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Maharajganj News: जंगल में नहीं मिल रहा निवाला, आबादी तक पहुंच रहे तेंदुए

Sat, 29 Jul 2023 12:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jul 2023 12:41 AM IST
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Morsel is not available in the forest, leopards are reaching the population
फोटो
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जंगलों से सटी करीब 30 गांवों की 70 हजार आबादी में दहशत का माहौल
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जंगलों में तेंदुओं को भोजन न मिलने के चलते वह आबादी में पहुंच हिंसक हो रहे हैं। ऐसे में तेंदुए के लगातार हो रहे हमले से जंगलों से सटे करीब 30 गांवों में बसे 70 हजार आबादी में दहशत का माहौल बना हुआ है। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्रों में तेंदुओं की तादाद काफी है। जंगलों में तेंदुओं को निवाला नहीं मिलने से वह आबादी तक पहुंचकर पालतू जानवरों का आसानी से शिकार कर ले रहे हैं। बीते एक माह की घटनाओं पर नजर डाले तो तेंदुए ने कभी छत पर बंधी बकरी को शिकार बनाया तो कभी दरवाजे पर बैठे पालतू कुत्ते को नोच डाला। आबादी की ओर तेंदुए की बढ़ती दखल के वजह से जंगल के आस पास के गांवों के लोग दहशत में हैं।
जंगल सटे गांव के रहने वाले बुजुर्ग मुरारी, बेचई, पलकधारी बताते हैं कि पहले तेंदुआ या अन्य जीव सीधे आबादी का रुख नहीं करते थे, क्योंकि उन्हें जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिल जाता था। कभी कभार ही ऐसे मामले सुनाई देते थे कि तेंदुए ने गांव में पहुंच कर जानवरों पर हमला किया हो, लेकिन वर्तमान समय में इस तरह की अधिकांश घटनाएं सुनने को मिल रही हैं। तेंदुआ गांव में घुस कर पालतू जानवरों पर हमला बोल देते हैं। जंगलों से गुजरी सड़कों पर दिन-रात वाहनों का आवागमन रहता है। गांवों की आबादी जंगलों तक पहुंच गई है। यही कारण है कि वन्यजीवों का जीवन भी प्रभावित हुआ है।
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वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मैनेजर अरशद हुसैन ने कहा कि एक नर तेंदुए का क्षेत्र करीब 16 से 18 वर्ग किमी के बीच होता है। इतने क्षेत्र में नर तो एक ही रहता है, लेकिन मादा अधिक भी हो सकती हैं। साथ ही नर तेंदुओं के बीच आपसी संघर्ष में कमजोर तेंदुआ तीन-चार किमी के दायरे में ही अपना आवास ढूंढता है। जंगलों में भोजन नहीं मिलने से तेंदुए सीधे आबादी में पहुंच रहे हैं। जहां पर पालतू जानवरों के शिकार करने के दौरान उनका संघर्ष मानव से हो रहा है। जंगलों में लोमड़ी और सुअरों की संख्या बेहद कम हो चुकी। हालांकि तेंदुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। वन्यजीवों की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि आने वाले कुछ वर्षों में तेंदुओं की संख्या में काफी इजाफा हो जाएगा।
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--------------------एक माह के अंदर तेंदुए यहां बोल चुके हैं हमला
26 जुलाई को निचलौल क्षेत्र के बढ़या गांव के टोला गेठीहवा से सटे बांध पर घास चरने पहुंची बकरियों की झुंड पर एक तेंदुए ने हमला बोल दी। जिस दौरान तेंदुए के हमले में एक बकरी घायल हो गई थी।

24 जुलाई को कोठीभार थाना क्षेत्र के गुरली-रमगढ़वा गांव में एक तेंदुए ने छत पर बंधी बकरी पर हमला बोल मार डाला। शोर मचाने पर जंगल की ओर भाग गया।

15 जुलाई को निचलौल शहर से सटे चमनगंज नहर पुल के किनारे खाली जमीन पर एक तेंदुए ने चीतल प्रजाति के हिरन को नोच कर मार डाला था। जिसे लेकर शहर के लोग कई दिनों तक डरे रहे।

6 जुलाई को निचलौल क्षेत्र के कलनही गांव के सामने खड्डा नहर मार्ग पर एक तेंदुए ने बाइक सवार बाप,बेटी पर हमला बोल दी। जिस दौरान तेंदुए की हमले में बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई थी।

5 जुलाई को मधवलिया वन रेंज क्षेत्र के बसौली बीट से सटे सुकड़हर गांव में तेंदुए ने एक पालतू कुत्ते को शिकार कर लिया था। ग्रामीणों की शोर मचाने के बाद तेंदुआ कुत्ते को लेकर बसौली बीट के बीच से होकर बहने वाली नदी के किनारे झाड़ी में जाकर छुप गया।

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घने जंगलों के बीच रहना पसंद करते हैं तेंदुए
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मैनेजर अरशद हुसैन ने कहा कि तेंदुए खुले घास के मैदानों या आबादी वाले क्षेत्रों से बचते हुए घने जंगल वाले क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं। वे गर्म और ठंडी दोनों जलवायु में रह सकते हैं। तेंदुए मांसाहारी जानवर हैं और वे ताजा मांस ही खाना पसंद करते हैं। ये इलाके के अनुसार विभिन्न प्रकार के जीवों का शिकार करते हैं। कुछ क्षेत्रों में उनके आहार में 80 फीसदी लोमड़ी, खरगोश को भोजन बनाते हैं। इसके अलावा वे कीड़े, पक्षी, साही, बबून और बंदर, हिरन जैसे जीवों को भी खाते हैं।

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शक्तिशाली और चतुर जीव होते हैं तेंदुए
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सदस्य रविंद्र तिवारी ने कहा कि तेंदुए बहुत शक्तिशाली और चतुर जीव है। इनकी एकाग्रता तो लाजवाब होती है। शिकार को पकड़ने की तकनीक और हमला करने की शैली इन्हें एक अव्वल दर्जे का शिकारी बनाती है। आमतौर पर ये निशाचरी होते हैं। तेंदुए 56 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकते हैं।

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वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। बचाव के लिए समय समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है। वन क्षेत्र के किनारे बसे गांव के लोगों को सजग रहने की जरूरत है। वन कर्मियों की टीम हमेशा निगरानी में लगी रहती है।
पुष्प कुमार कांधला, प्रभागीय वनाधिकारी, सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग
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