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Maharajganj News: पराली जलाने से रोकने को जिम्मेदारी तय, 30 हजार तक जुर्माना
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महराजगंज। जिले में धान की कटाई का कार्य जारी है। कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से पराली प्रबंधन की निगरानी शुरू कर दी गई है। इसी के तहत जिला प्रशासन ने चार स्तरों पर टीमें गठित कर दी हैं।
जानकारी के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिले की चार तहसीलों, बारह विकासखंडों और सभी ग्राम पंचायतों में टीमें गठित कर दी गई हैं। इन टीमों में कृषि, राजस्व, पंचायतीराज और पशुपालन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। सभी स्तरों पर अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में पराली जलाने की निगरानी करें और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें। पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं न केवल पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनती हैं बल्कि मृदा की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा-24 एवं 26 के तहत दो एकड़ से कम खेत में पराली जलाने पर 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 30,000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
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इन टीमों में कृषि, राजस्व, पंचायतीराज और पशुपालन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जिला प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे खेतों में पराली जलाने के बजाय उसे गोशालाओं में दान करें। पशुपालन विभाग और डीपीआरओ कार्यालय की ओर से ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को प्रेरित करें और पराली को गोशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था कराएं। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि पशुओं के चारे की व्यवस्था भी हो सकेगी।
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जानकारी के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिले की चार तहसीलों, बारह विकासखंडों और सभी ग्राम पंचायतों में टीमें गठित कर दी गई हैं। इन टीमों में कृषि, राजस्व, पंचायतीराज और पशुपालन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। सभी स्तरों पर अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में पराली जलाने की निगरानी करें और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें। पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं न केवल पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनती हैं बल्कि मृदा की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा-24 एवं 26 के तहत दो एकड़ से कम खेत में पराली जलाने पर 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 30,000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
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इन टीमों में कृषि, राजस्व, पंचायतीराज और पशुपालन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जिला प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे खेतों में पराली जलाने के बजाय उसे गोशालाओं में दान करें। पशुपालन विभाग और डीपीआरओ कार्यालय की ओर से ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों को प्रेरित करें और पराली को गोशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था कराएं। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि पशुओं के चारे की व्यवस्था भी हो सकेगी।