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Maharajganj News: चार गुना बढ़े नाक, कान गला के मरीज
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डॉक्टर से परामर्श लेते मरीज।
महराजगंज। मौसम बदलने से नाक-कान, गला के मरीज बढ़ गए हैं। इससे पीड़ित 80 से 90 मरीज रोजाना जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह पहले एक संख्या 15 से 20 थी। डॉक्टर उपचार कर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, पछुआ हवा चलने पर यह समस्या और बढ़ जाएगी।
नाक, कान और गला विभाग के डॉक्टर अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि वर्तमान में नाक, कान-गला के मरीज बढ़ गए हैं। पछुआ हवा चलने पर यह समस्या और बढ़ेगी। पछुआ हवा नाक के अंदरूनी हिस्से को प्रभावित करती है। इससे नाक सूख जाती है। पपड़ी बनने लगती है। कई मामलों में नाक से खून भी आने लगता है।
विशेष रूप से 5 से 12 वर्ष के बच्चे इससे ज्यादा पीड़ित होते हैं। क्योंकि उनकी नाक की त्वचा नाजुक होती है और वे हवा से सीधे संपर्क में आते हैं। फिलहाल ओपीडी में नाक-कान-गला संबंधी शिकायतों के साथ रोजाना 80 से 90 मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। कुल मिलाकर जिला अस्पताल के ओपीडी में प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों का इलाज हो रहा है, जिसमें ईएनटी विभाग के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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डॉक्टरों का कहना है कि पछुआ हवा की वजह से नाक में नमी की कमी हो जाती है, जिससे जलन, खुजली और रक्तस्राव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह समस्या विशेषकर सुबह-शाम के समय अधिक बढ़ जाती है, जब हवा का प्रवाह तेज होता है। बच्चों में यह समस्या जल्दी गंभीर रूप ले सकती है, क्योंकि वे खेलते-कूदते हुए बाहर ज्यादा समय बिताते हैं।
डॉक्टर ने लोगों को सलाह दी है कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए मास्क का उपयोग जरूर करें। मास्क नाक और मुंह को सूखी हवा से बचाता है और नमी बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा, घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ या कपड़े से नाक-मुंह ढकें। पर्याप्त पानी पीना और नाक में नारियल तेल या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई नेजल ड्रॉप्स का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है। यदि नाक से खून आना, लगातार जलन या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
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नाक, कान और गला विभाग के डॉक्टर अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि वर्तमान में नाक, कान-गला के मरीज बढ़ गए हैं। पछुआ हवा चलने पर यह समस्या और बढ़ेगी। पछुआ हवा नाक के अंदरूनी हिस्से को प्रभावित करती है। इससे नाक सूख जाती है। पपड़ी बनने लगती है। कई मामलों में नाक से खून भी आने लगता है।
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विशेष रूप से 5 से 12 वर्ष के बच्चे इससे ज्यादा पीड़ित होते हैं। क्योंकि उनकी नाक की त्वचा नाजुक होती है और वे हवा से सीधे संपर्क में आते हैं। फिलहाल ओपीडी में नाक-कान-गला संबंधी शिकायतों के साथ रोजाना 80 से 90 मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। कुल मिलाकर जिला अस्पताल के ओपीडी में प्रतिदिन 80 से 90 मरीजों का इलाज हो रहा है, जिसमें ईएनटी विभाग के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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डॉक्टरों का कहना है कि पछुआ हवा की वजह से नाक में नमी की कमी हो जाती है, जिससे जलन, खुजली और रक्तस्राव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह समस्या विशेषकर सुबह-शाम के समय अधिक बढ़ जाती है, जब हवा का प्रवाह तेज होता है। बच्चों में यह समस्या जल्दी गंभीर रूप ले सकती है, क्योंकि वे खेलते-कूदते हुए बाहर ज्यादा समय बिताते हैं।
डॉक्टर ने लोगों को सलाह दी है कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए मास्क का उपयोग जरूर करें। मास्क नाक और मुंह को सूखी हवा से बचाता है और नमी बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा, घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ या कपड़े से नाक-मुंह ढकें। पर्याप्त पानी पीना और नाक में नारियल तेल या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई नेजल ड्रॉप्स का उपयोग भी फायदेमंद हो सकता है। यदि नाक से खून आना, लगातार जलन या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।