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Maharajganj News: सोहगीबरवा में वनकर्मियों की सुरक्षा में तैनात होगी पीएसी
Thu, 22 Feb 2024 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 22 Feb 2024 01:32 AM IST
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निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर वन रेंज के जंगल से 15 फरवरी को अवैध लकड़ी काट कर ले जा रहे एक युवक को वनकर्मियों की टीम ने पकड़ लिया था। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने वन रेंज कार्यालय को घेरकर तोड़फोड़ करने लगे थे। घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस भी आक्रोशित ग्रामीणों के आगे घुटने टेक दी थी। वन कर्मी रेंज कार्यालय छोड़ भाग निकले। इसके बाद ग्रामीण बरामद लकड़ी और साइकिल को कब्जे में लेकर लौट गए थे।
घटना के बाद से वनकर्मी रेंज कार्यालय में ताला लगाकर डीएफओ कार्यालय में शरण लिए हुए हैं। ऐसे में वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने विभाग के कर्मियों की सुरक्षा के लिए डीएम और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर गुहार लगाई थी। उसके बाद सुरक्षा को लेकर शिवपुर रेंज कार्यालय पर पीएसी बल की तैनाती के लिए निर्देश दिए हैं।
शिवपुर वन क्षेत्राधिकारी पियूष गुप्ता ने कहा कि वन रेंज कार्यालय पर उनकी तैनाती करीब आठ माह पूर्व हुई थी। तैनाती के बाद से नारायणी नदी, नेपाल बॉर्डर और बिहार तथा कुशीनगर सीमा से सटे वन संपदा और वन्य जीवों की निगरानी के लिए सख्ती बढ़ा दी गई। इतना ही नहीं उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जंगल खाली कर वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को भी चिह्नित किया जाने लगा। ऐसे में लकड़ी और वन्य जीव तस्कर और भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग ग्रामीणों को कर्मियों के प्रति उकसाने में जुटे थे। उच्चाधिकारियों से मौखिक सूचना मिली है कि वन कर्मियों की सुरक्षा के लिए कार्यालय पर पीएसी बल की तैनाती की जाएगी। इससे सुरक्षा को लेकर राहत होगी।
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रेंज कार्यालय के दफ्तर में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक वन रेंज क्षेत्र में दो बीट 54 और 55 है। दोनों बीट के जंगलों का क्षेत्रफल 1600 हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है। हालांकि जंगल की वनस्पतियों और वन्यजीवों की रखवाली के लिए रेंज कार्यालय पर रेंजर, फॉरेस्टर और चौकीदार सहित तीन की तैनाती की गई है। जबकि एक जमाने में इस मनोरम जंगलों के बीच बीट संख्या 54 में स्थित काठ बंगला जंगल की शोभा बढ़ा रहा था, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते आज यह बंगला बदहाली का दंश झेल रहा है।
वन क्षेत्राधिकारी पियूष गुप्ता ने कहा कि 1600 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस जंगल में शीशम और खैर के अत्यधिक वृक्ष हैं। साथ ही जामुन और सेमर प्रजाति के भी वृक्ष पाए जाते हैं। यह जंगल नेपाल राष्ट्र से निकली नारायणी नदी के किनारे बसने के चलते नेपाल बॉर्डर और बिहार राज्य के वाल्मीकि नगर और कुशीनगर जिले को छूता है। आमतौर पर इस जंगल में जंगली सुअर, नीलगाय, हिरन, शाही प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं।
वनकर्मियों के मुताबिक दुर्गम इलाकों में स्थित वन रेंज क्षेत्र के जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रेंज कार्यालय में हथियार के नाम पर एक राइफल और एक डबल बैरियर बंदूक है। वह भी जंग खा चुकी है। ऐसे में अब वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वनकर्मियों को केवल लाठियां, टार्च के अलावा उनकी वर्दी ही होती है। इतना ही नहीं उनके पास तो जंगलों में गश्त करने के लिए कोई वाहन भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी दशा में स्वयं के साधनों बाइक आदि से वन क्षेत्र की देख-रेख करते हैं। जानवरों को काबू करने के लिए ट्रेंकुलाइजर गन तक नहीं हैं।
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घटना के बाद से वनकर्मी रेंज कार्यालय में ताला लगाकर डीएफओ कार्यालय में शरण लिए हुए हैं। ऐसे में वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने विभाग के कर्मियों की सुरक्षा के लिए डीएम और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर गुहार लगाई थी। उसके बाद सुरक्षा को लेकर शिवपुर रेंज कार्यालय पर पीएसी बल की तैनाती के लिए निर्देश दिए हैं।
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शिवपुर वन क्षेत्राधिकारी पियूष गुप्ता ने कहा कि वन रेंज कार्यालय पर उनकी तैनाती करीब आठ माह पूर्व हुई थी। तैनाती के बाद से नारायणी नदी, नेपाल बॉर्डर और बिहार तथा कुशीनगर सीमा से सटे वन संपदा और वन्य जीवों की निगरानी के लिए सख्ती बढ़ा दी गई। इतना ही नहीं उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जंगल खाली कर वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को भी चिह्नित किया जाने लगा। ऐसे में लकड़ी और वन्य जीव तस्कर और भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग ग्रामीणों को कर्मियों के प्रति उकसाने में जुटे थे। उच्चाधिकारियों से मौखिक सूचना मिली है कि वन कर्मियों की सुरक्षा के लिए कार्यालय पर पीएसी बल की तैनाती की जाएगी। इससे सुरक्षा को लेकर राहत होगी।
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रेंज कार्यालय के दफ्तर में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक वन रेंज क्षेत्र में दो बीट 54 और 55 है। दोनों बीट के जंगलों का क्षेत्रफल 1600 हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है। हालांकि जंगल की वनस्पतियों और वन्यजीवों की रखवाली के लिए रेंज कार्यालय पर रेंजर, फॉरेस्टर और चौकीदार सहित तीन की तैनाती की गई है। जबकि एक जमाने में इस मनोरम जंगलों के बीच बीट संख्या 54 में स्थित काठ बंगला जंगल की शोभा बढ़ा रहा था, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते आज यह बंगला बदहाली का दंश झेल रहा है।
वन क्षेत्राधिकारी पियूष गुप्ता ने कहा कि 1600 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस जंगल में शीशम और खैर के अत्यधिक वृक्ष हैं। साथ ही जामुन और सेमर प्रजाति के भी वृक्ष पाए जाते हैं। यह जंगल नेपाल राष्ट्र से निकली नारायणी नदी के किनारे बसने के चलते नेपाल बॉर्डर और बिहार राज्य के वाल्मीकि नगर और कुशीनगर जिले को छूता है। आमतौर पर इस जंगल में जंगली सुअर, नीलगाय, हिरन, शाही प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं।
वनकर्मियों के मुताबिक दुर्गम इलाकों में स्थित वन रेंज क्षेत्र के जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रेंज कार्यालय में हथियार के नाम पर एक राइफल और एक डबल बैरियर बंदूक है। वह भी जंग खा चुकी है। ऐसे में अब वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वनकर्मियों को केवल लाठियां, टार्च के अलावा उनकी वर्दी ही होती है। इतना ही नहीं उनके पास तो जंगलों में गश्त करने के लिए कोई वाहन भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी दशा में स्वयं के साधनों बाइक आदि से वन क्षेत्र की देख-रेख करते हैं। जानवरों को काबू करने के लिए ट्रेंकुलाइजर गन तक नहीं हैं।