकार एक-एक कर सात बैलगाड़ी टूट गई। उसके बाद उसी स्थान पर शिवलिंग जमीन मे धंसने लगा और रात हो गई।
रात होने से सभी लोग अपने घर चल गए। दूसरे दिन सुबह हुआ तो लोग इकट्ठा होकर शिवलिंग निकालने लगे तो उसी शिवलिंग के पास जमीन के अंदर से मधुमक्खी, हड्डा और बिच्छू निकलने लगे। ऐसे में सभी लोग डर कर भाग गए।
दूसरे दिन रात में नथुनी सिंह ने स्वप्न देखा कि भगवान शंकर आए और बोले कि हम जहां हैं वहीं रहने दो। मंदिर के पुजारी सत्य नारायण दास ने बताया कि जो भी सच्चे मन से भोलेनाथ के दरबार मे आकर मन्नत मांगता है उसकी हर मुराद पूरी होती है।
ग्रामीणों ने जमीन से खोदकर शिवलिंग को बाहर निकाला और उसे बैलगाड़ी पर लादकर गांव की तरफ बढ़ने लगे। जंगल से ज्यों आगे बढ़े तो बैलगाड़ी टूट गई, उसके बाद दूसरी बैलगाड़ी पर शिवलिंग को रखा, इसी प्रकार एक-एक कर सात बैलगाड़ी टूट गई। उसके बाद उसी स्थान पर शिवलिंग जमीन मे धंसने लगा और रात हो गई।
रात होने से सभी लोग अपने घर चल गए। दूसरे दिन सुबह हुआ तो लोग इकट्ठा होकर शिवलिंग निकालने लगे तो उसी शिवलिंग के पास जमीन के अंदर से मधुमक्खी, हड्डा और बिच्छू निकलने लगे। ऐसे में सभी लोग डर कर भाग गए।
दूसरे दिन रात में नथुनी सिंह ने स्वप्न देखा कि भगवान शंकर आए और बोले कि हम जहां हैं वहीं रहने दो। मंदिर के पुजारी सत्य नारायण दास ने बताया कि जो भी सच्चे मन से भोलेनाथ के दरबार मे आकर मन्नत मांगता है उसकी हर मुराद पूरी होती है।