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अव्यवस्था का मारा, आंगनबाड़ी केंद्र बेचारा
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अव्यवस्था का मारा, आंगनबाड़ी केंद्र बेचारा
न पानी है न बिजली, कैसे पढ़ेंगे बच्चे, कुपोषण से जीतने का दावा हो रहा फेल
भवन के अभाव में केंद्र के संचालन पर ग्रहण, 95 विभागीय भवन में होता है संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरेंदा। सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीर बदलने में जुटी हुई है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। फरेंदा ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बेहद दयनीय है। केंद्रों पर बिजली, पानी की सुविधा का अभाव है। अव्यवस्था के बीच बच्चों को पोषण करने का दावा खोखला साबित हो रहा है। केंद्र पर न तो बच्चे हैं और न ही कार्यकर्ता, ऐसे में कुपोषण से जंग जीतने का दावा भी फेल हो रहा है।
फरेंदा क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों के पड़ताल में खामियां सामने आईं, जहां पर केंद्रों के ताले भी नहीं खुले मिले। भवन के अभाव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घरों पर ही अपने कार्य का संपादन कर रही हैं।
फरेंदा बुजुर्ग के महुअवां टोले पर बना आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला, हैंडपंप भी खराब है। केंद्र के बगल में झाड़ झंखाड़ हैं। पूछने पर पता चला कि काफी दिनों से केंद्र बंद है, यहां पर कोई नहीं आता है। वहीं दूसरे टोले पर जर्जर पंचायत भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन होता था, लेकिन इस समय पुराने पंचायत भवन को तोड़कर निर्माण कार्य होने के कारण केंद्र बंद रहा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गुड़िया देवी ने बताया कि केंद्र पर कुल 30 बच्चे पंजीकृत हैं। भवन न होने के कारण घर पर ही संचालन होता है।
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गुजरपुरवां आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला। केंद्र का फर्श टूटा हुआ है, इंडिया मार्का हैंडपंप भी खराब है। गांव के लोगों ने बताया कि काफी दिनों से केंद्र बंद है। लोगो को पोषाहार के साथ दाल व तेल भी नहीं मिलता है। ग्राम प्रधान पति सुकांत शर्मा ने बताया कि नए आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए मांग की गई है, आदेश मिलते ही केंद्र का निर्माण कराया जाएगा।
उदितपुर के आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम पर पहुंचने पर कार्यकर्ता मीरा गौड़ व सहायिका इंद्रावती केंद्र का ताला खोल रही थीं। पूछने पर मीरा गौड़ ने बताया हमारे जिम्मे दो केंद है प्रथम व द्वितीय। उन्होंने बताया कि केंद्र पर 3 से 6 वर्ष तक के 28 बच्चे व 7 माह से 3 वर्ष तक के 52 बच्चे व 14 गर्भवती धात्री पंजीकृत है, लेकिन मौके पर एक भी बच्चा केंद्र पर नहीं मिला। केंद्र में गंदगी व घास व फूस थी।
उदितपुर के द्वितीय केंद्र की हालत दयनीय है, जो बनने के दस वर्ष के बाद भी अभी तक नहीं खुला है। केंद्र का फर्श, जंगले व दरवाजे टूट गए हैं। छत तक झंखाड़ उगा हुआ है, घास-फूस के कारण केंद्र भी दिखाई नहीं दे रही है। आंगनबाड़ी केंद्र पर जाने का रास्ता भी नहीं है। गांव के लोगों ने बताया कि यहां पर कोई नहीं आता है। ग्राम प्रधान नीरज जायसवाल ने बताया कि मौसम ठीक होते ही आंगनबाड़ी केंद्र की समस्या का समाधान किया जाएगा।
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केंद्रों का संचालन सुचारु रूप से करने का आदेश दिया गया है, सोमवार व बृहस्पतिवार को केंद्र को खोलने का निर्देश शासन से जारी हुआ है, जो केंद्र बंद है, उनकी जांच करा कर कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लाभार्थियों को लाभ दिया जा रहा है। जिसकी प्रति महीने फोटोग्राफी कराई जाती है।
बृजेंद्र जायसवाल, सीडीपीओ, फरेंदा
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फरेंदा ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्र पर एक नजर
संचालित केंद्र-245
केंद्र के भवन-95
तैनाती-204
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-165
सहायिका-152
सुपरवाइजर-3
मिनी आंगनबाड़ी केंद्र-41
अतिकुपोषित बच्चे-756
तीन से छह वर्ष तक के बच्चे-लगभग 7 हजार
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न पानी है न बिजली, कैसे पढ़ेंगे बच्चे, कुपोषण से जीतने का दावा हो रहा फेल
भवन के अभाव में केंद्र के संचालन पर ग्रहण, 95 विभागीय भवन में होता है संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरेंदा। सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीर बदलने में जुटी हुई है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। फरेंदा ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बेहद दयनीय है। केंद्रों पर बिजली, पानी की सुविधा का अभाव है। अव्यवस्था के बीच बच्चों को पोषण करने का दावा खोखला साबित हो रहा है। केंद्र पर न तो बच्चे हैं और न ही कार्यकर्ता, ऐसे में कुपोषण से जंग जीतने का दावा भी फेल हो रहा है।
फरेंदा क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों के पड़ताल में खामियां सामने आईं, जहां पर केंद्रों के ताले भी नहीं खुले मिले। भवन के अभाव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घरों पर ही अपने कार्य का संपादन कर रही हैं।
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फरेंदा बुजुर्ग के महुअवां टोले पर बना आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला, हैंडपंप भी खराब है। केंद्र के बगल में झाड़ झंखाड़ हैं। पूछने पर पता चला कि काफी दिनों से केंद्र बंद है, यहां पर कोई नहीं आता है। वहीं दूसरे टोले पर जर्जर पंचायत भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन होता था, लेकिन इस समय पुराने पंचायत भवन को तोड़कर निर्माण कार्य होने के कारण केंद्र बंद रहा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गुड़िया देवी ने बताया कि केंद्र पर कुल 30 बच्चे पंजीकृत हैं। भवन न होने के कारण घर पर ही संचालन होता है।
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गुजरपुरवां आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला। केंद्र का फर्श टूटा हुआ है, इंडिया मार्का हैंडपंप भी खराब है। गांव के लोगों ने बताया कि काफी दिनों से केंद्र बंद है। लोगो को पोषाहार के साथ दाल व तेल भी नहीं मिलता है। ग्राम प्रधान पति सुकांत शर्मा ने बताया कि नए आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण के लिए मांग की गई है, आदेश मिलते ही केंद्र का निर्माण कराया जाएगा।
उदितपुर के आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम पर पहुंचने पर कार्यकर्ता मीरा गौड़ व सहायिका इंद्रावती केंद्र का ताला खोल रही थीं। पूछने पर मीरा गौड़ ने बताया हमारे जिम्मे दो केंद है प्रथम व द्वितीय। उन्होंने बताया कि केंद्र पर 3 से 6 वर्ष तक के 28 बच्चे व 7 माह से 3 वर्ष तक के 52 बच्चे व 14 गर्भवती धात्री पंजीकृत है, लेकिन मौके पर एक भी बच्चा केंद्र पर नहीं मिला। केंद्र में गंदगी व घास व फूस थी।
उदितपुर के द्वितीय केंद्र की हालत दयनीय है, जो बनने के दस वर्ष के बाद भी अभी तक नहीं खुला है। केंद्र का फर्श, जंगले व दरवाजे टूट गए हैं। छत तक झंखाड़ उगा हुआ है, घास-फूस के कारण केंद्र भी दिखाई नहीं दे रही है। आंगनबाड़ी केंद्र पर जाने का रास्ता भी नहीं है। गांव के लोगों ने बताया कि यहां पर कोई नहीं आता है। ग्राम प्रधान नीरज जायसवाल ने बताया कि मौसम ठीक होते ही आंगनबाड़ी केंद्र की समस्या का समाधान किया जाएगा।
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केंद्रों का संचालन सुचारु रूप से करने का आदेश दिया गया है, सोमवार व बृहस्पतिवार को केंद्र को खोलने का निर्देश शासन से जारी हुआ है, जो केंद्र बंद है, उनकी जांच करा कर कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लाभार्थियों को लाभ दिया जा रहा है। जिसकी प्रति महीने फोटोग्राफी कराई जाती है।
बृजेंद्र जायसवाल, सीडीपीओ, फरेंदा
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फरेंदा ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्र पर एक नजर
संचालित केंद्र-245
केंद्र के भवन-95
तैनाती-204
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-165
सहायिका-152
सुपरवाइजर-3
मिनी आंगनबाड़ी केंद्र-41
अतिकुपोषित बच्चे-756
तीन से छह वर्ष तक के बच्चे-लगभग 7 हजार