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Maharajganj News: बेसमेंट में चल रहे दुकान और अस्पताल, आग लगी तो जान बचाना मुश्किल

Fri, 26 Jun 2026 01:50 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 01:50 AM IST
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Maharashtra resident arrested on suspicion of illegal foreign currency and gold-silver trading.
कितनों को दी एनओसी अग्निशमन विभाग के पास नहीं है सही आंकड़ा
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जहां लगे हैं फायर सिलिंडर कई कर्मचारी चलाना नहीं जानते
अग्निशमन विभाग ने 574 स्कूलों और 400 अस्पतालों व क्लीनिकों को दी है एनओसी
महराजगंज। जिले और आसपास के इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कहीं बेसमेंट में कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक्स की बड़ी दुकानें खुल गई हैं तो कहीं डायग्नोस्टिक सेंटर और अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसमें से अधिकतर के पास आग से निपटने के संसाधन नहीं दिखे। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
अग्निशमन विभाग के आंकड़ों की माने तो जिले भर में 574 स्कूलों और करीब 400 अस्पतालों और क्लीनिकों को एनओसी दी गई है। इसमें कितने स्थानों पर अग्निशमन यंत्र संचालित हैं इसका आंकड़ा विभाग के पास नहीं है।
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शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक क्लीनिक, अस्पताल, होटल, शॉपिंग मार्ट खुल चुके हैं। कुछ बड़े संस्थानों को छोड़ दिया जाए तो कई के यहां आग से निपटने के संसाधन नहीं हैं। जिन संस्थानों में अग्निशमन उपकरण लगे भी हैं उन्हें उसे चलाने का तरीका नहीं मालूम है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कि अगर कभी हादसा हो गया तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।
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फरेंदा रोड पर स्थित एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में फायर सिलिंडर तो लगे दिखे लेकिन वहां के एक कर्मचारी से पूछा गया तो उसने बताया कि मैं इसे चलाना नहीं जानता हूं। इसी रोड पर एक ब्रांडेड कपड़े की दुकान भी बेसमेंट में ही संचालित होते दिखी। वहीं बलिया नाला स्थित एक शॉपिंग मॉल बेसमेंट में संचालित हो रहा है।
परतावल चौराहे से 200 मीटर उत्तर दिशा में महराजगंज मार्ग पर एक मेडिकेयर सेंटर बेसमेंट में संचालित हो रहा है। वहीं हरपुर तिवारी चौराहे पर भी एक क्लीनिक बेसमेंट में संचालित किया जा रहा है। सिसवा कस्बे के नए टैक्सी स्टैंड के समीप दो लाइब्रेरी बेसमेंट में संचालित हो रही है।
जनपद में 119 हॉस्पिटल और 118 पैथालोजी संचालित
स्वास्थ्य विभाग की माने तो जिले भर में 119 हॉस्पिटल और 118 पैथॉलोजी संचालित हो रहे हैं। इनके पास एनओसी भी है। विभाग का कहना है कि बिना एनओसी के हम लोग अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं करते हैं। मानकों की जांच के बाद ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
अग्निशमन विभाग के पास नहीं है सटीक आंकड़ा
अग्निशमन विभाग से जब हॉस्पिटल, स्कूल, कोचिंग संस्थान को एनओसी जारी करने के संबंध में जानकारी ली गई तो जिम्मेदार सटीक आंकड़ा नहीं दे सका। जिम्मेदारों का कहना था कि 574 विद्यालयों और करीब 400 अस्पतालों को एनओसी जारी की गई है। अब इसमें कितने विद्यालय और एनओसी संचालित हो रहे हैं इसका पता नहीं है। क्योंकि अस्पताल खोलने के लिए एनओसी मांगी जाती है उस वक्त तो एनओसी जारी कर दी जाती है लेकिन बाद में अगर किसी कारण से अस्पताल या स्कूल नहीं खुल पाया तो उसका आंकड़ा नहीं मिल पाएगा।
समय-समय पर प्रशिक्षण देने का दावा
अग्निशमन विभाग समय समय पर आग से निपटने के लिए बड़े प्रतिष्ठानों में प्रशिक्षण देने का दावा करता है। छोटी-छोटी दुकानों पर खानापूर्ती के लिए फायर सिलिंडर तो लगा दिया गया है लेकिन वहां के कर्मचारी फायर सिलिंडर चलाना नहीं जानते हैं। अगर ऐसे में हादसा हुआ तो आग कैसे बुझेगी यह तो समय ही बताएगा।
जिला अस्पताल में भी अधूरा पड़ा है आग से निपटने का इंतजाम
अक्टूबर 2025 से जिला अस्पताल में अग्निशमन उपकरण लगाने का कार्य चल रहा है। लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह पाइप और अन्य सामान रखे गए हैं। यह कब तक पूरा होगा यह भी भगवान भरोसे है।
स्वास्थ्य विभाग ने छह जून को सभी अस्पतालों को जारी किया था नोटिस
बढ़ रहे हादसों को देखते हुए सीएमओ कार्यालय की ओर से छह जून को अस्पतालों को नोटिस जारी कर आग से निपटने के इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। सात दिन के अंदर आग से निपटने के इंतजाम कर सूचित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी किसी ने जवाब नहीं दिया। स्वास्थ्य विभाग ने 25 जून को दोबारा से सभी अस्पताल संचालकों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. नवनाथ प्रसाद ने कहा कि अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर आग से निपटने के इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्पीकअप
कपड़े की खरीदारी के लिए अक्सर शॉपिंग मॉल जाना होता है। कई जगह आग से निपटने के इंतजाम नहीं हैं। ऐसे लोगों पर समय-समय पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
-अभिषेक राय, शास्त्रीनगर
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जगह-जगह कोचिंग संस्थान खुल रहे हैं लेकिन मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। ऐसे में खतरे का हमेशा डर बना रहता है। दुर्घटना होने पर भारी नुकसान होने की आशंका है।

- गोविंद वर्मा, शिवनगर
वर्जन
समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जानकारी दी जाती है। अस्पतालों और लाइब्रेरी की जांच भी की जाती है। आगे भी जांच अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
-राजेंद्र प्रसाद, एफएसओ
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