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भारत-नेपाल के संबंध सदियों पुराने, दोनों के आराध्य हैं राम : पीएम
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भारत-नेपाल के संबंध सदियों पुराने, दोनों के आराध्य हैं राम : पीएम
अयोध्या में हुआ प्रभु का जन्म, नेपाल है माता सीता का घर
दोनों देश मिलकर पूरे विश्व में पहुंचाएंगे भगवान बुद्ध का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी बोले, बुद्ध पूर्णिमा पर लुंबिनी आकर खुद का मान रहा सौभाग्यशाली
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। भगवान राम हमारे आराध्य हैं। वे भारत के जन-जन और कण-कण में बसते हैं। उनके जन्म स्थान अयोध्या में भव्य मंदिर बन रहा है। इससे भारतीय ही नहीं, नेपाल के लोग भी खुश हैं। भारत और नेपाल का संबंध नया नहीं है। प्रभु राम के युग से नेपाल भारतीयों के लिए आस्था का केंद्र रहा है, क्योंकि यह माता सीता का घर है। आगे भी भारत और नेपाल का संबंध यू हीं बना रहेगा। दोनों देश मिलकर मानवता के लिए काम करेंगे और पूरे विश्व में भगवान बुद्ध के शांति का संदेश पहुंचाएंगे। ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नेपाल के लुंबिनी में बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।
नेपाल लुंबिनी विकास कोष द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए तय है कि भारत और नेपाल का संबंध और मजबूत होगा। दोनों देशों के बीच सिर्फ व्यापारिक संबंध नहीं हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी एक-दूसरे से जुड़े हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है और यह रिश्ता आने वाले दिनों में और मजबूत होता जाएगा। भगवान राम और माता सीता भारत और नेपाल दोनों के लिए आराध्य हैं। भगवान बुद्ध को भी दोनों देशों के लोग पूजते हैं। अब दोनों देश मिलकर उनके संदेश को विश्व में प्रचरित करेंगे। साथ ही पीएम ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा पर उन्हें भगवान बुद्ध से जुड़े कई स्थलों का जाने का अवसर प्राप्त हुआ है, लेकिन आज बुद्ध की जन्मभूमि पर आकर वे खुद को सौभाग्यशाली समझते हैं। संवाद
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जन्म, ज्ञान और निर्वाण का संदेश देता है बुद्ध का जीवन
- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध का जन्म बुद्ध पूर्णिमा को हुआ। इसी दिन उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और इसी दिन उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया। यह संयोग मात्र नहीं है, बल्कि बुद्धत्व का दार्शनिक संदेश है, जो हमें जन्म, ज्ञान और निर्वाण का बोध कराता है। साथ ही पीएम ने कहा कि उनका जन्म स्थान गुजरात का वडनगर सदियों पहले बौद्ध शिक्षा का बड़ा केंद्र हुआ करता था। आज भी वहां खुदाई में प्राचीन अवशेष मिल रहे हैं, जिनके संरक्षण का काम जारी है।
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डॉ. आंबेडकर चेयर फॉर बौद्धिस्ट स्टडीज स्थापित करने का फैसला
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और नेपाल मिलकर लुंबिनी म्यूजियम का निर्माण करा रहे हैं। लुंबिनी बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी में डॉ. अंबेडकर चेयर फॉर बौद्धिस्ट स्टडीज स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है।
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अयोध्या में हुआ प्रभु का जन्म, नेपाल है माता सीता का घर
दोनों देश मिलकर पूरे विश्व में पहुंचाएंगे भगवान बुद्ध का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी बोले, बुद्ध पूर्णिमा पर लुंबिनी आकर खुद का मान रहा सौभाग्यशाली
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। भगवान राम हमारे आराध्य हैं। वे भारत के जन-जन और कण-कण में बसते हैं। उनके जन्म स्थान अयोध्या में भव्य मंदिर बन रहा है। इससे भारतीय ही नहीं, नेपाल के लोग भी खुश हैं। भारत और नेपाल का संबंध नया नहीं है। प्रभु राम के युग से नेपाल भारतीयों के लिए आस्था का केंद्र रहा है, क्योंकि यह माता सीता का घर है। आगे भी भारत और नेपाल का संबंध यू हीं बना रहेगा। दोनों देश मिलकर मानवता के लिए काम करेंगे और पूरे विश्व में भगवान बुद्ध के शांति का संदेश पहुंचाएंगे। ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नेपाल के लुंबिनी में बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।
नेपाल लुंबिनी विकास कोष द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए तय है कि भारत और नेपाल का संबंध और मजबूत होगा। दोनों देशों के बीच सिर्फ व्यापारिक संबंध नहीं हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी एक-दूसरे से जुड़े हैं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है और यह रिश्ता आने वाले दिनों में और मजबूत होता जाएगा। भगवान राम और माता सीता भारत और नेपाल दोनों के लिए आराध्य हैं। भगवान बुद्ध को भी दोनों देशों के लोग पूजते हैं। अब दोनों देश मिलकर उनके संदेश को विश्व में प्रचरित करेंगे। साथ ही पीएम ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा पर उन्हें भगवान बुद्ध से जुड़े कई स्थलों का जाने का अवसर प्राप्त हुआ है, लेकिन आज बुद्ध की जन्मभूमि पर आकर वे खुद को सौभाग्यशाली समझते हैं। संवाद
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जन्म, ज्ञान और निर्वाण का संदेश देता है बुद्ध का जीवन
- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध का जन्म बुद्ध पूर्णिमा को हुआ। इसी दिन उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और इसी दिन उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया। यह संयोग मात्र नहीं है, बल्कि बुद्धत्व का दार्शनिक संदेश है, जो हमें जन्म, ज्ञान और निर्वाण का बोध कराता है। साथ ही पीएम ने कहा कि उनका जन्म स्थान गुजरात का वडनगर सदियों पहले बौद्ध शिक्षा का बड़ा केंद्र हुआ करता था। आज भी वहां खुदाई में प्राचीन अवशेष मिल रहे हैं, जिनके संरक्षण का काम जारी है।
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डॉ. आंबेडकर चेयर फॉर बौद्धिस्ट स्टडीज स्थापित करने का फैसला
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और नेपाल मिलकर लुंबिनी म्यूजियम का निर्माण करा रहे हैं। लुंबिनी बुद्धिस्ट यूनिवर्सिटी में डॉ. अंबेडकर चेयर फॉर बौद्धिस्ट स्टडीज स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है।