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देश भक्ति से सराबोर हुए नगरवासी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2016 12:33 AM IST
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सिसवा में वंदे मातरम कार्यक्रम के तहत मंचासीन एडीएम, एसडीएम व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
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सिसवा बाजार/चिउटहां। वंदेमातरम यात्रा का आगाज ‘एक शाम देश के अमर शहीदों के नाम’ से रेलवे स्टेशन परिसर में प्रारंभ हुआ। औपचारिक शुरुआत अतिथि सम्मान से हुई। नेतृत्व कर रहे पडरौना के भजन गायक अनीश सोनी ने राष्ट्रीय गीतों ...ऐ मेरे वतन के लोगों.., कर चले हम फ़िदा जान..., दिल दिया है जान भी देंगे ए वतन तेरे लिए..., ...सबसे आगे होंगे हिंदुस्तानी...के जरिए इस यात्रा का संदेश दिया। लोगों ने भी उनका खूब उत्साहवर्धन किया। गायक सोनी ने बताया कि इस यात्रा का मूल उद्देश्य भारत के लोगों को एकता के सूत्र में पिरोना है। इसलिए इस यात्रा की शुरुआत भगवान बुद्ध की पावन धरती कुशीनगर की गई।
एडीएम ने स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों की प्रथम उपस्थिति पर स्वागत अभिनंदन किया। साथ ही पंडित सुजीत आजाद और अशफाक उल्लाह खान को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। कहा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। राष्ट्रभक्ति ही सबसे बड़ा धर्म है। हम सभी को अपने देश की सेवा ईमानदारी से करनी चाहिए।
स्वतंत्रता सेनानी अशफाक उल्लाह खान के प्रपौत्र अशफाक उल्लाह खान ने अपनी शुरुआत उन महान देशभक्तों की स्मृतिस्वरूप ‘सरफरोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुएं कातिल में हैं’ से की। आगे खान साहब ने 1857से1947 की घटनाओं से अशफाक उल्लाह खान और रामप्रसाद विस्मिल की छोटी सी घटना को बताया कि दोनों दो अलग अलग धर्मों से थे। लेकिन शाहजहांपुर में एक तरफ आजान तो दूसरी तरफ हवन पूजन जैसे कार्य होते थे। यानी उस समय सभी के अंदर देशभक्ति, राष्ट्रभक्ति थी जिसका उद्देश्य मात्र देश को स्वतंत्र कराना था। दोनों क्रांतिकारियों की अटूट प्रेम और देशभक्ति मिसाल है।
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चंद्रशेखर आजाद के भतीजे पं सुजीत आजाद ने कहा कि हम इस यात्रा को आज के युवा को समर्पित कर चुके हैं और आह्वान करते हैं कि आप राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग करें। उन्होंने युवाओं से अपील की कि देश से अराजकतत्वों, कुरीतियों को निकलने में उनका सहयोग करें। आज देश में जाति और धर्म की राजनीति हो रही है। पूर्वजों के सपने को साकार करने के लिए यात्रा वंदे मातरम् का शुभारंभ किया।
सिसवा विकास समिति के मनोज केसरी, बीएसएस निदेशक पंकज तिवारी, मदरसा कमिटी के शिबू बनारसी, युवा कल्याण समिति के धनंजय दुबे सहित सेंट जोसफ सिसवा के प्रिंसिपल ओए जोसफ, अवधेश चौबे आदि रहे। संचालन रोशन मद्धेशिया ने किया।
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एडीएम ने स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों की प्रथम उपस्थिति पर स्वागत अभिनंदन किया। साथ ही पंडित सुजीत आजाद और अशफाक उल्लाह खान को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। कहा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। राष्ट्रभक्ति ही सबसे बड़ा धर्म है। हम सभी को अपने देश की सेवा ईमानदारी से करनी चाहिए।
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स्वतंत्रता सेनानी अशफाक उल्लाह खान के प्रपौत्र अशफाक उल्लाह खान ने अपनी शुरुआत उन महान देशभक्तों की स्मृतिस्वरूप ‘सरफरोशी की तम्मना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुएं कातिल में हैं’ से की। आगे खान साहब ने 1857से1947 की घटनाओं से अशफाक उल्लाह खान और रामप्रसाद विस्मिल की छोटी सी घटना को बताया कि दोनों दो अलग अलग धर्मों से थे। लेकिन शाहजहांपुर में एक तरफ आजान तो दूसरी तरफ हवन पूजन जैसे कार्य होते थे। यानी उस समय सभी के अंदर देशभक्ति, राष्ट्रभक्ति थी जिसका उद्देश्य मात्र देश को स्वतंत्र कराना था। दोनों क्रांतिकारियों की अटूट प्रेम और देशभक्ति मिसाल है।
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चंद्रशेखर आजाद के भतीजे पं सुजीत आजाद ने कहा कि हम इस यात्रा को आज के युवा को समर्पित कर चुके हैं और आह्वान करते हैं कि आप राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग करें। उन्होंने युवाओं से अपील की कि देश से अराजकतत्वों, कुरीतियों को निकलने में उनका सहयोग करें। आज देश में जाति और धर्म की राजनीति हो रही है। पूर्वजों के सपने को साकार करने के लिए यात्रा वंदे मातरम् का शुभारंभ किया।
सिसवा विकास समिति के मनोज केसरी, बीएसएस निदेशक पंकज तिवारी, मदरसा कमिटी के शिबू बनारसी, युवा कल्याण समिति के धनंजय दुबे सहित सेंट जोसफ सिसवा के प्रिंसिपल ओए जोसफ, अवधेश चौबे आदि रहे। संचालन रोशन मद्धेशिया ने किया।