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Maharajganj News: सरदार पटेल भारत में ऋषि और कृषि परंपरा के प्रतीक थे

Mon, 25 Aug 2025 01:11 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 25 Aug 2025 01:11 AM IST
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Sardar Patel was a sage and symbol of agricultural tradition in India
जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम को संबो​धित करते  प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी।
-सरदार पटेल की ऋषि-कृषि परंपरा और राष्ट्रीय एकता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। इस दौरान सरदार वल्लभ भाई पटेल की ऋषि और कृषि परंपरा, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और लैंगिक समानता में उनकी भूमिका विषय पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक ने कहा कि सरदार पटेल भारत में ऋषि और कृषि परंपरा के प्रतीक थे। उन्होंने सनातन धर्म का ध्वज फहराया और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए अविस्मरणीय योगदान दिया। उनकी दृढ़ता और सामाजिक समरसता की सोच ने उन्हें ''लौह पुरुष'' बनाया।
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प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता के लिए सभी की समान भागीदारी आवश्यक है। मुख्य वक्ता प्रो. बीएन सिंह, पूर्व अध्यक्ष, भूगोल विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने सरदार पटेल को सच्चा राष्ट्र नायक बताते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका, किसानों को संगठित किया और चंपारण, खेड़ा, बरदोली जैसे आंदोलनों का नेतृत्व किया।
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भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी भूमिका और 562 रियासतों को एकजुट कर अखंड भारत के निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने सामाजिक समरसता और एकता का संदेश दिया। अध्यक्षीय संबोधन में कॉलेज के प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट ने कहा कि सरदार पटेल ने सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं व बुजुर्गों के सम्मान पर बल दिया। उन्होंने सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संगोष्ठी के पहले दिन 28 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। दूसरे दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित हुए। प्रथम सत्र में प्रो. संतोष कुमार सिंह, डॉ. छट्ठू यादव और डॉ. अपर्णा राठी के नेतृत्व में 13 शोध पत्र (7 ऑनलाइन, 6 ऑफलाइन) प्रस्तुत किए गए। द्वितीय सत्र का संचालन डॉ. प्राची कुशवाहा ने किया, जिसमें 15 शोध पत्र (6 ऑनलाइन, 9 ऑफलाइन) प्रस्तुत हुए। इस सत्र में डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. मिथलेश चौधरी, डॉ. ज्योत्सना पांडे और डॉ. अनिल कुमार सिंह संदर्भ व्यक्ति रहे।
समापन सत्र का शुभारंभ डॉ. मृत्युंजय तिवारी के मंगलाचरण से हुआ। प्राचार्य डॉ. अजय कुमार मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया और उन्हें अंग वस्त्र व प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. धर्मेंद्र कुमार सोनकर ने शोध पत्रों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। सत्र का संचालन डॉ. राणा प्रताप तिवारी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनय खरवार ने किया।

इस अवसर पर डॉ. विजय नाथ मिश्रा, डॉ. शशिकांत राव, डॉ. महेश मणि त्रिपाठी, डॉ. घनश्याम शर्मा, डॉ. नंदिता मिश्रा, डॉ. सिद्धार्थ नाथ शुक्ला, डॉ. सुनील तिवारी, डॉ. अशोक वर्मा, डॉ. राजू शर्मा, डॉ. शांति शरण मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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