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Maharajganj News: नवोदय समेत 21 सीबीएसई स्कूलों में एआई की भी शिक्षाⱔ
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महराजगंज। जिले के नवोदय विद्यालय समेत 21 सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में नए सत्र से विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। सीबीएसई बोर्ड ने मिशन इंडिया के जरिये इसे प्रभावी करने की तैयारी की है।
इसे युवा एआई साक्षरता अभियान का एक रूप माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर भविष्य की तकनीकी में दक्षता विकसित करना है। शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई ने संयुक्त रूप से मिशन इंडिया लॉन्च की है। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई की बुनियादी अवधारणाओं से जोड़ा जाएगा।
जिले में नवोदय समेत सीबीएसई बोर्ड के सभी स्कूलों को इसमें शामिल किया गया है। सीबीएसई बोर्ड के सिटी कोआर्डिनेटर डॉ. डीपी सिंह के अनुसार एआई अब केवल कंप्यूटर साइंस तक सीमित नहीं है। इसे कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग हर क्षेत्र में उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में बच्चों को शुरू से ही इसकी जानकारी देने के लिए यह व्यवस्था प्रभावी हो रही है।
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तय पाठ्यक्रम में बच्चों को मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स और चैटबॉट की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। प्रैक्टिकल के जरिये बच्चे खुद छोटे-छोटे एआई मॉडल बनाना सीखेंगे। जैसे आवाज पहचानने वाला सिस्टम या चित्र पहचानने वाला प्रोजेक्ट। इसके लिए बोर्ड ने विशेष मॉड्यूल तैयार किया है।
बोले प्राचार्यसीबीएसई के विद्यार्थियों को एआई की जानकारी देकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। यह पहल डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- धीरज कुमार, प्राचार्य, जवाहर नवोदय विद्यालय
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इसे युवा एआई साक्षरता अभियान का एक रूप माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर भविष्य की तकनीकी में दक्षता विकसित करना है। शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई ने संयुक्त रूप से मिशन इंडिया लॉन्च की है। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई की बुनियादी अवधारणाओं से जोड़ा जाएगा।
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जिले में नवोदय समेत सीबीएसई बोर्ड के सभी स्कूलों को इसमें शामिल किया गया है। सीबीएसई बोर्ड के सिटी कोआर्डिनेटर डॉ. डीपी सिंह के अनुसार एआई अब केवल कंप्यूटर साइंस तक सीमित नहीं है। इसे कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग हर क्षेत्र में उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में बच्चों को शुरू से ही इसकी जानकारी देने के लिए यह व्यवस्था प्रभावी हो रही है।
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तय पाठ्यक्रम में बच्चों को मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, रोबोटिक्स और चैटबॉट की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। प्रैक्टिकल के जरिये बच्चे खुद छोटे-छोटे एआई मॉडल बनाना सीखेंगे। जैसे आवाज पहचानने वाला सिस्टम या चित्र पहचानने वाला प्रोजेक्ट। इसके लिए बोर्ड ने विशेष मॉड्यूल तैयार किया है।
बोले प्राचार्यसीबीएसई के विद्यार्थियों को एआई की जानकारी देकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। यह पहल डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- धीरज कुमार, प्राचार्य, जवाहर नवोदय विद्यालय