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नौवें दिन लोगों ने सिद्धिदात्री का पूजन किया

Mon, 10 Oct 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला महराजगंज
ब्यूरो/अमर उजाला महराजगंज Updated Mon, 10 Oct 2016 11:50 PM IST
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Ninth day people worship Siddhidatri
पूजन हुआ। - फोटो : अमर उजाला
 नवरात्र के अंतिम नौवें दिन माता जगदंबा के नौवे स्वरूप सिद्धिदात्री का वैदिक विधि विधान के साथ पूजा किया गया। देवी के सिद्घि देने वाली रूप का हर जगह बड़ी श्रद्धा और प्रेम के साथ पूजन हुआ। नवरात्र के पूरे दिन तथा सीमित दोनों तरह के व्रत करने वालों ने माता के पंडालों में सुबह से ही माता के दर्शन पूजन हवन के अलावा बहुत सी महिलाओं और पुरुषों ने अपने, अपने घरों प्रतिष्ठानों में कन्याओं का भी विधिवत पूजन अर्चन कर उनको विविध प्रकार के भोजन कराए। उनके चरण छू कर आशीर्वाद लिए। नवरात्र के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री का पूजन विशेष महत्व रखता है। हिन्दू धर्मशास्त्र मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, लघिमा, महिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्वये आठ प्रकार की सिद्घियां होती हैं। इसी सिद्घि को पाने के लिए बड़े, बड़े ज्ञानी, मुनी, संत, ऋषि, महात्मा दिन रात जप, तप, ध्यान, दान, यज्ञ आदि करते हैं। जिस किसी व्यक्ति को यह सिद्घियां मिल जाती हैं वह सुख समृद्धि का प्रतीक हो जाता है। इसके अर्थ को पाना बहुत कठिन नही है। लेकिन इसके अर्थ को सिद्ध करना ही अपने आप में बहुत अर्थ रखता है। यह महालक्ष्मी का ही स्वरूप है। 
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 नवरात्र के नौवें दिन नगर के विभिन्न पंडालों में सुबह से ही हवन कराने वालों की लंबी लाइन लगने लगी। नगर के दुर्गा मन्दिर में प्रात: 7 बजे से ही माता के पूजन का क्रम शुरू हो गया। यहां दूर, दूर से भक्तों ने आकर माता के दर्शन पूजन के अलावा हवन भी कराए। इसके अतिरिक्त मऊपाकड़, चौक रोड, बस स्टेशन पोस्ट आफिस रोड, हनुमानगढ़ी, अमरूतिया पंत नगर, जयप्रकाश नगर, सिंचाई कालोनी, टेढ़वा कुटी मुख्यालय गेट, चौपरियां में स्थित माता के पाण्डाल में बड़ी संख्या में स्त्री पुरूषों ने हवन पूजन व माता के दर्शन किए। इसमें श्री,श्री नवदुर्गा पूजा विमान समिति हनुमानगढ़ी में राजेश निगम, अभय सिंह, श्रवण निगम, अमन निगम,सुरेश मद्वेशिया, महेन्द्र निगम, रजत निगम व बम,बम समिति  में सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पशुपतिनाथ तिवारी, अवनीश नरायन, दिलीप वर्मा, एके सिंह, विनोद सिंह, संजीव श्रीवास्तव, विराजवीर अभिमन्यू गुप्ता, केके शुक्ला, अखिलेश्वर राव, हरिकेश बहादुर यादव के देख रेख में आयोजित हुआ। टेढ़वा कुटी दुर्गा पाण्डाल में देवीजागरण का आयोजन शैलेष पटेल, ब्रजेन्द्र नाथ त्रिपाठी, विनोद अग्रहरी सहित तमाम लोगों के सहयोग से सम्पन्न हुआ।वही बैकुंठपुर में कंजड़ समुदाय के लोगों ने भी नवरात्र का व्रत रख भाजपा नेता राजेश मद्धेशिया के नेतृत्व में मां दुर्गा के पांडाल में हवन पूजन का कार्य किया। 
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इसी प्रकार महुअवां ढाला के दुर्गा मन्दिर स्थित पाण्डाल व सिसवां अमहवां में दुर्गा मूर्ति और पंडाल को बहुत ही सुन्दर तरीके से सजाया गया। यहां सुबह से ही स्थानी भक्तों ने माता के दर्शन पूजन किए। घरो में कन्या पूजन व भोजन के बाद हवन किए गये। इसी क्रम में पकड़ी दुर्गा मन्दिर महटोली व महलगंज के दुर्गा मन्दिर पर भी सुबह से ही हवन पूजन के र्काक्रम शुरू हो गए। बरवां, महदेवां, सिसवां, महदेवां, खुटहां जंगल फरजंद अली, अहमदपुर जंगल बैरियर, बड़हरा रानी, कटहरा खास, बागापार, रामपुर बुजुर्ग विजयपुर, बेलवा काजी, केवलापुर खुर्द, बरगदवा राजा, सलामतगढ़ भगवानपुर, पंडितपुर, जलालगढ़, भैंसहिया आदि में माता के पाण्डाल में हवन पूजन किऐ गए। 
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  इसी प्रकार सिसवां अमहवां के कोटही माता, पकड़ी रेंज के सदर बीट में बोकड़ा माता, चेहरी के रक्तहिया माता, केवलापुर खुर्द के राजगढ़ की समय माता मन्दिर में नवरात्र के नौवें दिन सुबह 5 बजे से ही माता के दर्शनों के लिए भक्तों लाइन लगा लिया। बोकड़ा माता के दरबार में जाने के लिए पकड़ी क्षेत्र के जाने वालों को नाव का सहारा लेना पड़ा। क्योकि यहां रेहाव नाले में काफी पानी होने से डायवर्जन पुल पानी में डूबा हुआ है। मन्दिर के महन्थ रामचरन दास त्यागी ने कहा कि इस वर्ष अधिक बरसात होने व रोहिन नदी में जलजमाव के कारण रेहाव नाले में पूरे नवरात्र काफी पानी जमा होने से आवागमन में काफी परेशानी हुई। आने जाने के लिए मन्दिर के तरफ से नाव का संचालन किया जा रहा है। राजगढ़ के समय माता मन्दिर में मुख्य पुजारी रामनाथ व उनके सहयोगियों द्वारा माता की महाआरती के बाद मन्दिर में भक्तों द्वारा माता के दर्शन पूजन का कार्यक्रम सुबह से ही देर शाम तक चलता रहा। सिसवां अमहवां के कोटही माता मन्दिर में सुबह 6 बजे से ही स्थानीय लोगों ने माता के दर्शन पूजन के लिए आने लगे। जैसे, जैसे दिन चढ़ता गया वैसे, वैसे मन्दिर में भक्तों की भीड़ बढ़ती गई। यहां देर शाम तक माता के पूजनका कार्यक्रम चलता रहा। जबकि नगर में मुख्य मेला शाम 7 बजे से शुरू हुआ। जो देर रात तक चलता रहा।
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