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Maharajganj News: एजेंटों का संजाल...पहले कहते नहीं लगेगा ब्याज, बाद में बना देते कंगाल

Sun, 13 Apr 2025 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sun, 13 Apr 2025 12:53 AM IST
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Network of agents...first they say that there will be no interest, later they make you bankrupt
महराजगंज। माइक्रो फाइनेंस से कर्ज दिलाने में शुरुआत से ही झोल रहता है। इस खेल में एक नया मामला सामने आया है। कर्ज के बोझ तले दबीं महिलाएं दाव पेंच समझ नहीं पाती हैं। इस खेल में पढ़ी-लिखी महिलाओं को एजेंटों ने शामिल किया है।
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वह स्थानीय भाषा में ही जरूरतमंद महिलाओं से बातचीत करती हैं। इससे आसानी से गरीब अनपढ़ महिलाएं कर्ज लेने के लिए तैयार हो जाती हैं। कर्ज के दलदल में फंसने के बाद महिलाएं निकली नहीं पाती हैं। पीड़ित महिलाओं ने इस पूरी कहानी को बयां की। उन्होंने बताया कि पहले एजेंट बताते हैं ब्याज नहीं लगेगा बाद में ब्याज के साथ मोटी रकम वसूलते हैं।
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इस पूरे नेटवर्क को समझने के लिए सदर तहसील क्षेत्र के गोनहा गांव में जाना पड़ा। यहां तमाम महिलाओं ने समूह बनाकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लिया है। इलाज कराने, घर बनवाने, बाइक खरीदने, बच्चे को पढ़ाने आदि जरूरतों के लिए महिलाओं ने कर्ज ले रखा है। गांव में भ्रमण करने पर तारामती देवी मिलीं। पहले तो वह बातचीत से झिझक रही थीं। बाद में अपनी तकलीफ बयां करने लगीं। उन्होंने कहा कि कर्ज तो आसानी से मिल जाता है, लेकिन एजेंट वसूली करने आते हैं तो उनका व्यवहार ठीक नहीं रहता है।
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उन्होंने बताया कि एक साल पहले एक महिला घर आई और बेटी की शादी के लिए 32000 रुपये का ऋण दिलाने की बात कही। उसने बताया था कि यह ऋण समूह से मिलेगा और ब्याज नहीं लगेगा, साथ ही किश्तों में धीरे-धीरे भुगतान करना होगा। शादी के छह महीने बाद जब एजेंट घर आया तो उसने किश्त के साथ ब्याज की मांग की। पहली किस्त उसे 5000 रुपये दी, जब ब्याज देने से इनकार की तो एजेंट ने धमकी देना शुरू कर दिया। ऐसी ही कहानी बैदा गांव की इशरावती की भी है।
उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले बेटी की शादी के लिए माइक्रो फाइनेंस समूह से 40 हजार रुपये का ऋण लिया था। यह ऋण दो किश्तों में मिला। एजेंट ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि यदि आर्थिक स्थिति खराब है तो किश्त माफ हो जाएगी, लेकिन कुछ ही महीनों बाद एजेंट ने न केवल किश्त की मांग की बल्कि 25 प्रतिशत ब्याज भी जोड़ दिया। सूचितपुर गांव की रहने वाली सिंद्रावती ने बताया कि दो साल पहले अपनी बेटी की शादी के लिए उन्होंने एक माइक्रो फाइनेंस एजेंट से 30 हजार रुपये चार किश्तों में ली। आरोप है कि गांव में एक महिला ने उन्हें बताया था कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियां बिना ब्याज के गरीब और जरूरतमंदों की मदद करती हैं। इसी भरोसे में आकर उन्होंने ऋण लिया।

करीब एक साल तक कोई सूचना नहीं आई, लेकिन अचानक एक दिन एजेंट घर पहुंचा और किश्तों के बारे में पूछने लगा। एजेंट ने बताया कि उन्हें 26 प्रतिशत ब्याज देना होगा। यह सुनकर रोने लगीं और एजेंट बिना कुछ कहे चला गया।
इसके बाद से एजेंट आए दिन उनके घर आकर धमकी देता है।
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