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Maharajganj News: टीनशेड के रैनबसेरे में तपिश झेलने को मजबूर हैं तीमारदार और मरीज

Wed, 05 Aug 2026 01:58 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:58 AM IST
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Patients and attendants are forced to endure the heat in the tin shed night shelter.
जिला अस्पताल के रैन बसेरा में गर्मी में बेहाल हो रहे तीमारदार
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गंदे कूलर और बेअसर पंखों के बीच रहने को मजबूर हैं मरीज
महराजगंज। जिला अस्पताल परिसर में तीमारदारों को राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया रैन बसेरा गर्मी और उमस के बीच खुद परेशानी का सबब बन गया है। टीनशेड से निर्मित रैन बसेरा दिन में इतना गर्म हो जाता है कि कुछ मिनट बैठना भी मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके आईसीयू, प्रसूति वार्ड और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजन मजबूरी में इसी तपते शेड के नीचे दिन और रात गुजार रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, रैन बसेरे में लगाए गए चार कूलर और दर्जनों छत के पंखे मौजूद तो हैं लेकिन अधिकांश कूलर बिना पानी के मिले। कुछ कूलरों पर महीनों पुरानी धूल और गंदगी की मोटी परत जमी हुई थी। कूलरों की घास भी सड़ चुकी है, जिससे ठंडी हवा मिलने के बजाय दुर्गंध फैल रही है। इनकी स्थिति देखकर साफ तौर पर होता है कि लंबे समय से इनकी सफाई नहीं की गई है।
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ऐसे में गर्मी से राहत मिलने के बजाय तीमारदारों को उमस और बदबू का सामना करना पड़ रहा है। भिटौली निवासी शांति अपनी नातिन पल्लवी के इलाज के लिए जिला अस्पताल में रुकी हुई हैं। उन्होंने बताया कि बच्ची को बुखार होने पर भर्ती कराया गया है। रैन बसेरे में रुकना उनकी मजबूरी है लेकिन टीनशेड के कारण इतनी गर्मी होती है कि बैठना भी मुश्किल हो जाता है। रात में भी गर्मी और उमस से राहत नहीं मिलती।
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वहीं पकड़ी सिसवा निवासी अदालत अपनी बहू के प्रसव के बाद अस्पताल में ठहरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां पुत्र का जन्म हुआ है। रैन बसेरे में लगाए गए कूलरों में पानी नहीं है और टीनशेड के कारण अंदर काफी उमस रहती है। उनका कहना है कि यदि कूलरों का नियमित रखरखाव हो और पानी की व्यवस्था रहे तो तीमारदारों को काफी राहत मिल सकती है।

वर्जन
पूर्व जिलाधिकारी सत्येंद्र झा के कार्यकाल में तीमारदारों की सुविधा के लिए टीनशेड के माध्यम से यह रैन बसेरा बनाया गया था। रैन बसेरे को पक्के भवन के रूप में विकसित कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
- मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. एके द्विवेदी
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