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Maharajganj News: कुष्ठ सेवाश्रम की भवन में रखा जा रहा था कबाड़, हुई पैमाइश
Tue, 11 Mar 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 11 Mar 2025 12:51 AM IST
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निचलौल। शहर के घोड़हवा वार्ड में निचलौल सिंदुरिया मुख्य मार्ग के किनारे स्थित कुष्ठ सेवाश्रम के भवन पर करीब दो दशक से कब्जा कर कबाड़ रखा जा रहा था। इसकी सूचना पर सोमवार को कुष्ठ सेवाश्रम के अध्यक्ष डीएम गोरखपुर और सचिव सुरेश सिंह के निर्देश पर संस्था की एक टीम पहुंची।
भवन की हालत देखने के बाद आसपास की भूमि की पैमाइश की। इसको देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। टीम प्रक्रिया पूरी करने के बाद कब्जाधारी को एक माह के अंदर भवन खाली करने का निर्देश देकर लौट गई।
टीम में शामिल कुष्ठ सेवाश्रम के सदस्य मानवेंद्र विक्रम सिंह ने पूछताछ में बताया कि घोड़हवा निवासी प्राह्लाद पटेल 1965 में कुष्ठ का इलाज कराने के लिए गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास कुष्ठ सेवाश्रम पहुंचे थे, जहां पर उन्होंने इलाज कराने के बाद घोड़हवा में कुष्ठ सेवाश्रम खोलने के लिए अपनी जमीन संस्था के नाम से दान कर दी थी।
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इसपर संस्था की ओर से कुष्ठ सेवाश्रम भवन का निर्माण कर दवा वितरण का कार्य शुरु कर दिया गया था, लेकिन इसी बीच एमडीटी दवा को सरकारी कर्मचारियों की ओर से घर-घर वितरण किया जाने लगा। इतना ही नहीं इस बीच महराजगंज अलग जिला बन गया।
ऐसे में कुष्ठ सेवाश्रम का यह उपकेंद्र बंद हो गया था। इन्होंने आगे कहा कि गाटा संख्या 1384 और 1385 में बना यह भवन आज भी कुष्ठ सेवाश्रम गोरखपुर के नाम से दर्ज है। इसकी जांच-पड़ताल की गई तो देखा गया कि भवन पर कब्जा कर कबाड़ रखा गया है।
आगे की प्रक्रिया के लिए रिपोर्ट तैयार कर अध्यक्ष और सचिव के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस अवसर पर कर्मचारी रविशंकर श्रीवास्तव और संजय चौरसिया आदि मौजूद रहे।
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भवन की हालत देखने के बाद आसपास की भूमि की पैमाइश की। इसको देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। टीम प्रक्रिया पूरी करने के बाद कब्जाधारी को एक माह के अंदर भवन खाली करने का निर्देश देकर लौट गई।
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टीम में शामिल कुष्ठ सेवाश्रम के सदस्य मानवेंद्र विक्रम सिंह ने पूछताछ में बताया कि घोड़हवा निवासी प्राह्लाद पटेल 1965 में कुष्ठ का इलाज कराने के लिए गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास कुष्ठ सेवाश्रम पहुंचे थे, जहां पर उन्होंने इलाज कराने के बाद घोड़हवा में कुष्ठ सेवाश्रम खोलने के लिए अपनी जमीन संस्था के नाम से दान कर दी थी।
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इसपर संस्था की ओर से कुष्ठ सेवाश्रम भवन का निर्माण कर दवा वितरण का कार्य शुरु कर दिया गया था, लेकिन इसी बीच एमडीटी दवा को सरकारी कर्मचारियों की ओर से घर-घर वितरण किया जाने लगा। इतना ही नहीं इस बीच महराजगंज अलग जिला बन गया।
ऐसे में कुष्ठ सेवाश्रम का यह उपकेंद्र बंद हो गया था। इन्होंने आगे कहा कि गाटा संख्या 1384 और 1385 में बना यह भवन आज भी कुष्ठ सेवाश्रम गोरखपुर के नाम से दर्ज है। इसकी जांच-पड़ताल की गई तो देखा गया कि भवन पर कब्जा कर कबाड़ रखा गया है।
आगे की प्रक्रिया के लिए रिपोर्ट तैयार कर अध्यक्ष और सचिव के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस अवसर पर कर्मचारी रविशंकर श्रीवास्तव और संजय चौरसिया आदि मौजूद रहे।