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प्रशासन की सख्ती से मधेसी नहीं कर सके आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो/महराजगंज
Updated Sat, 31 Oct 2015 12:46 AM IST
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प्रशासन की सख्ती से मधेसी सोनौली बॉर्डर पर नाकेबंदी नहीं कर सके। मगर मधेसियों के सक्रिय होने से सीमा पर तनाव बरकरार है।
अपने हक की लड़ाई लड़ रहे मधेसियों ने सौनौली बॉर्डर पर नाकाबंदी करने की रणनीति बनाई थी और अपनी योजना के अनुरूप मधेसी आंदोलनकारी सोनौली के श्यामकाट बगीचे में ईकट्ठा होना शुरू हो चुके हैं।
शुक्रवार को नाकाबंदी करने में असफल रहे मधेसियों ने अब शनिवार को एक बार फिर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। मधेसी मोर्चा भैरहवां के वरिष्ठ नेता सन्तोष पाण्डेय ने बताया कि दो सौ की संख्या में मधेसी कार्यकर्ता बार्डर पर धरना प्रदर्शन करने के लिए खेतों के रास्ते पहुंचकर श्यामकाट बागीचे के पास ईकट्ठा हुए थे।
लेकिन कुछ बड़े मधेसी नेताओं के निजी कारणों के चलते शुक्रवार को धरना प्रदर्शन व अन्य कार्यक्रम को स्थगित किया गया है।
बहरहाल, नेपाल में पिछलें 80 दिनों से मधेसी समुदाय की आम हड़ताल जारी है, जिसमें 40 से अधिक आन्दोलनकारियों की मौत हो चुकी है और दो दर्जन पुलिस कर्मी भी शहीद हुए है। बावजूद इसके नेपाल सरकार की तरफ से अभी तक उनकी मांग नहीं मानी गयी है और मधेसी अनवरत अपना आंदोलन चला रहे हैं।
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अपने हक की लड़ाई लड़ रहे मधेसियों ने सौनौली बॉर्डर पर नाकाबंदी करने की रणनीति बनाई थी और अपनी योजना के अनुरूप मधेसी आंदोलनकारी सोनौली के श्यामकाट बगीचे में ईकट्ठा होना शुरू हो चुके हैं।
शुक्रवार को नाकाबंदी करने में असफल रहे मधेसियों ने अब शनिवार को एक बार फिर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। मधेसी मोर्चा भैरहवां के वरिष्ठ नेता सन्तोष पाण्डेय ने बताया कि दो सौ की संख्या में मधेसी कार्यकर्ता बार्डर पर धरना प्रदर्शन करने के लिए खेतों के रास्ते पहुंचकर श्यामकाट बागीचे के पास ईकट्ठा हुए थे।
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लेकिन कुछ बड़े मधेसी नेताओं के निजी कारणों के चलते शुक्रवार को धरना प्रदर्शन व अन्य कार्यक्रम को स्थगित किया गया है।
बहरहाल, नेपाल में पिछलें 80 दिनों से मधेसी समुदाय की आम हड़ताल जारी है, जिसमें 40 से अधिक आन्दोलनकारियों की मौत हो चुकी है और दो दर्जन पुलिस कर्मी भी शहीद हुए है। बावजूद इसके नेपाल सरकार की तरफ से अभी तक उनकी मांग नहीं मानी गयी है और मधेसी अनवरत अपना आंदोलन चला रहे हैं।
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