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Maharajganj News: खारिज-दाखिल में खेल
Thu, 27 Apr 2023 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 27 Apr 2023 01:15 AM IST
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तहसील महराजगंज।संवाद
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रकम नहीं मिलते ही फंस जाता पेंच, काटना पड़ता तहसील का चक्कर
बिचौलिये वसूलते हैं रकम, बंधा है सबका हिस्सा, एक फाइल पर वसूलते हैं 1500 से 2500 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जमीन-मकान खरीदने के बाद भी लोग मालिकाना हक के लिए जिले की तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। तहसीलों में खारिज-दाखिल के तमाम विवादित व अविवादित मामले लंबित हैं। इन मामलों को सुलझाने में अधिकारियों को पसीना आ रहा है। पीड़ित प्रत्येक दिन तहसीलों का चक्कर लगाने को विवश हैं। उनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
लाखों की जमीन खरीदने के बाद आपको मालिकाना हक के लिए अलग से रकम खर्च करनी पड़ती है। सूत्र बताते हैं कि एक फाइल पर 1500 से लेकर 2500 रुपये की वसूली होती है। इसमें कई लोगों को हिस्सा बंधा रहता है।फाइल पास होते ही सबको रकम मिल जाती है।
खारिज-दाखिल कराने में अगर रकम देने कोई आनाकानी करता है तो उसे दर-दर की ठोकर खानी पड़ती है। कोई न कोई पेंच फंसाकर फाइल उलझा दिया जाता है। नियमों के दांव पेच में फंसे पीडि़तों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है।
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सदर तहसील में प्रत्येक दिन करीब 40 बैनामा होते हैं। रजिस्ट्री के दौरान ही दो प्रतियों में दस्तावेज जमा कराए जाते हैं। प्रक्रिया पूरी करने के बाद दूसरे दिन एक प्रति तहसील में भेज दी जाती है। 35 दिन बाद मूल दस्तावेज तहसील में प्रस्तुत करने होते हैं, ताकि खारिज-दाखिल हो सके। यदि विक्रेता ने कोई आपत्ति कर दी तो खारिज-दाखिल नहीं हो सकेगा। तहसील में 45 दिन के अंदर खारिज-दाखिल की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, लेकिन पेंच फंसने के कारण लोग भटक रहे हैं।
सदर तहसील में खारिज-दाखिल के 40 केस लंबित हैं। जमीन ज्योंहि बैनामा होती है, त्योंही खेल शुरू हो जाता है। इस कार्य के लिए वहीं से ठेका लेना शुरू कर दिया जाता है। ग्राहक की हैसियत के अनुसार रकम की वसूली की जाती है। अगर कोई रकम नहीं देता है तो उसकी फाइल में पेंच फंसना तय रहता है। इस वजह से लोग भी रकम देने में ही भलाई समझते हैं। कई मामले तो ऐसे हैं, जिनमें सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी आवेदक भटकने को विवश हैं।
जमीन बेचने वाले बिचौलियों का मामला रहता सेट
सूत्रों के अनुसार, जमीन से कारोबार से जुड़े बिचौलियों की तहसील में सेटिंग होती है। हर माह जमीन बैनामा होते ही बंधी-बंधाई रकम संबंधित व्यक्ति तक पहुंच जाती है। इसमें क्रमश: सभी को उसका हिस्सा मिल जाता है। जमीन बेचने के दौरान सभी कार्य कराने का ठेका भी ले लिया जाता है। जमीन खरीदने वाले व्यक्ति की पूरी सुविधा का ख्याल बिचौलिये इसलिए रखते हैं कि उनके ग्राहकों की संख्या में इजाफा हो।
क्या होता है खारिज-दाखिल
नियम के अनुसार खारिज-दाखिल के बाद ही कोई खरीदार कानूनी रूप से उस भूमि का मालिक बनता है। इसके बाद ही राजस्व के रिकाॅर्ड में खरीदार का नाम संपत्ति के मालिक के रूप से दर्ज होता है। अधिवक्ताओं के अनुसार, दाखिल का अर्थ होता है, दर्ज करना व खारिज का अर्थ होता है निरस्त करना। अधिवक्ता आशीष कुमार ने बताया कि जब किसी भूमि को खरीदा जाता है तो उस संपत्ति से विक्रेता के नाम को निरस्त कराकर क्रेता का नाम दर्ज कराया जाता है। इसी प्रक्रिया को खारिज-दाखिल कहते हैं। खारिज दाखिल के लिए भूमि व संबंधित क्रेता, विक्रेता के सभी प्रकार के दस्तावेज जमा कराए जाते हैं। इनकी जांच करके लेखपाल व कानूनगो रिपोर्ट लगाते हैं। इतना होने के बाद प्रक्रिया पूरी होती है।
न्यायालय में ऐसे उलझ जाता है मामला
निचलौल कस्बे के कृष्णा नगर मोहल्ले की आशा देवी कहती हैं कि चार वर्ष पहले वार्ड में ही छह डिस्मिल भूमि खरीदी थी। अभी तक उक्त भूमि पर काबिज नहीं हो सकी। क्योंकि, भूमि बेचने वाले के छोटे बेटे ने बेवजह कोर्ट में आपत्ति दाखिल कर दी है। खोन्हौली गांव के राजेश निवासी बताया कि उन्होंने करीब छह वर्ष पहले बनकटवा सिवान में 25 डिस्मिल जमीन खरीदी थी। जिसपर बैंक का लोन था। जमीन बेचने वाले व्यक्ति ने बैंक का लोन अभी तक नहीं चुकाया। इस वजह से मामला अभी न्यायालय में चल रहा है।
फोटो
मुडेरा कला में चार डिस्मिल जमीन नौ माह पहले खरीदी। सभी प्रकिया पूरी कर फाइल जमा की गई है। प्रत्येक दिन पूछना पड़ता है, लेकिन खारिज-दाखिल कब होगा, सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है।
-प्रियंका गहलौत,
फोटो
सदर क्षेत्र के इमिलिया में एक एकड़ खेत खरीदा हूं। छह माह पहले जमीन खरीदी, लेकिन अभी तक खारिज-दाखिल नहीं हुआ है। फाइल लटका दी गई है। कुछ सटीक बात भी नहीं बताई जा रही है। पता नहीं कब समस्या दूर होगी।
-भजूराम, इमिलिया
नियमों में पेंच में उलझा खारिज-दाखिल
परतावल के रहने वाले अमित जयपुरिया ने बताया कि बैकुंठपुर में चार डिस्मिल जमीन खरीदी। वर्ष 2015 से खारिज-दाखिल नहीं हो रहा है। कुछ लोग रकम की मांग कर रहे थे, नहीं दिया तो नियम-कानून का ऐसा पेंच फंसा कि अब तक चक्कर लगा रहा हूं। अनुसूचित जाति की जमीन को आदेश कराने के बाद बैनामा लिया था, लेकिन पेंच फंसा दिया गया है। मोटी रकम मांगी जा रही है।
कोट
खारिज-दाखिल करने में कोई लापरवाही नहीं की जा रही है। कुछ फाइलों में दस्तावेज की कमी के चलते लंबित है। दस्तावेज प्राप्त होते ही खारिज-दाखिल हो जाएगा। नियम के अनुसार सभी प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है।
-वाचस्पति सिंह, तहसीलदार, निचलौल
कोट
सदर तहसील में बहुत कम मामले लंबित हैं। उनको भी निस्तारित करने में तेजी की जा रही है। खारिज-दाखिल नियम के अनुसार ही होता है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर जमा हुई पत्रावली समय सीमा के अंदर निस्तारित होती है। कहीं कोई अतिरिक्त रकम वसूली की शिकायत नहीं मिलती है।
-राजेश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार, सदर
तहसीलों में लंबित हैं खारिज-दाखिल के मामले
सदर तहसील में खारिज-दाखिल के विवादित मामले में करीब 700 लंबित हैं। ये मामले में न्यायालय में विचाराधीन हैं। अविवादित खारिज दाखिल के मामले 40 लंबित हैं। निचलौल तहसील में विवादित खारिज-दाखिल के मामले में 472 हैं। अविवादित मामले में 101 लंबित हैं। इन सभी फाइलों से जुड़े आवेदक तहसीलों का चक्कर लगाने के लिए विवश हैं।
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बिचौलिये वसूलते हैं रकम, बंधा है सबका हिस्सा, एक फाइल पर वसूलते हैं 1500 से 2500 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जमीन-मकान खरीदने के बाद भी लोग मालिकाना हक के लिए जिले की तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। तहसीलों में खारिज-दाखिल के तमाम विवादित व अविवादित मामले लंबित हैं। इन मामलों को सुलझाने में अधिकारियों को पसीना आ रहा है। पीड़ित प्रत्येक दिन तहसीलों का चक्कर लगाने को विवश हैं। उनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
लाखों की जमीन खरीदने के बाद आपको मालिकाना हक के लिए अलग से रकम खर्च करनी पड़ती है। सूत्र बताते हैं कि एक फाइल पर 1500 से लेकर 2500 रुपये की वसूली होती है। इसमें कई लोगों को हिस्सा बंधा रहता है।फाइल पास होते ही सबको रकम मिल जाती है।
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खारिज-दाखिल कराने में अगर रकम देने कोई आनाकानी करता है तो उसे दर-दर की ठोकर खानी पड़ती है। कोई न कोई पेंच फंसाकर फाइल उलझा दिया जाता है। नियमों के दांव पेच में फंसे पीडि़तों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है।
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सदर तहसील में प्रत्येक दिन करीब 40 बैनामा होते हैं। रजिस्ट्री के दौरान ही दो प्रतियों में दस्तावेज जमा कराए जाते हैं। प्रक्रिया पूरी करने के बाद दूसरे दिन एक प्रति तहसील में भेज दी जाती है। 35 दिन बाद मूल दस्तावेज तहसील में प्रस्तुत करने होते हैं, ताकि खारिज-दाखिल हो सके। यदि विक्रेता ने कोई आपत्ति कर दी तो खारिज-दाखिल नहीं हो सकेगा। तहसील में 45 दिन के अंदर खारिज-दाखिल की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए, लेकिन पेंच फंसने के कारण लोग भटक रहे हैं।
सदर तहसील में खारिज-दाखिल के 40 केस लंबित हैं। जमीन ज्योंहि बैनामा होती है, त्योंही खेल शुरू हो जाता है। इस कार्य के लिए वहीं से ठेका लेना शुरू कर दिया जाता है। ग्राहक की हैसियत के अनुसार रकम की वसूली की जाती है। अगर कोई रकम नहीं देता है तो उसकी फाइल में पेंच फंसना तय रहता है। इस वजह से लोग भी रकम देने में ही भलाई समझते हैं। कई मामले तो ऐसे हैं, जिनमें सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी आवेदक भटकने को विवश हैं।
जमीन बेचने वाले बिचौलियों का मामला रहता सेट
सूत्रों के अनुसार, जमीन से कारोबार से जुड़े बिचौलियों की तहसील में सेटिंग होती है। हर माह जमीन बैनामा होते ही बंधी-बंधाई रकम संबंधित व्यक्ति तक पहुंच जाती है। इसमें क्रमश: सभी को उसका हिस्सा मिल जाता है। जमीन बेचने के दौरान सभी कार्य कराने का ठेका भी ले लिया जाता है। जमीन खरीदने वाले व्यक्ति की पूरी सुविधा का ख्याल बिचौलिये इसलिए रखते हैं कि उनके ग्राहकों की संख्या में इजाफा हो।
क्या होता है खारिज-दाखिल
नियम के अनुसार खारिज-दाखिल के बाद ही कोई खरीदार कानूनी रूप से उस भूमि का मालिक बनता है। इसके बाद ही राजस्व के रिकाॅर्ड में खरीदार का नाम संपत्ति के मालिक के रूप से दर्ज होता है। अधिवक्ताओं के अनुसार, दाखिल का अर्थ होता है, दर्ज करना व खारिज का अर्थ होता है निरस्त करना। अधिवक्ता आशीष कुमार ने बताया कि जब किसी भूमि को खरीदा जाता है तो उस संपत्ति से विक्रेता के नाम को निरस्त कराकर क्रेता का नाम दर्ज कराया जाता है। इसी प्रक्रिया को खारिज-दाखिल कहते हैं। खारिज दाखिल के लिए भूमि व संबंधित क्रेता, विक्रेता के सभी प्रकार के दस्तावेज जमा कराए जाते हैं। इनकी जांच करके लेखपाल व कानूनगो रिपोर्ट लगाते हैं। इतना होने के बाद प्रक्रिया पूरी होती है।
न्यायालय में ऐसे उलझ जाता है मामला
निचलौल कस्बे के कृष्णा नगर मोहल्ले की आशा देवी कहती हैं कि चार वर्ष पहले वार्ड में ही छह डिस्मिल भूमि खरीदी थी। अभी तक उक्त भूमि पर काबिज नहीं हो सकी। क्योंकि, भूमि बेचने वाले के छोटे बेटे ने बेवजह कोर्ट में आपत्ति दाखिल कर दी है। खोन्हौली गांव के राजेश निवासी बताया कि उन्होंने करीब छह वर्ष पहले बनकटवा सिवान में 25 डिस्मिल जमीन खरीदी थी। जिसपर बैंक का लोन था। जमीन बेचने वाले व्यक्ति ने बैंक का लोन अभी तक नहीं चुकाया। इस वजह से मामला अभी न्यायालय में चल रहा है।
फोटो
मुडेरा कला में चार डिस्मिल जमीन नौ माह पहले खरीदी। सभी प्रकिया पूरी कर फाइल जमा की गई है। प्रत्येक दिन पूछना पड़ता है, लेकिन खारिज-दाखिल कब होगा, सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है।
-प्रियंका गहलौत,
फोटो
सदर क्षेत्र के इमिलिया में एक एकड़ खेत खरीदा हूं। छह माह पहले जमीन खरीदी, लेकिन अभी तक खारिज-दाखिल नहीं हुआ है। फाइल लटका दी गई है। कुछ सटीक बात भी नहीं बताई जा रही है। पता नहीं कब समस्या दूर होगी।
-भजूराम, इमिलिया
नियमों में पेंच में उलझा खारिज-दाखिल
परतावल के रहने वाले अमित जयपुरिया ने बताया कि बैकुंठपुर में चार डिस्मिल जमीन खरीदी। वर्ष 2015 से खारिज-दाखिल नहीं हो रहा है। कुछ लोग रकम की मांग कर रहे थे, नहीं दिया तो नियम-कानून का ऐसा पेंच फंसा कि अब तक चक्कर लगा रहा हूं। अनुसूचित जाति की जमीन को आदेश कराने के बाद बैनामा लिया था, लेकिन पेंच फंसा दिया गया है। मोटी रकम मांगी जा रही है।
कोट
खारिज-दाखिल करने में कोई लापरवाही नहीं की जा रही है। कुछ फाइलों में दस्तावेज की कमी के चलते लंबित है। दस्तावेज प्राप्त होते ही खारिज-दाखिल हो जाएगा। नियम के अनुसार सभी प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है।
-वाचस्पति सिंह, तहसीलदार, निचलौल
कोट
सदर तहसील में बहुत कम मामले लंबित हैं। उनको भी निस्तारित करने में तेजी की जा रही है। खारिज-दाखिल नियम के अनुसार ही होता है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर जमा हुई पत्रावली समय सीमा के अंदर निस्तारित होती है। कहीं कोई अतिरिक्त रकम वसूली की शिकायत नहीं मिलती है।
-राजेश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार, सदर
तहसीलों में लंबित हैं खारिज-दाखिल के मामले
सदर तहसील में खारिज-दाखिल के विवादित मामले में करीब 700 लंबित हैं। ये मामले में न्यायालय में विचाराधीन हैं। अविवादित खारिज दाखिल के मामले 40 लंबित हैं। निचलौल तहसील में विवादित खारिज-दाखिल के मामले में 472 हैं। अविवादित मामले में 101 लंबित हैं। इन सभी फाइलों से जुड़े आवेदक तहसीलों का चक्कर लगाने के लिए विवश हैं।