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Maharajganj News: नारायणी का बढ़ने लगा जलस्तर तो शुरू कराई बंधे की मरम्मत
Thu, 15 Jun 2023 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 15 Jun 2023 01:21 AM IST
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नारायणी नदी में गिरे पिछले वर्ष के ब्लाक।संवाद
महराजगंज। नेपाल की पहाड़ियों से आकर महराजगंज होते हुए मैदानी इलाकों में कहर बरपाने वाली नारायणी नदी में पानी बढ़ने लगा है। ऐसे में बंधों की मरम्मत का कार्य तेज होने लगा है। नदी पर बने बांधों की मजबूती पर आसपास के लोगों ने सवाल कर खड़ा कर दिया है। आरोप है कि समय से काम नहीं कराया जाता है। मानसून नजदीक आते देखकर काम कराने की होड़ लग जाती है। नदी में पानी स्तर बढ़ते ही पूरी खामियों उसी में बह जाती है। काम कितना अच्छा हुआ, इसके बारे में कोई जान भी नहीं पाता है। अब तो लोग बंधे की मजबूती को लेकर संशय में हैं। ए व बी गैप बांध बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी सुरक्षा पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं।
नेपाल राष्ट्र के पहाड़ों से निकली नारायणी नदी हर वर्ष नेपाल और भारत के मैदानी इलाकों में बसें गांवों में तबाही मचाती है। नारायणी नदी के पानी से जहां सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होकर नष्ट हो जाती है। दरअसल, बाढ़ से बचाव के लिए हर वर्ष सिंचाई खंड द्वितीय के जिम्मेदारों की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर बंधों की मरम्मत कराई जाती है। इसी क्रम में इस वर्ष भी बी-गैप बांध के ठोकर संख्या 6 से 14 तथा नेपाल बांध के 1, 2 और 5 पर करोड़ों रुपये खर्च कर मरम्मत कराया जा रहा है। गुणवत्ता विहिन कार्य देखकर लोग चिंतित है कि ज्यादा दबाव बढ़ा तो बंधा टूटने पर तबाही मच जाएगी।
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नेपाल बांध की लंबाई 12 किमी है
नारायणी नदी पर ए-गैप बांध की लंबाई 2.5 किमी, बी-गैप बांध की लम्बाई 7.23 किमी, नेपाल बांध की लंबाई 12 किमी एवं लिंक बांध की लंबाई 2.5 किमी का निर्माण भारत राष्ट्र के उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का सिंचाई खंड द्वितीय महराजगंज द्वारा कराया गया है। इतना ही नहीं बाढ़ एवं कटाव के बचाव के लिए प्रति वर्ष केंद्रीय जल आयोग की उच्च स्तरीय समिति बाढ़ के बाद गहन निरीक्षण कर कार्यों के लिए अपनी संस्तुति करती है। इसके आधार पर सिंचाई खंड द्वितीय महराजगंज की ओर से परियोजना तैयार कर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक में क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की जाती है।
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फोटो
कभी भी स्थायी रूप से नहीं हो पाता कार्य
परागपुर गांव के नवीन मिश्रा ने कहा कि बी-गैंप बांध पर बने ठोकर एवं उसके किनारे को मजबूत करने के लिए प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन कार्य कभी भी स्थायी रूप से नहीं हो पाता है। पिछले वर्ष भी बांध के कई ठोकरों पर जो ब्लॉक डाले गए थे। वह बिना बाढ़ के ही टूटना शुरू हो गए। जिस पर विभागीय लीपापोती कर दिया गया। शितलापुर खेसरहा पन्ने लाल ने कहा कि इस वर्ष बी-गैंप बांध के ठोकर संख्या 6 से 14 पर कटान रोकने के लिए ब्लऍक डाले जा रहें हैं। जहां बंधे पर मुंशी की देखभाल में मरम्मत कार्य कराया जाता है। जबकि मौके पर ठेकेदार या सिचाई विभाग का कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं रहता है।
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बाढ़ से बचाव के लिए बांधों को सुरक्षित करने ले लिए ब्लाक का निर्माण कार्य बेहतर तरीके से कराया जा रहा है। अगर कार्य मे मनमानी की गई तो जांच होगी। बरसात से पूर्व बांधों की मरम्मत का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
-राजीव कपिल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड द्वितीय
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नदी में जलस्तर बढ़ने पर तेजी से होता है कार्य
नदी से सटे गांव सेमरी, कुड़िया, सूर्यपुरा गांव के लोगों ने कहा कि नेपाल में पहाडों पर बारिश होती है तो जून के महीने में नारायणी का जलस्तर बढ़ने लगता है। तब आनन-फानन में तेजी से कार्य शुरू किया जाता है। फिर नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। विभागीय जिम्मेदार लीपापोती कर काम को पूर्ण दिखा देते हैं। अभी पहाड़ों पर बारिश कम हो रही है, इस वजह से जल स्तर बढ़ा नहीं है, लेकिन काम की गति यही रही तो आने वाले दिनों में जल स्तर बढ़ जाएगा। इसके बाद जैसे तैसे काम को पूरा दिखाकर रकम हजम कर लिया जाएगा।
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जलशक्ति एवं जल संसाधन मंत्री ने जताई थी नाराजगी
जल शक्ति एवं जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह 10 जून की सुबह बिहार के रास्ते वाल्मीकि नगर बैराज होते हुए नेपाल राष्ट्र में नारायणी नदी के बी गैप बांध पर पहुंचे थे। जहां पर मंत्री ने बांध पर चल रहे मानक विहीन कार्यों को देख जिम्मेदारों के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कार्य में सुधार लाने की नसीहत दी थी। इतना ही नहीं नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य करने को कहा था।
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बंधे पर काम में मानक का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। विभाग के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बंधे पर काम भी समय से पहले नहीं कराया जाता है।
-शशि थापा, सूर्यपूरा नेपाल
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काम कराने वाले ठेकेदार को नदी में पानी बढ़ने का इंतजार रहता है। यही कारण है कि काम सुस्त गति से हो रहा है। आधे अधूरे काम कर रकम का बंदरबाट कर लिया जाता है।
-श्रीनिवास प्रसाद, सेमरी
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नेपाल राष्ट्र के पहाड़ों से निकली नारायणी नदी हर वर्ष नेपाल और भारत के मैदानी इलाकों में बसें गांवों में तबाही मचाती है। नारायणी नदी के पानी से जहां सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होकर नष्ट हो जाती है। दरअसल, बाढ़ से बचाव के लिए हर वर्ष सिंचाई खंड द्वितीय के जिम्मेदारों की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर बंधों की मरम्मत कराई जाती है। इसी क्रम में इस वर्ष भी बी-गैप बांध के ठोकर संख्या 6 से 14 तथा नेपाल बांध के 1, 2 और 5 पर करोड़ों रुपये खर्च कर मरम्मत कराया जा रहा है। गुणवत्ता विहिन कार्य देखकर लोग चिंतित है कि ज्यादा दबाव बढ़ा तो बंधा टूटने पर तबाही मच जाएगी।
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नेपाल बांध की लंबाई 12 किमी है
नारायणी नदी पर ए-गैप बांध की लंबाई 2.5 किमी, बी-गैप बांध की लम्बाई 7.23 किमी, नेपाल बांध की लंबाई 12 किमी एवं लिंक बांध की लंबाई 2.5 किमी का निर्माण भारत राष्ट्र के उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का सिंचाई खंड द्वितीय महराजगंज द्वारा कराया गया है। इतना ही नहीं बाढ़ एवं कटाव के बचाव के लिए प्रति वर्ष केंद्रीय जल आयोग की उच्च स्तरीय समिति बाढ़ के बाद गहन निरीक्षण कर कार्यों के लिए अपनी संस्तुति करती है। इसके आधार पर सिंचाई खंड द्वितीय महराजगंज की ओर से परियोजना तैयार कर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक में क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की जाती है।
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कभी भी स्थायी रूप से नहीं हो पाता कार्य
परागपुर गांव के नवीन मिश्रा ने कहा कि बी-गैंप बांध पर बने ठोकर एवं उसके किनारे को मजबूत करने के लिए प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन कार्य कभी भी स्थायी रूप से नहीं हो पाता है। पिछले वर्ष भी बांध के कई ठोकरों पर जो ब्लॉक डाले गए थे। वह बिना बाढ़ के ही टूटना शुरू हो गए। जिस पर विभागीय लीपापोती कर दिया गया। शितलापुर खेसरहा पन्ने लाल ने कहा कि इस वर्ष बी-गैंप बांध के ठोकर संख्या 6 से 14 पर कटान रोकने के लिए ब्लऍक डाले जा रहें हैं। जहां बंधे पर मुंशी की देखभाल में मरम्मत कार्य कराया जाता है। जबकि मौके पर ठेकेदार या सिचाई विभाग का कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं रहता है।
बाढ़ से बचाव के लिए बांधों को सुरक्षित करने ले लिए ब्लाक का निर्माण कार्य बेहतर तरीके से कराया जा रहा है। अगर कार्य मे मनमानी की गई तो जांच होगी। बरसात से पूर्व बांधों की मरम्मत का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
-राजीव कपिल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड द्वितीय
नदी में जलस्तर बढ़ने पर तेजी से होता है कार्य
नदी से सटे गांव सेमरी, कुड़िया, सूर्यपुरा गांव के लोगों ने कहा कि नेपाल में पहाडों पर बारिश होती है तो जून के महीने में नारायणी का जलस्तर बढ़ने लगता है। तब आनन-फानन में तेजी से कार्य शुरू किया जाता है। फिर नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। विभागीय जिम्मेदार लीपापोती कर काम को पूर्ण दिखा देते हैं। अभी पहाड़ों पर बारिश कम हो रही है, इस वजह से जल स्तर बढ़ा नहीं है, लेकिन काम की गति यही रही तो आने वाले दिनों में जल स्तर बढ़ जाएगा। इसके बाद जैसे तैसे काम को पूरा दिखाकर रकम हजम कर लिया जाएगा।
जलशक्ति एवं जल संसाधन मंत्री ने जताई थी नाराजगी
जल शक्ति एवं जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह 10 जून की सुबह बिहार के रास्ते वाल्मीकि नगर बैराज होते हुए नेपाल राष्ट्र में नारायणी नदी के बी गैप बांध पर पहुंचे थे। जहां पर मंत्री ने बांध पर चल रहे मानक विहीन कार्यों को देख जिम्मेदारों के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कार्य में सुधार लाने की नसीहत दी थी। इतना ही नहीं नदी का जलस्तर बढ़ने से पहले गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य करने को कहा था।
बंधे पर काम में मानक का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। विभाग के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बंधे पर काम भी समय से पहले नहीं कराया जाता है।
-शशि थापा, सूर्यपूरा नेपाल
काम कराने वाले ठेकेदार को नदी में पानी बढ़ने का इंतजार रहता है। यही कारण है कि काम सुस्त गति से हो रहा है। आधे अधूरे काम कर रकम का बंदरबाट कर लिया जाता है।
-श्रीनिवास प्रसाद, सेमरी