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Maharajganj News: दिन भर घटता-बढ़ता रहा नारायणी नदी का जलस्तर, प्रशासन सतर्क

Wed, 02 Sep 2026 02:02 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 02:02 AM IST
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Narayani River water level fluctuated throughout the day; administration on alert.
फोटो परिचय नदी किनारे खूंटी गाड़ कर जलस्तर देखते ग्रामीण।
नारायणी नदी से दोपहर 12 से दो बजे के बीच 1.50 लाख क्यूसेक और शाम छह बजे तक करीब 1.44 लाख क्यूसेक हुआ डिस्चार्ज
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निचलौल। नारायणी नदी में मंगलवार को दिन भर जलस्तर घटता-बढ़ता रहा। खतरे की आशंका को देखते हुए प्रशासनिक अमला दिन भर जलस्तर को मापता रहा। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग और सुरक्षा व्यवस्था में लगी टीमें लगातार नदी किनारे डटी हुई हैं।
जलस्तर पर नजर रखने के लिए नदी किनारे खूंटियां गाड़कर पानी के स्तर को चिह्नित किया गया है। प्रशासन दिनभर इसकी निगरानी कर जलस्तर का जायजा लेता रहा। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र से होकर गुजरने वाली नदियों का जलस्तर फिलहाल सुरक्षित स्थिति में है लेकिन नारायणी नदी में पानी के बहाव में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए निगरानी की जा रही है।
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गंडक नदी बैराज से मंगलवार शाम छह बजे तक करीब 1.44 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया। दिनभर पानी के बहाव में कई बार उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। सुबह आठ बजे बैराज से 1.31 लाख क्यूसेक, दोपहर 12 से दो बजे के बीच 1.50 लाख क्यूसेक, शाम चार बजे 1.47 लाख क्यूसेक और शाम छह बजे 1.44 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होना दर्ज किया गया।
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आरआरटी टीम की अगुवाई कर रहे सौरभ शुक्ला 18 जवानों के साथ निर्धारित प्वाइंट पर डटे हैं। टीम की ओर से नदी किनारे पहुंचकर तमाशा देखने वाले लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही प्रभावित क्षेत्र में लोगों के अनावश्यक प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।


खूंटी गाड़कर जलस्तर पर नजर रहे ग्रामीण

नदी किनारे रहने वाले ऐसे ग्रामीणों के लिए नदी के जलस्तर के बढ़ने-घटने का पता लगाने के लिए नदी किनारे खूंटियां गाड़ी गई हैं। ग्रामीण इन खूंटियों के सहारे पानी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रख रहे हैं।


पशुओं को घर पर ही चारा-पानी दे रहे लोग

नारायणी नदी में बहकर आने वाले मलबे, सामान और जानवरों के शवों के कारण नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को पिछले तीन दिनों से दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा था। सोमवार रात और मंगलवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश से जहां ताल-तलैया में पानी बढ़ा, वहीं बारिश के बाद नदी किनारे दुर्गंध भी कुछ कम हुई है। नदी में बहकर आने वाले शवों से उठ रही दुर्गंध और संक्रमण की आशंका के चलते पशुपालकों ने अपने मवेशियों को नदी किनारे चराने के बजाय दूसरी जगह ले जाना शुरू कर दिया। दुधारू पशुओं को घर पर ही चारा-पानी दिया जा रहा है।

गांव वालों ने संक्रमण के डर से बदल दिया पशुओं का चरागाह स्थल बड़ेया गांव निवासी पन्नेलाल यादव और डोमा निवासी रामबृक्ष यादव ने बताया कि उनके यहां दर्जनों मवेशी हैं। पहले मवेशियों को नदी किनारे चराया जाता था लेकिन संक्रमण की आशंका के कारण चराने का स्थान बदल दिया गया है। अब दुधारू पशुओं को घर पर ही चारा और पानी दिया जा रहा है।

उपजिलाधिकारी अवनीश त्रिपाठी ने बताया कि क्षेत्र से होकर गुजरने वाली नदियों की स्थिति सामान्य है। इसके बावजूद नदी किनारे आने-जाने वाले लोगों को जागरूक करने के लिए सुरक्षा टीम लगातार अभियान चलाकर निगरानी कर रही है।
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