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स्वास्थ्य
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पीएचसी चौक बाजार में लैब है पर टेक्नीशियन नहीं
महराजगंज। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चौक बाजार का हाल बदहाल है। यहां लैब तो है लेकिन टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। इससे जांच कराने के लिए लोगों को 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। सर्वाधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं की जांच में होती है। मानक के अनुसार यहां स्टाफ की तैनाती तो पूरी है। लेकिन, बेहतर संसाधन नहीं है।
पीएचसी में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक स्वीपर, तीन स्टाफ नर्स, एक एएनएम की तैनाती है। प्रत्येक माह औसत 70 से 80 प्रसव होता है। अस्पताल में आठ बेड उपलब्ध हैं। औजार को कीटाणु रहित करने वाली स्टेरिलाइजर मशीन खराब पड़ी है जिससे समस्या हो रही है। अस्पताल में फ्रीजर नहीं है। महेशपुर गांव की सुष्मिता के परिजन ने बताया कि अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं मिलती है। प्रसव के बाद भर्ती होने के दौरान दूध नहीं दिया जाता है।
इसके अलावा अस्पताल में जांच की सुविधा भी नहीं है। खजुरिया गांव की शारदा ने बताया कि यहां इलाज में परेशानी होती है। पर्याप्त दवाएं भी नहीं मिलती हैं। कुछ दवाओं को बाहर से ही खरीदना पड़ता है। ममता ने बताया कि अस्पताल में रसोई घर नहीं है जिससे प्रसूताओं को भोजन मिलने में परेशानी होती है। दरहटा की रंजू ने बताया कि अस्पताल में जांच की व्यवस्था नहीं है। जांच कराने के लिए जिला अस्पताल या जगदौर सीएचसी का सहारा रहता है। यह दोनों अस्पताल 12 से 15 किमी दूरी पर है।
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डॉ. रामस्वरूप सिंह ने बताया कि सृजित पद के सापेक्ष सभी पदों पर तैनाती है। मरीजों की जांच के लिए कोरोना काल से पहले सप्ताह में एक दिन लैब टेक्नीशियन आते थे। लेकिन, अभी नहीं आ रहे हैं। स्टेरिलाइजर मशीन ठीक कराने के लिए अधिकारियों को सूचित किया गया। शीघ्र ही बन जाएगी। अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज करने का प्रयास किया जाता है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रसोई घर नहीं होने से भोजन की व्यवस्था बाहर से की जाती है। भोजन की गुणवत्ता बेहतर होती है। नियमानुसार प्रसूताओं को भोजन दिया जाता है। अस्पताल में दवाएं पर्याप्त हैं। अस्पताल में जो संसाधन उपलब्ध है, उसमें बेहतर ढंग से कार्य किया जा रहा है।
-डॉ. विपिन शुक्ला, प्रभारी चिकित्साधिकारी
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महराजगंज। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चौक बाजार का हाल बदहाल है। यहां लैब तो है लेकिन टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। इससे जांच कराने के लिए लोगों को 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। सर्वाधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं की जांच में होती है। मानक के अनुसार यहां स्टाफ की तैनाती तो पूरी है। लेकिन, बेहतर संसाधन नहीं है।
पीएचसी में एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक स्वीपर, तीन स्टाफ नर्स, एक एएनएम की तैनाती है। प्रत्येक माह औसत 70 से 80 प्रसव होता है। अस्पताल में आठ बेड उपलब्ध हैं। औजार को कीटाणु रहित करने वाली स्टेरिलाइजर मशीन खराब पड़ी है जिससे समस्या हो रही है। अस्पताल में फ्रीजर नहीं है। महेशपुर गांव की सुष्मिता के परिजन ने बताया कि अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं मिलती है। प्रसव के बाद भर्ती होने के दौरान दूध नहीं दिया जाता है।
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इसके अलावा अस्पताल में जांच की सुविधा भी नहीं है। खजुरिया गांव की शारदा ने बताया कि यहां इलाज में परेशानी होती है। पर्याप्त दवाएं भी नहीं मिलती हैं। कुछ दवाओं को बाहर से ही खरीदना पड़ता है। ममता ने बताया कि अस्पताल में रसोई घर नहीं है जिससे प्रसूताओं को भोजन मिलने में परेशानी होती है। दरहटा की रंजू ने बताया कि अस्पताल में जांच की व्यवस्था नहीं है। जांच कराने के लिए जिला अस्पताल या जगदौर सीएचसी का सहारा रहता है। यह दोनों अस्पताल 12 से 15 किमी दूरी पर है।
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डॉ. रामस्वरूप सिंह ने बताया कि सृजित पद के सापेक्ष सभी पदों पर तैनाती है। मरीजों की जांच के लिए कोरोना काल से पहले सप्ताह में एक दिन लैब टेक्नीशियन आते थे। लेकिन, अभी नहीं आ रहे हैं। स्टेरिलाइजर मशीन ठीक कराने के लिए अधिकारियों को सूचित किया गया। शीघ्र ही बन जाएगी। अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज करने का प्रयास किया जाता है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर रसोई घर नहीं होने से भोजन की व्यवस्था बाहर से की जाती है। भोजन की गुणवत्ता बेहतर होती है। नियमानुसार प्रसूताओं को भोजन दिया जाता है। अस्पताल में दवाएं पर्याप्त हैं। अस्पताल में जो संसाधन उपलब्ध है, उसमें बेहतर ढंग से कार्य किया जा रहा है।
-डॉ. विपिन शुक्ला, प्रभारी चिकित्साधिकारी