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Maharajganj News: 2500 वर्ष पूर्व के उत्खनन में मिल रहे हैं रिंग वेल
Sun, 25 Feb 2024 08:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 25 Feb 2024 08:06 PM IST
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लक्ष्मीपुर। बनर्सिहा में 50 दिनों से चल रहे उत्खनन से जमींदोज इतिहास की परत-दर-परत सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों उत्खनन व पुरातत्व विभाग के निदेशक डाॅ.रेनू द्विवेदी के निरीक्षण के बाद उत्खनन में तेजी आ गई है।
अबतक के उत्खनन में खंडित मूर्ति, पात्र, पशु आकार, ईंट, कलश, ताम्र सिक्के, ताम्र वर्तन, रिंग वेल सहित पुरावशेष मिल रहे हैं। अबतक हर टंच में कहीं 15 मीटर तो कहीं पांच मीटर गहराई तक उत्खनन हुआ है। दो दिनों के उत्खनन में मिले रिंग वेल से इतिहासकारों की मानें तो ऐसे पात्र लगभग 2500 वर्ष पूर्व शुंगकाल में होते हैं। भारत के प्राचीन नगरों के पतन में दिए गए वर्णन के अनुसार प्राचीन काल में विकसित नगरों में सोख्ता के रूप में इस्तेमाल के लिए रिंग वेल का निर्माण करवाया जाता था। उस पर उल्टा घड़ा लगा होता था, जिसपर ढक्कन लगाया जाता था। हालांकि उत्खनन में लगे अधिकारी कुछ भी बताने में असमर्थता व्यक्त कर रहे हैं।
उत्खनन अधिकारी डाॅ. कृष्ण मोहन दूबे ने बताया कि उत्खनन कार्य प्रगति पर है। आए दिन पात्र मिल रहे हैं, जिसे विशेषज्ञ टीम टैगिंग कर रही है। जिसे लैब द्वारा जांच कराने के उपरांत ही ठोस नतीजों पर पहुंचा जा सकता है।
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अबतक के उत्खनन में खंडित मूर्ति, पात्र, पशु आकार, ईंट, कलश, ताम्र सिक्के, ताम्र वर्तन, रिंग वेल सहित पुरावशेष मिल रहे हैं। अबतक हर टंच में कहीं 15 मीटर तो कहीं पांच मीटर गहराई तक उत्खनन हुआ है। दो दिनों के उत्खनन में मिले रिंग वेल से इतिहासकारों की मानें तो ऐसे पात्र लगभग 2500 वर्ष पूर्व शुंगकाल में होते हैं। भारत के प्राचीन नगरों के पतन में दिए गए वर्णन के अनुसार प्राचीन काल में विकसित नगरों में सोख्ता के रूप में इस्तेमाल के लिए रिंग वेल का निर्माण करवाया जाता था। उस पर उल्टा घड़ा लगा होता था, जिसपर ढक्कन लगाया जाता था। हालांकि उत्खनन में लगे अधिकारी कुछ भी बताने में असमर्थता व्यक्त कर रहे हैं।
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उत्खनन अधिकारी डाॅ. कृष्ण मोहन दूबे ने बताया कि उत्खनन कार्य प्रगति पर है। आए दिन पात्र मिल रहे हैं, जिसे विशेषज्ञ टीम टैगिंग कर रही है। जिसे लैब द्वारा जांच कराने के उपरांत ही ठोस नतीजों पर पहुंचा जा सकता है।
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