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Maharajganj News: आक्रोश में खोया होश...पल भर में बन बैठा भाई का हत्यारा
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मां ने बताया-घर की सभी जिम्मेदारियां निभाता था लक्ष्मण
रील, वीडियो गेम में तुरंत परिणाम की चाहत में धैर्य को रहे बच्चे
खुशहालनगर। जिस भाई के साथ बचपन बीता, खेला-कूदा, खिलौने के लिए लड़ते-झगड़ते बड़ा हुआ। जिस भाई के साथ बचपन की सबसे खूबसूरत यादें जुड़ी थीं। मामूली बात पर किशोर उसी भाई का कत्ल कर दिया। 16 वर्ष की उम्र में अपने ही भाई की हत्या की घटना ने बच्चों की मनोदशा को लेकर लोगों सोचने पर मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि रील, वीडियो गेम आदि जगहों पर तुरंत परिणाम प्राप्त करने की मानसिकता के कारण लोगों में धैर्य कम हो रहा है। यह मानसिकता बच्चों के लिए घातक साबित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, खुशहालनगर थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति के दो पुत्रों में से छोट लक्ष्मण शर्मा (15) ऑनलाइन जूते मंगवाए थे। सोमवार को दोपहर में डिलीवरी बॉय जूते लेकर उनकी दुकान पर पहुंचा। इस पर बड़े भाई ने कहा कि जूता पहले मैं पहनूंगा, जबकि छोटा भाई लक्ष्मण पहले जूता पहनने के लिए देना नहीं चाह रहा था। इसको लेकर दोनों में कहासुनी हो गई और बड़े भाई ने लक्ष्मण पर कैंची से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि घायलावस्था में लक्ष्मण काफी देर तक दुकान में ही पड़ा रहा। सूचना पर काफी देर बाद मां पहुंची और पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले आई, जहां डॉक्टरों ने स्थिति को देखकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर जांच के दौरान डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस वारदात ने हर किसी को झकझोर दिया है। दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए पिता ने जखिरा बाजार में नाई की दुकान खोल रखी थी। दोनों भाई इसी दुकान में काम करते थे। जबकि घर की माली हालत सुधारने के लिए पिता दुबई में किसी फैक्ट्री में काम करता हैं। लक्ष्मण बड़े भाई के साथ दुकान चलाते हुए पढ़ाई भी करता था।
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बड़े भाई के लिए भी मंगाता था सामान
लक्ष्मण की मां का कहना है कि लक्ष्मण घर के खर्च चलाने में परिवार का हाथ बंटाता था। वह रोजाना 100 रुपया लाकर मुझे देता था। जो भी सामान अपने लिए खरीदता था, अपने भाई सूरज के लिए भी खरीदता था। बाजार से सब्जी लाने सहित घर में आवश्यकता का सामान वही लाता था। बड़ा बेटा उससे अकसर लड़ता-झगड़ता और मारपीट करता रहता था। इसके बाद भी वह अपने भाई का ध्यान रखता था। बड़ा भाई जो भी कमाता था खाने में उड़ा देता था। लक्ष्मण ने दो दिन पहले अपने लिए व अपने भाई के लिए भी ऑनलाइन जूता मंगवाया था। बावजूद इसके बड़े भाई ने लक्ष्मण का जूता पहन लिया था। इसी को लेकर सुबह दोनों लड़ते-झगड़ते दुकान पर साथ ही गए और वहां भी झगड़ा किया। मां ने बताया कि सोमवार को वह गांव में किसी के यहां शादी समारोह में काम करने चली गई थी।
वहीं जखिरा बाजार आसपास के दुकानदारों का कहना है कि जब से वे दोनों लड़के दुकान पर आए, तभी से झगड़ा कर रहे थे। ईंट का टुकड़ा चलाकर छोटे भाई ने बड़े भाई को मारा भी था। इस दौरान छोटा भाई लक्ष्मण दुकान पर आकर बैठ गया। बड़ा भाई भी थोड़ी दूर एक दुकान में बैठा था। न जाने उसे क्या सूझा वह बाल काटने वाली कैंची लेकर आया और पीछे से छोटे भाई के सिर के पिछले हिस्से पर वार कर दिया।
वर्जन
बच्चों और किशोरों में तुरंत पाने की चाह, जिद और गुस्सा पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है। आज कल के बच्चों में धैर्य का अभाव देखने को मिल रहा है। छोटी-छोटी बात भी उन्हें बड़ी लगने लगती है। ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि गुस्से को संभालना, मोबाइल का संतुलित उपयोग और भावनात्मक समझ भी सिखाना जरूरी है। खासकर ग्रामीण परिवारों में जहां मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातें कम होती हैं।
-डॉ. शुभम, बाल मनोरोग सलाहकार
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देश में 18 वर्ष की आयु बालिग होने का प्रमाण है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हत्या जैसे गंभीर मामलों में नाबालिगों का हाथ मिल रहा है। बच्चों में धैर्य की कमी का मुख्य कारण तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता (जैसे-शॉर्ट वीडियो, रील), तुरंत परिणाम पाने की आदत और धैर्य का अभ्यास न कर पाना (इंतजार न करना) है। यह व्यवहार आधुनिक जीवनशैली का परिणाम है।
-प्रो. अजय कुमार शास्त्री, प्राचार्य व समाजशास्त्री, जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज, महराजगंज
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केस एक
9 दिसंबर 2020 में बांसपार बैजौली में सात वर्षीय पीयूष का शव मिला था। इस मामले में 17 वर्षीय चाचा ने ही हत्या की थी। इसकी जानकारी परिवार को 50 लाख का फिरौती लिखे पत्र से हुई थी।
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केस दो
16 अप्रैल 2026 की रात में भाईयों ने ही अपनी बहन की लोहे की रॉड से पीटकर हत्या कर दी थी। इसमें एक बाल अपचारी भी शामिल था। पुलिस ने इस मामले में दोनों भाइयों को जेल भेज दिया था। जबकि बाल अपचारी को बाल सुधार भेज दिया है।
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रील, वीडियो गेम में तुरंत परिणाम की चाहत में धैर्य को रहे बच्चे
खुशहालनगर। जिस भाई के साथ बचपन बीता, खेला-कूदा, खिलौने के लिए लड़ते-झगड़ते बड़ा हुआ। जिस भाई के साथ बचपन की सबसे खूबसूरत यादें जुड़ी थीं। मामूली बात पर किशोर उसी भाई का कत्ल कर दिया। 16 वर्ष की उम्र में अपने ही भाई की हत्या की घटना ने बच्चों की मनोदशा को लेकर लोगों सोचने पर मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि रील, वीडियो गेम आदि जगहों पर तुरंत परिणाम प्राप्त करने की मानसिकता के कारण लोगों में धैर्य कम हो रहा है। यह मानसिकता बच्चों के लिए घातक साबित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, खुशहालनगर थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति के दो पुत्रों में से छोट लक्ष्मण शर्मा (15) ऑनलाइन जूते मंगवाए थे। सोमवार को दोपहर में डिलीवरी बॉय जूते लेकर उनकी दुकान पर पहुंचा। इस पर बड़े भाई ने कहा कि जूता पहले मैं पहनूंगा, जबकि छोटा भाई लक्ष्मण पहले जूता पहनने के लिए देना नहीं चाह रहा था। इसको लेकर दोनों में कहासुनी हो गई और बड़े भाई ने लक्ष्मण पर कैंची से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि घायलावस्था में लक्ष्मण काफी देर तक दुकान में ही पड़ा रहा। सूचना पर काफी देर बाद मां पहुंची और पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले आई, जहां डॉक्टरों ने स्थिति को देखकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर जांच के दौरान डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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इस वारदात ने हर किसी को झकझोर दिया है। दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए पिता ने जखिरा बाजार में नाई की दुकान खोल रखी थी। दोनों भाई इसी दुकान में काम करते थे। जबकि घर की माली हालत सुधारने के लिए पिता दुबई में किसी फैक्ट्री में काम करता हैं। लक्ष्मण बड़े भाई के साथ दुकान चलाते हुए पढ़ाई भी करता था।
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बड़े भाई के लिए भी मंगाता था सामान
लक्ष्मण की मां का कहना है कि लक्ष्मण घर के खर्च चलाने में परिवार का हाथ बंटाता था। वह रोजाना 100 रुपया लाकर मुझे देता था। जो भी सामान अपने लिए खरीदता था, अपने भाई सूरज के लिए भी खरीदता था। बाजार से सब्जी लाने सहित घर में आवश्यकता का सामान वही लाता था। बड़ा बेटा उससे अकसर लड़ता-झगड़ता और मारपीट करता रहता था। इसके बाद भी वह अपने भाई का ध्यान रखता था। बड़ा भाई जो भी कमाता था खाने में उड़ा देता था। लक्ष्मण ने दो दिन पहले अपने लिए व अपने भाई के लिए भी ऑनलाइन जूता मंगवाया था। बावजूद इसके बड़े भाई ने लक्ष्मण का जूता पहन लिया था। इसी को लेकर सुबह दोनों लड़ते-झगड़ते दुकान पर साथ ही गए और वहां भी झगड़ा किया। मां ने बताया कि सोमवार को वह गांव में किसी के यहां शादी समारोह में काम करने चली गई थी।
वहीं जखिरा बाजार आसपास के दुकानदारों का कहना है कि जब से वे दोनों लड़के दुकान पर आए, तभी से झगड़ा कर रहे थे। ईंट का टुकड़ा चलाकर छोटे भाई ने बड़े भाई को मारा भी था। इस दौरान छोटा भाई लक्ष्मण दुकान पर आकर बैठ गया। बड़ा भाई भी थोड़ी दूर एक दुकान में बैठा था। न जाने उसे क्या सूझा वह बाल काटने वाली कैंची लेकर आया और पीछे से छोटे भाई के सिर के पिछले हिस्से पर वार कर दिया।
वर्जन
बच्चों और किशोरों में तुरंत पाने की चाह, जिद और गुस्सा पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है। आज कल के बच्चों में धैर्य का अभाव देखने को मिल रहा है। छोटी-छोटी बात भी उन्हें बड़ी लगने लगती है। ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि गुस्से को संभालना, मोबाइल का संतुलित उपयोग और भावनात्मक समझ भी सिखाना जरूरी है। खासकर ग्रामीण परिवारों में जहां मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातें कम होती हैं।
-डॉ. शुभम, बाल मनोरोग सलाहकार
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देश में 18 वर्ष की आयु बालिग होने का प्रमाण है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हत्या जैसे गंभीर मामलों में नाबालिगों का हाथ मिल रहा है। बच्चों में धैर्य की कमी का मुख्य कारण तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता (जैसे-शॉर्ट वीडियो, रील), तुरंत परिणाम पाने की आदत और धैर्य का अभ्यास न कर पाना (इंतजार न करना) है। यह व्यवहार आधुनिक जीवनशैली का परिणाम है।
-प्रो. अजय कुमार शास्त्री, प्राचार्य व समाजशास्त्री, जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज, महराजगंज
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केस एक
9 दिसंबर 2020 में बांसपार बैजौली में सात वर्षीय पीयूष का शव मिला था। इस मामले में 17 वर्षीय चाचा ने ही हत्या की थी। इसकी जानकारी परिवार को 50 लाख का फिरौती लिखे पत्र से हुई थी।
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केस दो
16 अप्रैल 2026 की रात में भाईयों ने ही अपनी बहन की लोहे की रॉड से पीटकर हत्या कर दी थी। इसमें एक बाल अपचारी भी शामिल था। पुलिस ने इस मामले में दोनों भाइयों को जेल भेज दिया था। जबकि बाल अपचारी को बाल सुधार भेज दिया है।