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Maharajganj News: तकनीकी पेच में अटका पकड़ी-रोहुआघाट मार्ग का प्रस्ताव

Sat, 09 Aug 2025 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 09 Aug 2025 12:55 AM IST
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Proposal for Pakdi-Rohuaghat route stuck in technical issues
बदहाल पकड़ी से रोहुआ घाट मार्ग।
महराजगंज। मेडिकल कॉलेज से आगे बलिया पुल से रोहुआघाट गोरखपुर सीमा तक 22 किलोमीटर टू लेन सड़क बननी है। दो बार डीपीआर बनाकर शासन को फाइल भेजी गई, लेकिन हर बार कमी बताकर अस्वीकृत कर दिया गया।
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तकनीकी कारणों के पेच में उलझी फाइल को लेकर विभाग भी उलझन में है। तीसरी बार जिला प्रशासन की पहल पर फाइल भेजी गई है। जानकारी के अनुसार, पकड़ी चौराहे से शुरू होकर खुटहा बाजार, पनियरा कस्बे से होते हुए रोहुआघाट गोरखपुर सीमा तक जाने वाली यह सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क में बड़े-बड़े गड्ढों से राहगीरों को परेशानी होती है। खुटहा के रामप्रकाश ने बताया कि इस मार्ग पर यात्रा करना जोखिम भरा हो गया है। बाइक सवारों के लिए सड़क और खतरनाक साबित हो रही है, क्योंकि गड्ढों में गिरकर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
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महेंद्र चौधरी ने बताया कि पनियरा से पकड़ी चौराहे तक कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि लोग मजबूरी में छह किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करके जिला मुख्यालय जाते हैं। यह सड़क न केवल समय की बर्बादी करवाती है, बल्कि वाहनों को भी नुकसान पहुंचाती है।
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वहीं नीरज गौतम ने कहा कि पनियरा से रोहुआघाट तक का रास्ता इतना खराब है कि बेलटिकरा और रजौड़ा खुर्द जैसे इलाकों में सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। बारिश के मौसम में स्थिति और बदतर हो जाती है।
अशोक कुमार सैनी ने कहा कि यह मार्ग गोरखपुर और महराजगंज को जोड़ने का सबसे सीधा रास्ता है। यदि इसे टू-लेन में बदल दिया जाए तो न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी।
इस बार छह करोड़ घटाकर बना गया डीपीआर : लोक निर्माण विभाग ने इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए दो बार डीपीआर तैयार कर शासन को भेजा।
पहली बार 76 करोड़ रुपये का प्रस्ताव वित्त व्यय समिति (ईएफसी) तक पहुंचा और प्रारंभिक स्वीकृति भी मिली थी, लेकिन बाद में तकनीकी कमियों के चलते इसे अस्वीकृत कर दिया गया। दूसरी बार कुछ माह बाद शासन के निर्देश पर नया डीपीआर तैयार किया गया और स्वीकृति के लिए भेजा गया।

इस बार भी फाइल ईएफसी में विचाराधीन रही, लेकिन फिर से कुछ तकनीकी कारणों से इसे खारिज कर दिया गया। लोक निर्माण विभाग ने अब जिला प्रशासन की पहल पर तीसरी बार 70 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया है। इसे स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है।
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