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Maharajganj News: ससुराल में मिली तकनीक, साइबर ठगी का मास्टरमाइंड बन गया इंटर पास मिथुन
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लोगों को झांसे में लेकर मोबाइल पर भेजता था एपीके फाइल, फाइल खुलते ही खाली कर देता था बैंक खाते
हाईस्कूल पास साथी निकेश बैंक खाता और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने में करता था सहयोग
महराजगंज। निचलौल क्षेत्र के रहने वाले मिथुन को ससुराल में एपीके फाइल और जालसाजी का लिंक बनाने की तकनीक मिली और वह साइबर ठगी का मास्टरमाइंड बन गया। गांव के ही रहने वाले हाईस्कूल पास दोस्त निकेश की मदद से वह लोगों के बैंक खाते खाली करता रहा। महाराष्ट्र के वसई इलाके के रहने वाले ठगी के शिकार बलिराम की शिकायत पर दोनों की गिरफ्तारी के बाद यह कहानी सामने आई है।
निचलौल थाना क्षेत्र के बैदौली गांव के रहने वाले मिथुन की झारखंड में ससुराल है। पुलिस के मुताबिक इंटर पास मिथुन ने ससुराल में एपीके फाइल बनाने और इसके जरिये लिंक बनाकर साइबर ठगी की तरकीब सीख ली। गांव का उसका दोस्त निकेश ठगी में उसका मददगार बन गया। मिथुन ने अपने साथ निकेश को जोड़ने के साथ ही झारखंड तक गिरोह खड़ा कर लिया। गिरोह में कोई सिम उपलब्ध कराता था तो कोई जालसाजी के तार बुनता था। ट्रांजेक्शन के लिए अलग-अलग खाते भी इस्तेमाल किए जाते रहे।
इस बीच महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई इलाके के रहने वाले बलिराम राजभर ने पुलिस के पास साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। बलिराम का कहना था कि गैस कनेक्शन की केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर उन्हें व्हाट्सएप कॉल की गई। कॉल करने वाले ने एक एपीके फाइल डाउनलोड करवाई। फाइल इंस्टॉल होते ही उनका मोबाइल हैक हो गया। इसके बाद उनके इंडसइंड बैंक खाते से चार बार में कुल 4.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।इस मामले की जांच में जुटी पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से 70 हजार रुपये महराजगंज के निचलौल थाना क्षेत्र के बैदौली गांव के रहने वाले निकेश के यूनियन बैंक खाते में भेजे गए थे। बैंक रिकॉर्ड और प्रतिबिंब पोर्टल की मदद से निकेश को ट्रेस करते हुए पहुंची पुलिस टीम ने निचलौल-झुलनीपुर नहर मार्ग स्थित पुल के पास से उसके साथ मिथुन चौहान को भी गिरफ्तार कर लिया। साइबर थाना प्रभारी सजनू यादव ने बताया कि दोनों से पूछताछ में पुलिस को चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं। पुलिस इस मामले में गिरोह के अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि अभी बड़े गिरोह का पर्दाफाश होना बाकी है।
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अनजान नंबर से आए संदेश तो हो जाएं सतर्क
साइबर थाना प्रभारी सजनू यादव ने बताया कि मोबाइल पर अनजान नंबरों से आने वाले संदेशों पर सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल, लिंक या मोबाइल एप डाउनलोड न करें। बैंक, गैस एजेंसी या सरकारी संस्थाएं कभी भी व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर केवाईसी अपडेट नहीं करातीं। यदि आपके साथ साइबर ठगी हो जाती है तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते रकम को फ्रीज कर अपराधियों तक पहुंचा जा सके।
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हाईस्कूल पास साथी निकेश बैंक खाता और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने में करता था सहयोग
महराजगंज। निचलौल क्षेत्र के रहने वाले मिथुन को ससुराल में एपीके फाइल और जालसाजी का लिंक बनाने की तकनीक मिली और वह साइबर ठगी का मास्टरमाइंड बन गया। गांव के ही रहने वाले हाईस्कूल पास दोस्त निकेश की मदद से वह लोगों के बैंक खाते खाली करता रहा। महाराष्ट्र के वसई इलाके के रहने वाले ठगी के शिकार बलिराम की शिकायत पर दोनों की गिरफ्तारी के बाद यह कहानी सामने आई है।
निचलौल थाना क्षेत्र के बैदौली गांव के रहने वाले मिथुन की झारखंड में ससुराल है। पुलिस के मुताबिक इंटर पास मिथुन ने ससुराल में एपीके फाइल बनाने और इसके जरिये लिंक बनाकर साइबर ठगी की तरकीब सीख ली। गांव का उसका दोस्त निकेश ठगी में उसका मददगार बन गया। मिथुन ने अपने साथ निकेश को जोड़ने के साथ ही झारखंड तक गिरोह खड़ा कर लिया। गिरोह में कोई सिम उपलब्ध कराता था तो कोई जालसाजी के तार बुनता था। ट्रांजेक्शन के लिए अलग-अलग खाते भी इस्तेमाल किए जाते रहे।
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इस बीच महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई इलाके के रहने वाले बलिराम राजभर ने पुलिस के पास साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। बलिराम का कहना था कि गैस कनेक्शन की केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर उन्हें व्हाट्सएप कॉल की गई। कॉल करने वाले ने एक एपीके फाइल डाउनलोड करवाई। फाइल इंस्टॉल होते ही उनका मोबाइल हैक हो गया। इसके बाद उनके इंडसइंड बैंक खाते से चार बार में कुल 4.40 लाख रुपये निकाल लिए गए।इस मामले की जांच में जुटी पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से 70 हजार रुपये महराजगंज के निचलौल थाना क्षेत्र के बैदौली गांव के रहने वाले निकेश के यूनियन बैंक खाते में भेजे गए थे। बैंक रिकॉर्ड और प्रतिबिंब पोर्टल की मदद से निकेश को ट्रेस करते हुए पहुंची पुलिस टीम ने निचलौल-झुलनीपुर नहर मार्ग स्थित पुल के पास से उसके साथ मिथुन चौहान को भी गिरफ्तार कर लिया। साइबर थाना प्रभारी सजनू यादव ने बताया कि दोनों से पूछताछ में पुलिस को चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं। पुलिस इस मामले में गिरोह के अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि अभी बड़े गिरोह का पर्दाफाश होना बाकी है।
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अनजान नंबर से आए संदेश तो हो जाएं सतर्क
साइबर थाना प्रभारी सजनू यादव ने बताया कि मोबाइल पर अनजान नंबरों से आने वाले संदेशों पर सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल, लिंक या मोबाइल एप डाउनलोड न करें। बैंक, गैस एजेंसी या सरकारी संस्थाएं कभी भी व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर केवाईसी अपडेट नहीं करातीं। यदि आपके साथ साइबर ठगी हो जाती है तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते रकम को फ्रीज कर अपराधियों तक पहुंचा जा सके।