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फाइलों में सिमट गई डेंगू से लड़ने की तैयारी
महराजगंज (ब्यूरो)
Updated Fri, 08 Jun 2018 12:38 AM IST
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फाइलों में सिमट गई डेंगू से लड़ने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पुख्ता इंतजाम नहीं है। सिर्फ कागजों में डेंगू से लड़ने की तैयारी चल रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो छह साल में सिर्फ एक व्यक्ति की डेंगू से मौत हुई है।
विभाग ने अपनी कमियाें पर पर्दा डालने के लिए आंकड़ों की बाजीगरी करता रहा है। हालांकि डेंगू के मरीजों के इलाज के सिलसिले में संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। लेकिन जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए अलग से पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति तब है जबकि छह साल में डेंगू के 44 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें से वर्ष 2016 में एक मरीज की डेंगू से मौत होने की बात भी विभाग के रिकार्ड में दर्ज है।डेंगू के मरीज के इलाज के लिए विभाग के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। जिले की सभी सीएचसी व पीएचसी में उपचार की व्यवस्था का दावा किया जाता है। हालांकि वास्तविकता कुछ और है। यह स्थिति तब है जबकि वर्ष 2013 में 5, 2014 में एक, 2015 में 3, 2016 में 15 मामले सामने आए। इनमें से एक की मौत हो गई। वहीं 2017 में 19 और 2018 में अब तक एक मामला डेंगू का सामने आ चुका है। उधर, विभाग के मुताबिक तो विभाग डेंगू को लेकर सतर्क है जबकि गांवों में सफाई व्यवस्था बदहाल है। एसीएमओ डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अलावा पंचायती राज विभाग को गांव में जागरूकता, साफ सफाई पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी पर उपचार की व्यवस्था है। ज्यादा दिक्कत होने पर जिला अस्पताल में भी बेहतर इलाज का इंतजाम है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मियों की टीम को अलर्ट कर दिया गया है। प्रयास रहेगा कि डेंगू के मामले सामने आने पर त्वरित इलाज किया जा सके।
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विभाग ने अपनी कमियाें पर पर्दा डालने के लिए आंकड़ों की बाजीगरी करता रहा है। हालांकि डेंगू के मरीजों के इलाज के सिलसिले में संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। लेकिन जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए अलग से पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति तब है जबकि छह साल में डेंगू के 44 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें से वर्ष 2016 में एक मरीज की डेंगू से मौत होने की बात भी विभाग के रिकार्ड में दर्ज है।डेंगू के मरीज के इलाज के लिए विभाग के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। जिले की सभी सीएचसी व पीएचसी में उपचार की व्यवस्था का दावा किया जाता है। हालांकि वास्तविकता कुछ और है। यह स्थिति तब है जबकि वर्ष 2013 में 5, 2014 में एक, 2015 में 3, 2016 में 15 मामले सामने आए। इनमें से एक की मौत हो गई। वहीं 2017 में 19 और 2018 में अब तक एक मामला डेंगू का सामने आ चुका है। उधर, विभाग के मुताबिक तो विभाग डेंगू को लेकर सतर्क है जबकि गांवों में सफाई व्यवस्था बदहाल है। एसीएमओ डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अलावा पंचायती राज विभाग को गांव में जागरूकता, साफ सफाई पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी पर उपचार की व्यवस्था है। ज्यादा दिक्कत होने पर जिला अस्पताल में भी बेहतर इलाज का इंतजाम है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मियों की टीम को अलर्ट कर दिया गया है। प्रयास रहेगा कि डेंगू के मामले सामने आने पर त्वरित इलाज किया जा सके।
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