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Maharajganj News: बौद्ध टीले से मिल रहीं कुषाण कालीन दीवारें
Thu, 15 Feb 2024 08:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 15 Feb 2024 08:56 PM IST
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लक्ष्मीपुर। नौतनवा तहसील के लक्ष्मीपुर विकास खंड क्षेत्र बनरसिहा कला में उत्खनन जारी है। बौद्ध टीले से कुषाण कालीन दीवारें, मृदभांड पुरावशेष मिल रहे हैं। ये अवशेष दो हजार वर्ष से भी पहले कुषाण काल से संबंध रखने वाले पुरावशेष व मृदभांड हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यहां बौद्ध संस्कृति व परंपरा को मानने वाले लोग निवास कर रहे थे जिनका किन्ही कारणों से यहां से आकस्मिक पलायन हो गया।
पुरातत्व अधिकारी रामविनय ने कहा कि कुशल कारीगरों व मजदूरों के साथ पुरातत्व विभाग की टीम बनर्सिहा कला के प्राचीन बौद्ध टीले के विभिन्न स्थानों पर उत्खनन कर रही है। लगातार मिट्टी के बर्तन और कुषाण काल के पुराने ईंट ही निकल ही रहे हैं। वर्तमान में चौड़ी चौंडी दीवारें मिल रही हैं। जो क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। इसी तरह से पूरा अवशेष मिलते रहे तो कुछ दिनों बाद स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।
पुरातत्व अधिकारी रामविनय का कहना है कि वर्तमान में जो मृदभांड मिट्टी के बर्तन और ईंट ही निकल रहे हैं जिनका संबंध कुषाण काल से लग रहा है। उससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि यहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग का सुसज्जित नगर था। जोकि अब से दो हजार वर्ष पहले का है। बताते चलें कि प्राचीन बौद्ध टीले की खुदाई पिछले साल भी की गई थी।
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पुरातत्व अधिकारी रामविनय ने कहा कि कुशल कारीगरों व मजदूरों के साथ पुरातत्व विभाग की टीम बनर्सिहा कला के प्राचीन बौद्ध टीले के विभिन्न स्थानों पर उत्खनन कर रही है। लगातार मिट्टी के बर्तन और कुषाण काल के पुराने ईंट ही निकल ही रहे हैं। वर्तमान में चौड़ी चौंडी दीवारें मिल रही हैं। जो क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। इसी तरह से पूरा अवशेष मिलते रहे तो कुछ दिनों बाद स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।
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पुरातत्व अधिकारी रामविनय का कहना है कि वर्तमान में जो मृदभांड मिट्टी के बर्तन और ईंट ही निकल रहे हैं जिनका संबंध कुषाण काल से लग रहा है। उससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि यहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग का सुसज्जित नगर था। जोकि अब से दो हजार वर्ष पहले का है। बताते चलें कि प्राचीन बौद्ध टीले की खुदाई पिछले साल भी की गई थी।
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