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मनरेगा घोटाला : फर्म पर केस दर्ज, कर्मियों पर नहीं, जांच जारी

Mon, 09 Oct 2023 12:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Oct 2023 12:03 AM IST
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MNREGA scam: Case registered against the firm, not against the employees, investigation ongoing
एक ही प्रकरण में दो तरह की कार्रवाई पर सवाल, परतावल व घुघली से जुड़ा हैं सदर में हुए मनरेगा घोटाले का तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सदर ब्लॉक तरकुलवा गांव में वर्ष-2019 में पोखरी खोदाई मनरेगा से कराई गई। इस मामले में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया है। इसमें 38 लाख का भुगतान कर दिया गया। जांच हुई तो मौके पर पोखरी नहीं मिली। 20 मई 2023 को कार्य कराने वाले फर्म पर आनन-फानन में केस दर्ज करा दिया गया, जबकि इस प्रकरण में शामिल अन्य कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ठीक इसी तरह का मामला घुघली व परतावल में मिला था, जिसमें कर्मियों पर भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन सदर ब्लाॅक में सिर्फ फर्म पर कार्रवाई कर अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया है। जांच का बहाना बनाकर अधिकारी खामोश हैं।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सदर ब्लाॅक में हुए 38 लाख रुपये के घोटाले के मामले में जिम्मेदार आरोपी कर्मचारियों को बचाने में लगे हैं। यही वजह है कि अभी तक कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सिर्फ फर्म पर केस दर्ज कराकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सदर ब्लाॅक के तरकुलवां गांव में जिस पोखरी पर काम दिखाकर भुगतान कराया गया है, वहां मौके पर कुछ है ही नहीं।
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प्रकरण की शिकायत जब हुई तो पहले लीपापोती करने का प्रयास किया गया। फिर सीडीओ के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया। टीम में तत्कालीन उपायुक्त स्वत: रोजगार को शामिल किया गया। इसके अलावा डीपीआरओ यावर अब्बास तथा लघु सिंचाई विभाग की अवर अभियंता गरिमा द्विवेदी को सदस्य बनाया गया। जांच कमेटी के अध्यक्ष राकेश कुमार पांडेय के अनुसार मामले की जांच हो गई है, मौके पर कोई कार्य नहीं हुआ है। बिना काम कराए ही फर्जी भुगतान कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद 20 मई को सदर बीडीओ द्वारा फर्म पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। वहीं घोटाले में शामिल कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि इसके पूर्व परतावल व घुघली ब्लाॅक में हुए मनरेगा घोटाले में 15 जून 2021 को दो एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें एक मुकदमे में एपीओ विनय कुमार मौर्या, कंप्यूटर ऑपरेटर यशवंत यादव, प्रदीप शर्मा, दिनेश मौर्या, अमन ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, जबकि दूसरे मुकदमे में एपीओ विनय कुमार मौर्या के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। इसके अलावा वन विभाग के तीन कर्मचारियों पर भी केस दर्ज कराया गया था।
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पहले परतावल फिर घुघली ब्लाॅक में खुली थी घोटाले की पोल
महराजगंज। मनरेगा में घोटाला पहले परतावल ब्लाॅक में हुआ, यहां 26 लाख के गबन का मामला उजागर हुआ। उसके बाद घुघली ब्लाॅक में 1.28 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया। मामले में तत्कालीन बीडीओ ने दो एफआईआर दर्ज कराया था। उसके बाद सदर ब्लाॅक में 38 लाख रुपये का घोटाला उजागर हुआ। खास बात यह है कि सभी घोटाले के तार आपस में जुड़े हुए हैं।
घुघली ब्लाॅक में 1.28 करोड़ रुपये गबन के मामले में तत्कालीन बीडीओ प्रवीन शुक्ला ने सदर कोतवाली में दो एफआईआर दर्ज कराया था। जांच के आधार पर तत्कालीन अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी विनय कुमार मौर्या, उनके साथ तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर परतावल व घुघुली यशवंत यादव व विकास खंड घुघली में दैनिक वेतन पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर प्रदीप शर्मा, तथा कथित ठेकेदार के अलावा फर्जी भुगतान में शामिल फर्म फर्म अंकित इंटरप्राइजेज व अमन ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। दूसरी एफआईआर में 48 लाख 22 हजार 191 रुपये के गबन का केस दर्ज किया गया है। अफसरों के संज्ञान में लाए बिना 48 लाख 22 हजार 191 रुपये का फर्जी तरीके से गबन किया गया था।

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परतावल के बरियरवा गांव के पोखरी सुंदरीकरण से खुला था मामला
वित्तीय वर्ष 2018-19 में परतावल ब्लाॅक के बरियरवा गांव में पोखरी सुंदरीकरण कार्य में 25 लाख 87 हजार 820 रुपये के घोटाले में तत्कालीन बीडीओ प्रवीण कुमार ने 28 मई को एपीओ विनय कुमार मौर्य, सतभरिया निवासी दिनेश मौर्या, कथित ठेकेदार के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसी दिन वन विभाग ने इसी मामले में वन विभाग के सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक घनश्याम राय, कंप्यूटर ऑपरेटर अरविंद श्रीवास्तव, लेखा लिपिक विंद्रेश कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। अभी यह मामला चल ही रहा था कि 20 दिन में ही घुघली ब्लाॅक में भी मनरेगा घोटाला उजागर हो गया। जांच पड़ताल में यह बात सामने आई है कि घोटाले का तार परतावल से लेकर घुघली तक जुड़ा है। दोनों ब्लाॅकों में करोड़ों रुपये का जो घोटाला हुआ है, उसका मास्टर माइंड एपीओ विनय मौर्या ही है। इसमें साथ निभाया उसके नजदीकी तथाकथित ठेकेदार व ब्लाॅक के ऑपरेटरों व कर्मचारियों ने घोटाले का तानाबाना बुना और बाद में खुद उसी में फंस गए।

जालसाजों ने इतनी चालाकी से काम किया कि बीडीओ व अन्य अफसरों को भनक नहीं लगी। इसी तरह सदर ब्लाॅक में भी हुआ। सदर ब्लाॅक के मनरेगा घोटाले में भी उसी फर्म पर मुकदमा दर्ज कराया गया है, जबकि कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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प्रकरण में जांच हो रही है। दोषी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। मामले के बारे में पूरी जानकारी ली जा रही है।
-संतोष कुमार राय, मुख्य विकास अधिकारी
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