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Maharajganj News: सोहगीबरवा में 800 बाढ़ पीड़ितों में बांटी गई राहत सामग्री
Wed, 02 Oct 2024 04:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 02 Oct 2024 04:29 AM IST
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निचलौल। ब्लॉक क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में बसे सोहगीबरवा, भोतहा और शिकारपुर गांव में बीते दिनों हुई मूसलधार बारिश के दौरान बाढ़ का पानी घुस गया था। प्रभावितों को दो वक्त की रोटी जुटाने में दुश्वारियां झेलनी पड़ रही थीं। मंगलवार को सोहगीबरवा में 800 बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरित की गई। पशुपालकों में भूसा का भी वितरण किया गया।
सोहगीबरवा में बाढ़ आने की सूचना के बाद पांच दिनों से पीड़ितों की मदद में जुटे राजस्व विभाग के कानूनगो मनीष पटेल ने बताया की बीते दिनों नेपाल के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के चलते नारायणी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चली गई थी। गंडक और घने जंगलों से घिरे सोहगीबरवा, भोतहा, शिकारपुर सहित इनके करीब आठ टोले बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए थे।
बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए राजस्व विभाग की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसी दौरान बाढ़ प्रभावित सोहगीबरवा और शिकारपुर गांव के 800 बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामाग्री दी गई। इसके साथ ही 15 पशुपालकों में 90 क्विंटल भूसा का भी वितरण किया गया है। इस दौरान अंशुमान महतो, राकेश गुप्ता, राजू, अंबरिश यादव आदि मौजूद रहे।
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टापू से बाढ़ का उतरा पानी, दुश्वारियां बरकरार
निचलौल। नेपाल के पहाड़ों पर बारिश थमने के साथ ही नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर भी कम हो चुका है। अब नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। सोहगीबरवा गांव से भी बाढ़ का पानी नीचे उतर गया है। दलदल और कीचड़ से लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं।
सोहगीबरवा निवासी राकेश, ब्रह्मा यादव, अमन श्रीवास्तव, लोरिक सहानी आदि ने बताया की नेपाल के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बीते दिनों हुई मूसलधार बारिश के चलते गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर जा पहुंचा था। सोहगीबरवा के साथ ही भोतहा और शिकारपुर में गांव बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गया था। करीब 24 घंटे लोग मचान और छतों पर वक्त गुजारा।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह ने कहा की स्वास्थ्य टीम सोहगीबरवा गांव में मौजूद है। टीम की ओर से गांव में कैंप लगाकर क्लोरिन की गोली और ब्लीचिंग पाउडर सहित अन्य जरूरी दवाएं लोगों को दी जा रही हैं।
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सोहगीबरवा में बाढ़ आने की सूचना के बाद पांच दिनों से पीड़ितों की मदद में जुटे राजस्व विभाग के कानूनगो मनीष पटेल ने बताया की बीते दिनों नेपाल के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के चलते नारायणी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चली गई थी। गंडक और घने जंगलों से घिरे सोहगीबरवा, भोतहा, शिकारपुर सहित इनके करीब आठ टोले बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए थे।
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बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए राजस्व विभाग की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसी दौरान बाढ़ प्रभावित सोहगीबरवा और शिकारपुर गांव के 800 बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामाग्री दी गई। इसके साथ ही 15 पशुपालकों में 90 क्विंटल भूसा का भी वितरण किया गया है। इस दौरान अंशुमान महतो, राकेश गुप्ता, राजू, अंबरिश यादव आदि मौजूद रहे।
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टापू से बाढ़ का उतरा पानी, दुश्वारियां बरकरार
निचलौल। नेपाल के पहाड़ों पर बारिश थमने के साथ ही नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर भी कम हो चुका है। अब नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। सोहगीबरवा गांव से भी बाढ़ का पानी नीचे उतर गया है। दलदल और कीचड़ से लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं।
सोहगीबरवा निवासी राकेश, ब्रह्मा यादव, अमन श्रीवास्तव, लोरिक सहानी आदि ने बताया की नेपाल के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बीते दिनों हुई मूसलधार बारिश के चलते गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर जा पहुंचा था। सोहगीबरवा के साथ ही भोतहा और शिकारपुर में गांव बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गया था। करीब 24 घंटे लोग मचान और छतों पर वक्त गुजारा।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह ने कहा की स्वास्थ्य टीम सोहगीबरवा गांव में मौजूद है। टीम की ओर से गांव में कैंप लगाकर क्लोरिन की गोली और ब्लीचिंग पाउडर सहित अन्य जरूरी दवाएं लोगों को दी जा रही हैं।