फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Ramlila: Audience mesmerized by the performance of the artists

रामलीला : कलाकारों का मंचन देख दर्शक मंत्रमुग्ध

Mon, 20 Oct 2025 07:13 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 20 Oct 2025 07:13 PM IST
विज्ञापन
Ramlila: Audience mesmerized by the performance of the artists
रामलीला का मंचन करते कलाकार। 
अड्डा बाजार। चमैनियां उर्फ भेड़ही में हो रही रामलीला में रविवार की रात कलाकारों ने राम वनवास, राजा दशरथ की मृत्यु, केवट का भक्तिमय संवाद का मार्मिक मंचन किया। कलाकारों के अभिनय देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
विज्ञापन

राम के राजतिलक होने की घोषणा सुनकर नगरवासी खुशियां मनाने लगे। परंतु देवतागण यह सोचकर चिंतित हो गए कि राजा बनकर राम अयोध्या तक सिमट जाएंगे तो असुरों का विनाश नहीं हो पाएगा। देवताओं ने माता सरस्वती से प्रार्थना की कि ऐसा होने से रोकें। दासी मंथरा राम की जगह भरत को अयोध्या का राजा बनते देखना चाहती थी। माता सरस्वती की इच्छा से मंथरा बड़ी मशक्कत से महारानी कैकई को बरगलाने में सफल हो गई। मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकई कोप भवन चली गई। यह जानकर राजा दशरथ उन्हें मनाने पहुंचे। कैकेई ने त्रिया चरित्र का प्रयोग करके महाराज से पूर्व में दिए गए दो वचनों को पूर्ण करने को कहा। राजा दशरथ कहने पर उसने भरत का राजतिलक और राम को 14 वर्षों के लिए वनवास मांग लिया। कैकई की जिद और वचन की गरिमा के आगे राजा दशरथ टूट गए। नतीजतन राम, सीता और लक्ष्मण संन्यासी वेश में वन को निकले। इसके बाद पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने कैकेई का परित्याग करके अपने प्राण त्याग दिए।
विज्ञापन


वन में पहुंचकर अयोध्या के मंत्री आर्य सुमंत को समझा बुझाकर लौटाने के बाद मित्र निषादराज के साथ राम, लक्ष्मण, सीता, सुरसरि नदी के तट पर पहुंचे और उस घाट के नाविक से नदी पार कराने को कहा। नाविक ने यह कहते हुए राम को अपने नाव पर बैठने से मना कर दिया कि उनके पैर के स्पर्श से जब एक पत्थर अहिल्या नारी रूप में परिवर्तित हो गया। यदि उनके नाव के साथ ऐसा कुछ हुआ तो रोजी चली जाएगी। नाविक ने राम का पांव धुल करके चरणामृत पीने के बाद ही नाव में बैठाने की शर्त रखी। राम की रजामंदी पाकर नाविक केवट ने अपने जन्म-जन्मांतर की मंशा पूरी करके उन्हें सुरसरि नदी को पार कराया। इस दौरान केवट के भक्तिमय संवाद और अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed