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संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत
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विश्मिल नगर मोहल्ले में हलषष्ठी की कथा सुनतीं महिलाएं।
- फोटो : MAHARAJGANJ
संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत
महिलाओं ने छठ माता का चित्र बनाकर सिद्धविनायक गणेश व माता गौरी का किया पूजन भगवान कृष्ण के बड़े भाई श्री बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है यह पर्व
महराजगंज। माताओं ने हलषष्ठी व्रत संतान की लंबी आयु की प्राप्ति के लिए रखा। माताओं ने पूजन के स्थान पर दीवार पर छठ माता का चित्र बनाकर सिद्ध विनायक गणेश और माता गौरी का पूजन किया। वहीं, हल षष्ठी की कथा सुनकर संतान की दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि हलषष्ठी पर्व करने से हलधर धारी भगवान बलदाऊ उनके पुत्रों को लंबी आयु प्रदान करते हैं। यह पर्व भगवान कृष्ण के बड़े भाई श्री बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शहर के राजीव नगर मोहल्ले में महिलाओं ने एक स्थान पर एकत्र होकर पूजा की। लोहिया नगर, जय प्रकाश नगर समेत अन्य मोहल्लों में महिलाओं ने पूजा कर संतान की लंबी उम्र की कामना की।
मां पीतांबरा जनकल्याण ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को हलषष्ठी धूमधाम से मनाया गया। परंपरा के अनुसार कुछ स्थानों पर हल षष्ठी को हलछठ या ललही छठ के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि हलषष्ठी व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस व्रत को विधि-विधान से करने से संतान, आयु, बल ,बुद्धि, पराक्रम की वृद्धि होती हैं।
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महिलाओं ने छठ माता का चित्र बनाकर सिद्धविनायक गणेश व माता गौरी का किया पूजन भगवान कृष्ण के बड़े भाई श्री बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है यह पर्व
महराजगंज। माताओं ने हलषष्ठी व्रत संतान की लंबी आयु की प्राप्ति के लिए रखा। माताओं ने पूजन के स्थान पर दीवार पर छठ माता का चित्र बनाकर सिद्ध विनायक गणेश और माता गौरी का पूजन किया। वहीं, हल षष्ठी की कथा सुनकर संतान की दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि हलषष्ठी पर्व करने से हलधर धारी भगवान बलदाऊ उनके पुत्रों को लंबी आयु प्रदान करते हैं। यह पर्व भगवान कृष्ण के बड़े भाई श्री बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शहर के राजीव नगर मोहल्ले में महिलाओं ने एक स्थान पर एकत्र होकर पूजा की। लोहिया नगर, जय प्रकाश नगर समेत अन्य मोहल्लों में महिलाओं ने पूजा कर संतान की लंबी उम्र की कामना की।
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मां पीतांबरा जनकल्याण ज्योतिष केंद्र के ज्योतिर्विद आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को हलषष्ठी धूमधाम से मनाया गया। परंपरा के अनुसार कुछ स्थानों पर हल षष्ठी को हलछठ या ललही छठ के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि हलषष्ठी व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस व्रत को विधि-विधान से करने से संतान, आयु, बल ,बुद्धि, पराक्रम की वृद्धि होती हैं।
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