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Maharajganj News: हाईवे पर ही नहीं दफ्तर में फाइल में पेच फंसा कर वसूली जाती थी रकम

Sun, 27 Aug 2023 01:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Aug 2023 01:21 AM IST
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Not only on the highway, the money was collected by screwing in the file in the office
दलालों ने कार्यालय में बनाई थी अच्छी पैठ, रकम देते ही एक झटके में हो जाता था काम
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में जब से एआरटीओ, पीटीओ समेत आठ लोग जेल गए हैं, तब से उनके कारनामों की पोल एक-एक कर खुल रही है। पहले तो इनके प्रभाव से कोई कुछ बोलता नहीं था, लेकिन इन अधिकारियों के जेल जाने के बाद पीड़ितों ने कहानी बयां करनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में यह पता चला कि वसूली के लिए सोनौली हाईवे तीन स्थानों पर वसूली के लिए ठिकाने बनाए गए थे। वसूली से कोई बच न पाए, इसके लिए कदम-कदम पर आदमी रखे गए थे।
सूत्र बता रहे हैं कि ओवरलोड ट्रक ही नहीं कार्यालय में आने वाले काम में पेच फंसा कर रकम वसूली जाती थी। किसी को वाहन का फिटनेश, ट्रांसफर, एनओसी आदि कराना है तो सब कुछ ठीक होने पर भी रकम की वसूली की जाती थी। प्रत्येक फाइल पर 500 से 1000 रुपये निर्धारित था। रकम काम में स्वरूप के आधार ली जाती थी। जितना पेंचीदा काम उतनी मोटी रकम होती थी। बीते दिनों एसटीएफ ने चोरी के पांच ट्रकों को बरामद किया था तो उसमें फर्जी एनओसी समेत कूटरचित कागजात के जरिए गाडियों को चलने की बात सामने आई थी। सूत्रों की माने तो यह धंधा अधिकारियों की मिलीभगत से आराम से चल रहा था। किसी को कोई भनक भी नहीं लग रही थी।
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वसूली के खेल में फंसे पीटीओ का नाम गोंडा में तैनाती के दौरान भी दागदार रहा। एक सिपाही भी पहले वसूली में फंसा था। जब कोई वाहन स्वामी किसी समस्या को लेकर गलरहिया चुंगी पर जाता था, तो उसे मुख्यालय पर भेज दिया जाता था। वहां दलालों के जरिए रकम देने पर काम हो जाता था। महीने में जिन बड़े ट्रांसपोर्टरों की ओर से रकम दी जाती थी, उनकी गाड़ियों को नहीं रोका जाता था।
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प्रभारी एआरटीओ रवि त्यागी ने बताया कि कार्यालय में जरूरी कामकाज निपटाया जा रहा है। नियम के अनुसार सभी जरूरी काम किए जा रहे हैं।
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रकम नहीं देने पर दोगुना लगा दिया जाता था जुर्माना
सोनौली हाईवे पर हमेशा आने वाले चालक बताते हैं कि रकम नहीं देने पर जलील होना पड़ता था। कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। रकम नहीं देने पर दोगुना जुर्माना लगाया जाता था। जिसके कारण ड्राइवर डर जाते थे। कभी-कभी तो यह नौबत आ जाती है कि ड्राइवरों के पास खाना खाने के रुपये भी नहीं बचते थे। रकम बिना दिए किसी भी गाड़ी को बैरियर पार नहीं करने दिया जाता था।
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किनारे रहते थे अधिकारी, फंसने पर आते थे
ट्रक चालकों के अनुसार, वसूली के दौरान किसी विरोध की स्थिति में ही अधिकारी सामने आते थे। कार्रवाई का भय दिखाते थे। उनकी ओर से रखे गए कर्मी ही वसूली करते थे। कोई ट्रक चालक डर के कारण मुंह नहीं खोलता था। सबसे ज्यादा वसूली रात में ही होती थी। क्योंकि बाहर से आने वाली ज्यादातर गाड़िया रात में ही आती हैं।
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कोयले वाले ट्रकों से मिलती थी मोटी रकम
चुंगी पर अवैध वसूली का सिलसिला लगातार जारी था। गोरखपुर सोनौली रास्ट्रीय राजमार्ग 24 पर गोरखपुर रेलवे, फैजाबाद रेलवे से कोयला लेकर नेपाल जाने वाले ओवरलोड ट्रक को चालान नहीं किया जाता था, क्योंकि उनसे इन्हें हर माह मोटी रकम मिलती थी। अधिकारियों के गुर्गे जगह-जगह, रात-दिन सड़क पर खड़े होकर कागजात जांच के बहाने मनमाने ढंग से वसूली कर रहे थे। जांच के दौरान ट्रक चालकों के कागजात और मोबाइल ले लिए जाते थे।

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