फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Life at stake to stay alive

जिंदा रहने के लिए दांव पर जिंदगी

Tue, 31 May 2022 11:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 11:39 PM IST
विज्ञापन
Life at stake to stay alive
जिंदा रहने के लिए दांव पर लगा रहे जिंदगी
विज्ञापन

जंगल किनारे खेतों में बेहन की रखवाली कर रहे किसान, हर समय बना रहता है तेंदुए के हमले का खतरा
रखवाली न करने पर जंगली पशु कर देते हैं फसल बर्बाद, अन्न नहीं होने पर आ जाएगी भूखमरी की नौबत
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। लक्ष्मीपुर क्षेत्र में जंगल किनार बसे टेढ़ी खास गांव के 45 वर्षीय गुलाब इन दिनों काफी परेशान हैं। गांव में उनका छोटा सा छप्पर का मकान है, जिसमें नौ लोगों का परिवार गुजर बसर करता है। जीविका का साधन महज 30 डिस्मिल अर्थात करीब आधा बीघा जमीन है। खेत भी जंगल किनारे हैं। बेहन पड़ गई है, लेकिन जंगली पशुओं से बचाने के लिए कम से कम सुबह-शाम इसकी रखवाली जरूरी है, जो जिंदगी दांव पर लगाने से कम नहीं है। दरअसल, क्षेत्र में कभी-कभारी तेंदुए भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाके में आ जाते हैं और खेत में काम कर रहे किसानों पर हमला बोल देते हैं।
गुलाब की पत्नी पाना देवी का दिन भी काफी तनाव में बीतता है। बूढ़े माता-पिता और बच्चों समेत पूरे घर की जिम्मेदारी उनके ऊपर है। इन सबके बीच जब पति खेत पर जाते हैं तो मन के किसी कोने में अनजाना सा भय सताता रहता है। जंगल का किनारा, तेंदुआ और लोगों पर हमले की पुरानी बातें याद आते ही मन सिहर उठता है। खास तौर पर शाम के समय कामकाज के बीच वह बार-बार दरवाजे पर आकर बाहर की ओर झांक लेती हैं कि पति अब तक खेत से नहीं लौटे। खतरे के बीच न तो उनके पति और न ही परिवार के किसी अन्य सदस्य ने देर शाम जंगल किनारे न जाने का फैसला किया। इस बारे में उनका कहना है कि थोड़ी सी जमीन है। उस पर भी खेती नहीं करेंगे तो परिवार खाएगा क्या और जिंदा कैसे रहेगा।
विज्ञापन

यह कहानी सिर्फ गुलाब और पाना की नहीं है। क्षेत्र में ऐसे तमाम लोग है जो हर दिन इस खतरे से गुजरते हैं। ग्राम पंचायत टेढ़ी व गंगापुर के ओमप्रकाश, बेचन, सुरेंद्र, पिंटू, पन्नेलाल, भगवंत, सुदामा, दिनेश, गिरीश, रामबेलास, कैलास, कन्हई आदि के पास भी 30 से 75 डिस्मिल खेत है। इन सभी ने अपनी पेशानी का जिक्र किया। कहा कि जंगली जानवरों खासतौर पर तेंदुए के हमले का हमेशा भय बना रहता है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

-----
समस्या से दो-चार होते हैं करीब 50 गांवों के किसान
- लक्ष्मीपुर क्षेत्र में पिपरा सोहट, हरैया, बसंतपुर, खालिकगढ़, रानीपुर, हथियागढ़, रघुनाथपुर, भोतहा, राजपुर, बेलासपुर, हरमंदिर कला, महेशपुर मेहदिया, लक्ष्मीपुर कैथवालिया, कोलहुआ ढाला, लालपुर, वड़हरा, जंगल गुलरिहा, कजरी, टेढ़ी, गंगापुर, मुडली, सेमरहवा, मैरी पिपरी आदि करीब 50 गांव जंगल के किनारे बसे हैं।
------------
कोट--
- बेहन और फसल की रखवाली करना किसानों की मजबूरी है। ऐसा नहीं करने पर छुट्टा पशु, नीलगाय, सुअर और बंदर फसल बर्बाद कर देते हैं। किसान तेंदुए के डर से रात में तो खेत की रखवाली नहीं कर पाते, लेकिन उनका सुबह-शाम खेत में ही बीतता है।

- सुरेश चंद सहानी, किसान नेता
---------
- जंगल की सीमा काफी लंबी है। जहां तार-बाड़ लगाए जा चुके हैं, वहां फसल की क्षति कम होती है। जहां बाड़ नहीं लगाया गया है वहां भी किसानों को जंगल व जंगली जानवरों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
- विनोद तिवारी, रेंजर, लक्ष्मीपुर
----
कई बार हमला कर चुके हैं तेंदुए
-1 अप्रैल, 2021 : गेड़हरुआ वन चौकी क्षेत्र की ग्राम सभा पटखौली में घास काटने गए केदार (60), जफरेली (40) को तेंदुए ने घायल कर दिया था।
--
-17 अप्रैल 2021 : लक्ष्मीपुर रेंज के पिपरा सोहट के मैरी गांव में तेंदुए ने खेत में काम कर रहे दो किसानों को घायल कर दिया था।
--
- 28 नवंबर 2021 : आबादी में पहुंचे तेंदुए ने बरतानी टोला के एक बालक को मार डाला था। इसी तेंदुए ने एक गाय पर भी हमला किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed