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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Not a single property registration could take place for the second consecutive day due to the strike against the front office system.

Maharajganj News: फ्रंट कार्यालय व्यवस्था के विरोध में हड़ताल से दूसरे दिन भी नहीं हो सकी एक भी रजिस्ट्री

Thu, 11 Jun 2026 01:30 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 01:30 AM IST
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Not a single property registration could take place for the second consecutive day due to the strike against the front office system.
उपनिबंधक कार्यालय पर धरना देते स्टंप विक्रेता और अधिवक्ता। 
उपनिबंधक कार्यालय पर अधविक्ता, दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता दे रहे धरना
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अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और अन्य कर्मचारियों रोजगार छिनने का खतरा
महराजगंज। उपनिबंधक कार्यालय में प्रस्तावित फ्रंट कार्यालय व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं एवं ई-स्टांपिंग संचालकों का हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने पूरे दिन भी रजिस्ट्री एवं बैनामा कार्य का बहिष्कार करते हुए कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। हड़ताल की वजह से दूसरे दिन भी एक भी रजिस्ट्री नहीं होने से लगभग एक करोड़ रुपये सरकारी राजस्व के नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, बुधवार को कार्यालय परिसर में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा और आम नागरिकों को भी विभिन्न कार्यों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। दो दिनों से कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा है। रजिस्ट्री कार्य बंद रहने के कारण अब तक लगभग एक करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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धरने को संबोधित करते हुए कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश शुक्ला, लेखक संघ अध्यक्ष चंद्रभान विश्वकर्मा तथा ई-स्टांपिंग संचालक शेषमणि गुप्ता ने कहा कि शासन द्वारा लागू की जा रही फ्रंट कार्यालय व्यवस्था निबंधन प्रक्रिया के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे वर्षों से इस कार्य से जुड़े अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और अन्य कर्मचारियों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
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वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था पर हजारों परिवारों की आजीविका निर्भर है। नई प्रणाली लागू होने से न केवल रोजगार प्रभावित होगा, बल्कि आम जनता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ और जटिल प्रक्रियाओं का सामना भी करना पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की यह नीति जनहित के बजाय निजीकरण को बढ़ावा देने वाली है।


प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक शासनादेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक बैनामा और रजिस्ट्री कार्य का बहिष्कार जारी रहेगा। उनका कहना था कि यह संघर्ष केवल रोजगार बचाने का नहीं बल्कि जनसुविधा, पारदर्शिता और पारंपरिक निबंधन व्यवस्था की रक्षा का भी है। इस अवसर पर रमेश सिंह, अंकुर मणि त्रिपाठी, अशोक कुमार, बृजेश्वर लाल शर्मा, अफताब आलम, अभिषेक श्रीवास्तव, अनिल वर्मा, जयप्रकाश, अखिलेश, राजबहादुर, रिगेश गुप्ता, आलोक मिश्रा, कुलदीप मणि त्रिपाठी, रवि तिवारी मौजूद रहे।
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