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Maharajganj News: नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीज हो रहे परेशान
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घुघली। सस्ते इलाज की लालसा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघली आने वाले नेत्र मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मरीजों को 25 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। मजबूरी में निजी अस्पतालों में मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
11 वर्षों में निर्मित घुघली सीएचसी का शिलान्यास वर्ष 2009 में हुआ। अस्पताल का संचालन शुरू होने में तीन वर्ष लग गए लेकिन सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। घुघली सीएचसी के दायरे में लगभग दो लाख की आबादी आती है। कुशीनगर सीमा पर स्थिति इस अस्पताल से दो जिले के लोग लाभान्वित होते हैं।
मरीज कुशुमावती देवी ने बताया कि आंख से पानी गिरता है और धुंधला दिखाई देता है। यहां कोई सुविधा नहीं होने के कारण निजी अस्पताल में जाना पडे़गा।
जगदीशपुर गांव से आए अजीज ने बताया कि धुंधला दिखाई देता है लेकिन सीएचसी में डॉक्टर नहीं होने के कारण अब प्राइवेट में दिखाना पड़ेगा। खानपुर गांव निवासी सूचित ने बताया कि आंख दिखाने जब सीएचसी आया तो किसी ने बताया कि जिले पर जाइए यहां पर डाक्टर नहीं हैं। प्राइवेट में दिखाया तो उन्होंने बताया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. अमित विक्रम ने बताया कि यहां पर केवल नेत्र परीक्षक ही तैनात हैं। शेड्यूल के अनुसार वह भी मात्र तीन दिन ही आते हैं। मरीजों को जिला अस्पताल भेज कर इलाज कराया जाता है।
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11 वर्षों में निर्मित घुघली सीएचसी का शिलान्यास वर्ष 2009 में हुआ। अस्पताल का संचालन शुरू होने में तीन वर्ष लग गए लेकिन सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। घुघली सीएचसी के दायरे में लगभग दो लाख की आबादी आती है। कुशीनगर सीमा पर स्थिति इस अस्पताल से दो जिले के लोग लाभान्वित होते हैं।
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मरीज कुशुमावती देवी ने बताया कि आंख से पानी गिरता है और धुंधला दिखाई देता है। यहां कोई सुविधा नहीं होने के कारण निजी अस्पताल में जाना पडे़गा।
जगदीशपुर गांव से आए अजीज ने बताया कि धुंधला दिखाई देता है लेकिन सीएचसी में डॉक्टर नहीं होने के कारण अब प्राइवेट में दिखाना पड़ेगा। खानपुर गांव निवासी सूचित ने बताया कि आंख दिखाने जब सीएचसी आया तो किसी ने बताया कि जिले पर जाइए यहां पर डाक्टर नहीं हैं। प्राइवेट में दिखाया तो उन्होंने बताया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. अमित विक्रम ने बताया कि यहां पर केवल नेत्र परीक्षक ही तैनात हैं। शेड्यूल के अनुसार वह भी मात्र तीन दिन ही आते हैं। मरीजों को जिला अस्पताल भेज कर इलाज कराया जाता है।